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उत्तर प्रदेश के मौसम का मिजाज अचानक बदलने जा रहा है. प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है. आंचलिक मौसम केंद्र लखनऊ के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान 'अर्णब' सक्रिय हुआ है, जो यूपी को भी प्रभावित करेगा. इस चक्रवात का सबसे ज्यादा असर 29 और 30 अक्टूबर को देखने को मिलेगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी.
मौसम विभाग का कहना है कि चक्रवाती तूफान 'अर्णब' पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़कर आंध्र प्रदेश और यानम के तटों को पार कर चुका है. इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इसका सीधा प्रभाव अब उत्तर प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है.
28 अक्टूबर से ही पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू हो जाएगा. वहीं, 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में मूसलाधार बारिश होगी, जिसके चलते तापमान में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है, जिससे ठंड का अहसास अचानक बढ़ जाएगा.
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है. मौसम विभाग का कहना है कि 29 अक्टूबर को सोनभद्र में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है. जिन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, उनमें चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर और सोनभद्र शामिल है. जिन जिलों में भारी बारिश के आसार हैं, उनमें बांदा, फतेहपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अंबेडकरनगर हैं.
30 अक्टूबर को जिन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, उनमें देवरिया, गोरखपुर, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर है. इसके अलावा आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अयोध्या और अंबेडकरनगर में भी भारी बारिश होने की संभावना है.
इस बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से किसानों की चिंता बढ़ गई है. मौसम विभाग ने कृषि क्षेत्र को संभावित नुकसान से बचाने के लिए किसानों को तुरंत एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है. हवा के झोंकों से गन्ने की फसल को गिरने से बचाने के लिए जड़ों में मिट्टी चढ़ाएं और आवश्यकतानुसार सहारा दें. खेतों में जलभराव रोकने के लिए तुरंत उचित निकासी की व्यवस्था करें और फिलहाल फसलों की सिंचाई रोक दें.
जिन इलाकों में धान, मक्का, अरहर, तिल, उड़द-मूंग या सब्जियां पककर तैयार हैं, वहां कटाई करके उपज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं. कृषि मंडियों में खुले में रखे अनाज को भी भीगने से बचाने के लिए तिरपाल या ढंकने की पुख्ता व्यवस्था करें.