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Tulsi Peethadhishwar Rambhadracharya Controversial Remark: तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों को लेकर की गई कथित टिप्पणी का मामला अब अदालत पहुंच गया है. प्रयागराज की ACJM-8 अदालत ने शिकायत पर मामले को दर्ज करने का आदेश दिया है और रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है. मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी.
कब का है मामला?
यह मामला 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में आयोजित भागवत कथा के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है. शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि रामभद्राचार्य ने उपाध्याय, पाठक, चौबे, त्रिगुणायत और दीक्षित जैसे ब्राह्मण उपनामों को लेकर टिप्पणी की थी.
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, भागवत कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. आरोप है कि उन्होंने इन समुदायों को लेकर विवाह संबंधों और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी बातें कही थीं. इसी बयान का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया और विवाद शुरू हुआ.
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
वाराणसी निवासी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य संत होने के कारण बड़ी संख्या में लोग उनका सम्मान करते हैं. शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके बयान के बाद उपाध्याय समाज को लेकर लोगों की धारणा प्रभावित हुई और समाज के युवक-युवतियों के विवाह में भी परेशानी आने लगी. शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस और प्रशासन के स्तर पर भी कार्रवाई की मांग की थी. कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अदालत का रुख किया. इसके बाद प्रयागराज की अदालत में परिवाद दाखिल किया गया.
रामभद्राचार्य ने क्या कहा था?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 3 फरवरी 2024 को वृंदावन की भागवत कथा में रामभद्राचार्य ने उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक जैसे ब्राह्मण उपनामों का उल्लेख करते हुए विवाह संबंधों और इन समुदायों के बारे में टिप्पणी की थी. उपलब्ध रिपोर्टों में उनके बयान के अलग-अलग अंश प्रकाशित हुए हैं. बयान में जगद्गुरु ने कहा था- ऊंच कुल के ब्राह्मण अपनी बेटियां उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठकों को नहीं देते, क्योंकि हम इन्हें अधम मानते हैं.
12 अक्टूबर को अगली सुनवाई
अदालत ने मामले में रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है. फिलहाल मामला शुरुआती न्यायिक प्रक्रिया में है. शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है.