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भूपेन्द्र भण्डारी/रुद्रप्रयाग: रुद्रप्रयाग की कालीमठ घाटी से मां भगवती काली की डोली इन दिनों केदारनाथ धाम की ओर देवरा यात्रा पर है. 23 अगस्त से शुरू हुई द्वितीय चरण की यह यात्रा कई गांवों से होकर आगे बढ़ रही है. जगह-जगह श्रद्धालु मां की डोली का स्वागत कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. अब यात्रा खड़िया गांव पहुंच चुकी है. इसके बाद जम्मू गांव में दिव्य स्नान और पूजन के बाद डोली गौरीकुंड होते हुए केदारनाथ धाम पहुंचेगी, जहां बाबा केदार और मां काली के दिव्य मिलन की परंपरा निभाई जाएगी.
गुप्तकाशी और लमगोंडी से आगे बढ़ रही यात्रा
ढोल-दमाऊं की थाप, मां काली के जयकारे... और आस्था में डूबे श्रद्धालु. कालीमठ की मां भगवती काली की डोली अपनी पारंपरिक देवरा यात्रा पर लगातार आगे बढ़ रही है. 23 अगस्त से शुरू हुई यात्रा नारायणकोठी, ब्रह्मा के गांव, गुप्तकाशी और लमगोंडी क्षेत्र से होकर आगे बढ़ी. इसके बाद देवर और रुद्रपुर होते हुए डोली बलभद्र स्वामी मंदिर चूड़ी पहुंची, जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई. फिलहाल मां की डोली खड़िया गांव पहुंची है. यहां से यात्रा जम्मू गांव जाएगी, जहां मां भगवती के दिव्य स्नान और मुख्य पूजन की परंपरा पूरी की जाएगी. इसके बाद डोली गौरीकुंड स्थित गौरीमाई मंदिर होते हुए केदारनाथ धाम की ओर रवाना होगी.
चार वर्षों तक मां भगवती की यात्रा, 5वें साल महायज्ञ
समिति के महामंत्री आचार्य सुरेशानंद ने बताया कि मां भगवती काली की यह द्वितीय चरण की यात्रा है. केदारनाथ धाम में भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का विशेष महत्व है. श्रद्धालु इस पवित्र मिलन के साक्षी बनेंगे. यह यात्रा हमारी पुरानी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. समिति अध्यक्ष के मुताबिक, यह यात्रा 12 वर्षों की विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़ी है. चार वर्षों तक मां भगवती की यात्रा अलग-अलग चरणों में होती है और पांचवें वर्ष कालीमठ में महायज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
त्रियुगीनारायण होते हुए वापस लौटेगी मां की डोली
केदारनाथ धाम की यात्रा पूरी करने के बाद मां की डोली त्रियुगीनारायण होते हुए वापस लौटेगी. आगे भगवान बद्रीनाथ धाम की यात्रा और पंचगाई क्षेत्र की यात्रा के बाद त्रिवेणी स्नान तथा महायज्ञ की परंपरा पूरी होगी. इस पूरी यात्रा में पंचगाई मां भगवती कालीमठ समिति के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा, महामंत्री आचार्य सुरेशनन्द गोंड, उपाध्यक्ष सुदर्शन राणा और ब्रह्मा के पद पर आनन्द मणि सेमवाल सहित समिति के लोग साथ चल रहे हैं. मां काली की डोली अब केदारनाथ धाम की ओर बढ़ रही है और श्रद्धालुओं को उस विशेष क्षण का इंतजार है, जब बाबा केदार और मां काली का दिव्य मिलन होगा.