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UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं. जातीय संतुलन, क्षेत्रीय समीकरण और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के साथ-साथ स्थानीय दिग्गज नेताओं पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है.माना जा रहा है कि BJP इस बार सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों का ध्यान रखते हुए कुछ चौंकाने वाले नामों पर दांव लगा सकती है.
केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं का राज्यसभा जाना तय?
केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है. यदि केंद्र सरकार में उन्हें आगे भी मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाए रखना है, तो पार्टी उन्हें फिर से राज्यसभा के रास्ते उच्च सदन में भेजेगी. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हाल ही में राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाकर संगठन में पुनः सक्रिय किया गया है, ऐसे में उन्हें भी यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं.
जातीय समीकरण: ब्राह्मण चेहरों पर दांव
मौजूदा सांसद सीमा द्विवेदी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसे में ब्राह्मण कोटे से प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए नए और मजबूत दावेदारों के नामों पर मंथन चल रहा है.
हरीश द्विवेदी: अभी हाल ही में राष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए हरीश द्विवेदी को रेस में सबसे आगे और मजबूत दावेदार माना जा रहा है.
अर्चना मिश्रा: संगठन में सक्रिय अर्चना मिश्रा के नाम की भी काफी चर्चा है. सूत्रों के मुताबिक उनको राज्यसभा भेजा जा सकता है. ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी एक या दो ब्राह्मण चेहरों को यूपी से उच्च सदन में भेज सकती है.
ओबीसी, दलित और अन्य समीकरण
ओबीसी वर्ग: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाली पूर्व सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर आई हैं.
दलित प्रतिनिधित्व: दलित कोटे से बृजलाल की जगह किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा या उन्हें रिपीट किया जाएगा, इस पर सस्पेंस अभी बरकरार है.
रिपीट या बदलाव: नीरज शेखर को पार्टी दोबारा मौका दे सकती है, जबकि अरुण सिंह और गीता शाक्य को रिपीट किया जाएगा या उनकी जगह नए चेहरों को लाया जाएगा, यह अभी साफ नहीं है.
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि सामाजिक समरसता और सर्वसमावेशी संदेश देने के लिए भाजपा किसी मुस्लिम चेहरे को भी राज्यसभा चुनाव में उतारकर चौंका सकती है.