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Ramnagar Elephant Viral News/ विजय कश्यप: मां की ममता का कोई मोल नहीं होता और न ही इसकी कोई सरहद होती है. चाहे बात इंसान की हो या जंगल के जीवों की. उत्तराखंड के रामनगर में कॉर्बेट लैंडस्केप से होकर बहने वाली कोसी नदी के किनारे से मां और बच्चे के अटूट प्यार की एक ऐसी भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जो किसी का भी दिल पिघला दे.
उफनती नदी, नन्ही सी सूंड और मदद की पुकार
घटना रामनगर के रिंगौड़ा क्षेत्र की है, जहां हाथियों का एक झुंड रामनगर कॉर्बेट लैंडस्केप से होकर बहने वाली कोसी नदी पार कर रहा था. झुंड में तीन नन्हे मेहमान भी शामिल थे. दो बड़े बच्चे तो जैसे-तैसे लहरों को चीरते हुए निकल गए, लेकिन करीब एक महीने का बेहद छोटा नवजात बच्चा नदी के तेज और बेकाबू बहाव की चपेट में आ गया. पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह नन्हा सा वजूद खुद को संभाल नहीं पाया और बहने लगा.
जब ममता ने चीर दी पानी की लहरें
कुछ पलों के लिए ऐसा सन्नाटा छा गया मानो वह मासूम लहरों में कहीं खो जाएगा, तभी उस नन्हे हाथी ने अपनी नन्ही सी सूंड पानी से बाहर निकाली और अपनी मां की ओर उठाई. मानो मासूम ज़ुबान से चीख-चीखकर कह रहा हो, 'मां, मुझे बचा लो'. बच्चे की उस एक नन्ही सी पुकार का मां के दिल पर क्या असर हुआ, इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. बिना एक पल गंवाए, मां हाथी उफनती नदी में कूद पड़ी. उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और तैरते हुए अपने बच्चे के पास पहुंच गई. मां ने पलक झपकते ही अपनी सूंड से नन्हे हाथी को मजबूती से थामा, उसे बहाव के थपेड़ों से उबारा और सुरक्षित किनारे ले आई.
नजारा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर के कैमरे में कैद
नदी का बहाव अपनी पूरी रफ्तार से बहता रहा, लेकिन मां की ममता के आगे पानी की वो ताकतवर लहरें भी घुटने टेकने पर मजबूर हो गईं. इस भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाले पल को मशहूर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और वन्यजीव प्रेमी दीप रजवार ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. दीप रजवार बताते हैं कि जंगल की दुनिया में ऐसे अद्भुत और दिल छू लेने वाले दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं. यह घटना इंसानों को भी यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्रकृति ने हर जीव के भीतर अपने बच्चों के प्रति कितना गहरा भाव रखा है.
क्या बोले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक?
इस दिल को छू लेने वाली घटना पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि हाथियों को उनकी मातृत्व क्षमता और मजबूत सामाजिक संबंधों के लिए जाना जाता है. हाथियों के झुंड का नेतृत्व सामान्यतः मादा हाथियां करती हैं और बच्चों की सुरक्षा में मां के साथ झुंड की दूसरी मादा हाथियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. डॉ. बडोला के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं हाथियों के बीच बच्चों के प्रति गहरे लगाव और समूह में एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती हैं.
कुदरत का यह भावुक पल केवल एक वन्यजीव घटना नहीं, बल्कि हम इंसानों के लिए एक बड़ा सबक है. हाथियों का यह कुनबा तो जंगलों में ओझल हो गया, लेकिन पीछे छोड़ गया ममता और संवेदनशीलता की एक ऐसी अमर मिसाल, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि भाषा भले अलग हो, पर 'मां' का दिल हर सीने में एक ही तरह धड़कता है.