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मोहम्मद गुफरान/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया. पुलिस जांच के चौथे दिन आरोपी राजेश यादव और उसके भाई राकेश यादव को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के दौरान दोनों भाइयों ने पुणे की एक निजी कंपनी से करोड़ों रुपये का गबन कर दिया था.
आरोपी राजेश यादव और उसके भाई राकेश यादव से पूछताछ में पता चला है कि यह पैसा पुणे की एक कंपनी का है. नाम बताया जा रहा है - मार्शल कंपनी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कोविड काल में जब आयकर विभाग ने इस कंपनी पर छापा मारा था, तब कंपनी की नकदी ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी राजेश यादव को दी गई थी.
आरोप है कि राजेश सात बैग में भरकर पैसा पुणे से प्रयागराज ले आया. इसके बाद कंपनी का मालिक गिरफ्तार होकर जेल चला गया और राजेश वापस पुणे नहीं लौटा. हालांकि, पुलिस का कहना है कि कंपनी और बरामद पैसों के बीच संबंध की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव में जमीन में गड़े 3 नीले ड्रमों से 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये मिले हैं. आयकर विभाग ने गिनती पूरी कर रकम सील कर दी है. जांच में राजेश और उसके परिवार के नाम पर म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और LIC में बड़ा निवेश मिला है. प्रयागराज और प्रतापगढ़ में जमीन खरीदने के कागज भी मिले हैं.
आयकर विभाग घर के 5 कमरों की तलाशी ले चुका है और अभी भी खुदाई जारी है. नकदी छिपे होने की आशंका को देखते हुए मजदूरों से घर के कमरों और आंगन में खुदाई कराई जा रही है. पुलिस दोनों भाइयों से लगातार पूछताछ कर रही है और उनके पुराने मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाल रही है. फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये करोड़ों रुपये किसके हैं और कोविड के समय इन्हें पुणे से प्रयागराज कैसे लाया गया?