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करहल में होगा करामात या BJP को फिर करना पड़ेगा इंतजार? जानें इस हॉट सीट का पूरा भूगोल

Karhal Vidhan Sabha Chunav: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के गढ़ माने जाने वाले करहल सीट की चर्चा तेज हो गई है. सैफई परिवार का इस सीट से पुराना रिश्ता है. बीजेपी यहां सियासी हवा बदलने में जुट गई है.

Written By Amitesh Pandey
Published: Oct 07, 2026, 04:45 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 12:03 AM IST
Image Credit: Z Creative (AI Image)
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अतुल सक्सेना/मैनपुरी: मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट यूपी की उन चर्चित सीटों में शामिल है, जहां चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि जातीय समीकरण, सियासी विरासत और स्थानीय प्रभाव का भी खेल माना जाता है. करहल को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. सैफई परिवार का इस सीट का पुराना रिश्ता रहा है. मुलायम सिंह यादव करहल के जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे और यहीं से उनके राजनीतिक सफर की भी शुरुआत हुई.

अखिलेश यादव बने थे विधायक 
2022 में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने करहल से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की. बाद में उनके लोकसभा जाने के बाद हुए उपचुनाव में सपा ने तेज प्रताप यादव को मैदान में उतारा और उन्होंने भी इस सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखा. करहल की सियासत को समझने के लिए सिर्फ सपा की जीत देखना काफी नहीं है. यहां का जातीय गणित भी बेहद महत्वपूर्ण है.

करहल विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
करहल विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 3 लाख 71 हजार है. इसमें करीब 1 लाख 25 हजार यादव मतदाता हैं. वहीं, करीब 35 हजार शाक्य, 30 हजार बघेल, 30 हजार क्षत्रिय, करीब 22 हजार अनुसूचित जाति, 18 हजार मुस्लिम, 16 हजार ब्राह्मण और करीब 15-15 हजार लोधी तथा वैश्य मतदाता हैं. यानी करहल के चुनावी मैदान में यादव मतदाता सबसे बड़ा सामाजिक आधार हैं.

चुनाव का नतीजा बदलने का दम रखते हैं ये वोटर 
शाक्य, बघेल, क्षत्रिय, दलित, ब्राह्मण, मुस्लिम, लोधी और वैश्य समेत दूसरे सामाजिक समूह भी किसी भी चुनाव में नतीजे की दिशा बदलने की ताकत रखते हैं. भाजपा ने भी उपचुनाव में यादव प्रत्याशी पर अपना बड़ा दांव लगाया था. सैफई परिवार के रिश्तेदार अनुजेश प्रताप यादव को अपना प्रत्याशी बनाया, हालांकि भाजपा प्रत्याशी अनुजेश प्रताप लगभग 14700 वोटों से हार गए. भाजपा ने यादव प्रत्याशी पर दांव खेलकर जीत के अंतर को कम करने का काम किया.

अनुजेश प्रताप सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सगे बहनोई 
कुंवर अनुजेश प्रताप यादव, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सगे बहनोई हैं, लेकिन पारिवारिक रिश्ते टूटे हुए हैं. अनुजेश प्रताप यादव की मां मृदुला यादव 2 बार विधायक भी रही हैं. करहल में सियासी लड़ाई सिर्फ सपा बनाम भाजपा की नहीं, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को साधने की भी होती है. करहल विधानसभा लंबे समय से सपा का गढ़ जरूर रहा लेकिन सीट हमेशा एकतरफा नहीं रहीं है. 2002 में भाजपा ने करहल विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी और बाबू सोवरन सिंह यादव विधायक बने थे.

2027 में करहल की जनता किसके साथ खड़ी 
सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य से बात की तो उन्होंने 2027 में बदलाव की बात कही. उन्होंने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव गरीब, मजबूर, किसान, शोषित, वंचित की लड़ाई लड़ते रहे और अब हमारे नेता अखिलेश यादव इस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं. करहल की राजनीति में विरासत, जातीय समीकरण, विकास, कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रभाव, इन सभी की अपनी भूमिका है. हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जनता का मिला-जुला प्रभाव देखने को मिला. 

सपा का गढ़ क्यों जाता है
करहल सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है. यहां पर सपा का सात बार कब्जा रहा है. 1985 में यह सीट अस्तित्व में आई. उस समय दलित मजदूर किसान पार्टी के बाबूराम यादव चुनाव जीते. इसके बाद 1989 और 1991 में समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) ने जीत दर्ज की. फिर 1993 से सपा लगातार यह सीट जा रही है. 1996 में सपा के टिकट पर बाबूराम यादव विधायक बने. 2000 के उपचुनाव में सपा के अनिल यादव जीते. सिर्फ 2002 में बीजेपी के खाते में यह सीट गई. इसके बाद फिर 2007, 2012 और 2017 में सपा के खाते में रही ये सीट. 
 

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About the Author

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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