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राजेश मिश्र/मीरजापुर: शारदीय नवरात्रि का पावन महापर्व आज अपने अंतिम चरण यानी महानवमी तिथि पर पहुंच गया है. इस अवसर पर पूरा देश और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध सिद्धपीठ विंध्याचल धाम में आदिशक्ति मां दुर्गा की नौवीं शक्ति 'मां सिद्धिदात्री' के जयकारों से गुंजायमान है. नवमी तिथि पर सिद्धपीठ विंध्याचल में तड़के से ही भक्तों का असीम जनसैलाब उमड़ पड़ा है.मां के अलौकिक दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना कर रहे हैं.
मां सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप और अष्ट सिद्धियां
नवरात्र में माँ शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है, नवमी के दिन सकल सिद्धि को प्रदान करने वाली माँ की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ प्रकार की सिद्धियां हैं. भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर माँ की कृपा जिसे मिल गयी वह सुख और समृद्धि का प्रतीक हो गया. माँ सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं. इनकी आराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का परायण होता है.
मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है. वे सिद्धिदात्री, सिंह वाहिनी, चतुर्भुजा तथा प्रसन्नवदना हैं. मार्कंडेय पुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व- ये आठ सिद्धियां बतलाई गई हैं. इन सभी सिद्धियों को देने वाली सिद्धिदात्री मां हैं. मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, तमस, असंतोष आदि से निकालकर स्वाध्याय, उद्यम, उत्साह, कर्त्तव्यनिष्ठा की ओर ले जाता है और नैतिक व चारित्रिक रूप से सबल बनाता है. हमारी तृष्णाओं व वासनाओं को नियंत्रित करके हमारी अंतरात्मा को दिव्य पवित्रता से परिपूर्ण करते हुए हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है.
शिवजी के अर्धनारीश्वर बनने की पौराणिक कथा
देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी जी की उपासना करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शिव जी का स्वरूप अर्द्धनारीश्वर का हो गया था. नवरात्र के नौवें दिन भगवती के सिद्धिदात्री रूप की देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि आदि सभी आराधना करके अपने जीवन में यश, बल और धन की प्राप्ति करते हैं. यह देवी उन सभी को अष्ट सिद्धियां भी प्रदान करती हैं, जो सच्चे हृदय से उनकी आराधना करते हैं.
56 भोग, नवरस भोजन और नवरात्र का पारण
विंध्याचल के आचार्य राजन मिश्र ने बताया कि महानवमी पर मां सिद्धिदात्री को 56 व्यंजनों (छप्पन भोग) का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन भक्त मां को नवरस युक्त भोजन, फल और फूल अर्पित करके विधि-विधान से पूजन संपन्न करते हैं. इस पूजन के साथ ही नौ दिनों के नवरात्र व्रत का पारण भी होता है.
ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से नवमी का पूजन करता है, उसे इस लोक में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसका जीवन मंगलमय हो जाता है. सिद्धपीठ में देश के कोने -कोने से आने वाले भक्त माँ का दर्शन पाने के लिए आतुर रहते हैं. धाम में आने पर असीम शांति मिलती है, भक्तों की आस्था से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती है. माता के किसी भी रूप का दर्शन करने मात्र से प्राणी के शरीर में नयी उर्जा, नया उत्साह व सदविचार का संचार होता है. अत: अपनी लौकिक, पारलौकिक उन्नति चाहने वालों को इनकी उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिए.