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तबादला हुआ पर 'कुर्सी' से प्यार कायम: यूपी शिक्षा विभाग में 'अंगद' बने अफसर-कर्मचारी, अब शासन ने मांगा ब्योरा!

UP Education Department Transfer News: 11 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में 488 लिपिकों/आशुलिपिकों और 118 खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) का तबादला हुआ था, लेकिन अभी तक लगभग आधे कर्मचारियों और अधिकारियों ने नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है. BEO सत्र के बीच में तबादले का विरोध कर रहे हैं, जबकि कई कर्मचारी पुरानी जगह पर ही बने हुए हैं.

Written By Pooja Singh
Published: Oct 03, 2026, 06:50 AM IST | Updated: Oct 03, 2026, 06:51 AM IST
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UP Education Department Transfer News: उत्तर प्रदेश के सरकारी महकमों में तबादले का आदेश तो जारी हो जाता है, लेकिन कुछ कर्मचारियों के लिए अपनी पुरानी कुर्सी छोड़ना किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं होता. प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है. शासन की ओर से किए गए तबादलों के बावजूद बड़ी संख्या में कनिष्ठ लिपिक, वरिष्ठ सहायक, प्रधान सहायक, आशुलिपिक और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) नई तैनाती स्थल पर जाने के बजाय पुरानी जगह पर ही 'अंगद' की तरह पैर जमाए बैठे हैं.

अंगद की तरह पैर जमाए बैठे हैं कर्मचारी
शासन ने विभाग के प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और कसावट लाने के लिए 11 सितंबर को लिपिक व आशुलिपिक संवर्ग के 488 कर्मचारियों के तबादले किए थे. इसके अलावा 118 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के भी तबादले किए गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तबादला आदेश जारी होने के हफ्तों बीत जाने के बाद भी लगभग आधे कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है. हद तो तब हो गई जब निदेशालय स्तर से इस संबंध में मांगी जा रही रिपोर्ट को भी जिला और मंडल स्तर के अधिकारी ठंडे बस्ते में डाले बैठे हैं.

अधिकारियों की आनाकानी, बीईओ का विरोध
स्थानांतरित कर्मचारियों के कार्यमुक्त न होने के पीछे जहां स्थानीय स्तर की सांठगांठ और मोह बताया जा रहा है, वहीं खंड शिक्षा अधिकारियों ने इस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है. बीईओ का तर्क है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादला किए जाने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है. इसी को ढाल बनाकर कई अधिकारी नई पोस्टिंग पर जाने से बच रहे हैं.

निदेशालय का कड़ा रुख, दी कार्रवाई की चेतावनी
अब इस पूरे मामले पर अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मनोज कुमार द्विवेदी ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, सहायक शिक्षा निदेशकों (एडी) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को कड़ा पत्र जारी कर नई तैनाती पर न पहुंचने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की तत्काल रिपोर्ट मांगी है. अपर शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर जिला या मंडल स्तर से जानकारी देने में ढिलाई बरती गई या कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त नहीं किया गया, तो संबंधित नियंत्रक अधिकारियों के खिलाफ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को सिफारिश भेजी जाएगी.

सरकारी व्यवस्था में नियम-कायदों से ऊपर उठकर कुर्सी से चिपके रहने की यह पुरानी फितरत अब अफसरों पर भारी पड़ने वाली है. देखना दिलचस्प होगा कि शासन की इस कड़ी चेतावनी के बाद ये 'अंगद' अपनी नई मंजिल की ओर कदम बढ़ाते हैं या फिर विभागीय कार्रवाई का शिकार बनते हैं.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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