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उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगरा खंड शिक्षक विधान परिषद (MLC) सीट का चुनावी नतीजा केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि एक नाटकीय घटनाक्रमों, विवादों और तीखी बयानबाजी का गवाह बना है. समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. आकाश अग्रवाल ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी हरि किशोर तिवारी को 4,263 मतों के अंतर से हराकर इस सीट पर दोबारा कब्जा कर लिया है.
इस सीट पर कुल29,865 वोट पड़े थे, जिनमें से डॉ. आकाश अग्रवाल को 14,046 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी को 9,783 मतों से ही संतोष करना पड़ा. चुनाव में 2,128 वोट अवैध घोषित किए गए. 2020 के चुनाव में इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज किया था. उनका यह सफर इस बार समाजवादी पार्टी के सिंबल पर फिर से ऐतिहासिक जीत तक पहुंचा है.
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा वोटिंग के दौरान हुए विवाद और आकाश अग्रवाल के तेवरों की रही. 23 अक्टूबर को वोटिंग के दिन आकाश अग्रवाल ने सत्ता पक्ष पर बूथ कैप्चरिंग और अपने समर्थकों व शिक्षकों को डराने-धमकाने आरोप लगाया था. शिकायत लेकर मंडलायुक्त के पास पहुंचे आकाश अग्रवाल मीडिया के कैमरों के सामने फूट-फूटकर रो पड़े थे. उनका वीडियो भी खूब सुर्खियों में रहा. उन्होंने प्रशासन और पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा था कि मुझे अग्रवाल होने के नाते सताया जा रहा है. जिन सनातन के रक्षकों के कारण मुझे परेशान किया जा रहा है, मैं ऐसे सनातन में रहना नहीं चाहता.
उन्होंने यहां तक कह दिया था कि मैं शाही ईदगाह जाकर मुस्लिम धर्म अपना लूंगा. उनके इस बयान ने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. यह विवाद यहीं नहीं थमा. काउंटिंग की रात आगरा मंडी समिति परिसर में सपा और भाजपा समर्थक आमने-सामने आ गए. हिंसक झड़प के बाद आकाश अग्रवाल फटे हुए कुर्ते में बाहर निकले और आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों ने उनके साथ हाथापाई की है.
रिजल्ट आने के बाद डॉ. आकाश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षकों का MLC चुनाव अब पूरी तरह बदल गया है. डराने-धमकाने और बूथ कैप्चरिंग के जिस दौर से हमारे शिक्षक साथी गुजरे हैं, उसके बाद मुझे लगता है कि कोई शिक्षक अब चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं करेगा.
आपको बता दें, आगरा के कावेरी विहार के शमसाबाद रोड निवासी और पीएचडी व एलएलबी डिग्री धारक डॉ. आकाश अग्रवाल की पहचान वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के मुद्दों से बनी है. उन्होंने वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय दिलाने, पुरानी पेंशन योजना (OPS), कैशलेस चिकित्सा सुविधा और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों को जोर-शोर से उठाया. वह चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे.
इस चुनाव में वैश्य समाज से जुड़े राजनीतिक समीकरणों और मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की बयानबाजी को लेकर समाज में फैली नाराजगी का सीधा फायदा भी उन्हें मिला. तमाम गतिरोधों के बावजूद शिक्षकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें एक बार फिर विधान परिषद पहुंचा दिया है.