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बुंदेलखंड का अनूठा उत्सव: धूमधाम से ब्याहे गए टेसू और झिंझिया, जानिए क्या है शरद पूर्णिमा से जुड़ी यह परंपरा?

जालौन में टेसू-झिंझिया विवाह का आयोजन धूमधाम से संपन्न हुआ. इस पारंपरिक बुंदेली खेल में लोकगीतों, नृत्य और उत्साह के बीच टेसू-झिंझिया का विवाह कराया जाता है. जालौन के कोंच क्षेत्र में भी डीजे के साथ बारात निकाली गई. आयोजन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे.

Written By Pooja Singh
Published: Oct 26, 2026, 10:52 AM IST | Updated: Oct 26, 2026, 11:24 AM IST
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दशहरा बीतते ही बुंदेलखंड की गलियों में गूंजते पारंपरिक लोकगीत माहौल को पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग देते हैं. मौका होता है बुंदेलखंड की अनूठी लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत करने वाले 'टेसू-झिंझिया विवाह' का. जालौन के कोंच क्षेत्र में इस बार भी यह पारंपरिक उत्सव पूरे हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ, जहां डीजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर टेसू की बारात निकली. इस बारात ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे.

चार चरणों में पूरी होती है ये अनोखी यात्रा

यह परंपरा भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर शरद पूर्णिमा तक चलती है. यह किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होती. कुंवारी कन्याएं चार अलग-अलग चरणों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां करती हैं. क्वार मास में गोबर से दीवारों पर सूर्य-चंद्रमा के चित्र बनाकर लोकगीत गाए जाते हैं. इसके बाद गौरा की पूजा, सुअटा के चित्र का पूजन और दशहरा से टेसू-झिंझिया तैयार करने की परंपरा निभाई जाती है.

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घर-घर गूंजते बुंदेली गीत, दान की परंपरा
इस उत्सव के दौरान बच्चे और कन्याएं टोलियां बनाकर घर-घर जाते हैं. इस दौरान वे पारंपरिक बुंदेली गीत गाकर दान स्वरूप अनाज और रुपये  मांगते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में जब इन दोनों का विवाह संपन्न कराया जाता है, तो पूरा माहौल लोक-संस्कृति के रंगों में सराबोर हो जाता है.

क्या है इसकी मान्यता?

इस अनूठी परंपरा का सबसे दिलचस्प और धार्मिक पहलू कन्याओं का 'सुअटा' यानी भौमासुर राक्षस के पैर पूजना है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा के दिन ही भौमासुर का वध किया था. इसी मान्यता से जुड़ी यह परंपरा आज भी बुंदेलखंड सहित मथुरा-वृंदावन में लोकआस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की कहानी बयां करती है.

(जालौन से जितेन्द्र सोनी की रिपोर्ट)

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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