'घर टूटता तो कैसा लगता? हमें खत्म करने की कोशिश'... बुलडोजर एक्शन पर फूटा वकीलों का गुस्सा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिला अदालत और आसपास के परिसरों में वकीलों द्वारा बनाए गए अवैध चैंबरों पर प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) चला.
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में आज हाई कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है. नगर निगम की टीम ने कैसरबाग स्थित सेंट्रल बार एसोसिएशन के करीब 200 से ज्यादा अवैध वकील चैंबरों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हो गई है, जिसके बाद मौके पर हंगामा शुरू हो गया. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है. सुप्रीम कोर्ट से वकीलों को किसी भी प्रकार की राहत न मिलने के बाद नगर निगम और विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह बड़ी कार्रवाई की है.
हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही कार्रवाई
ADCP वेस्ट धनंजय कुशवाहा ने बताया कि "माननीय न्यायालय के आदेश के क्रम में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। इसमें शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल लगाया गया है।" नगर निगम के मुताबिक करीब 225 से 245 चैंबरों को अवैध के तौर पर चिन्हित किया गया था। इन सभी चैंबरों पर पहले से लाल निशान लगाकर नंबरिंग की गई थी और नोटिस भी जारी किए गए थे.
वकीलों का विरोध, बोले - पहले वैकल्पिक व्यवस्था दें
कार्रवाई का विरोध करते हुए सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व संयुक्त सचिव अधिवक्ता एस.डब्ल्यू. बारी ने कहा, "हमारे चैंबर हमारी आँखों के सामने तोड़े जा रहे हैं। अगर आपका अपना घर आपके सामने तोड़ा जा रहा होता तो आपको कैसा लगता? यह पूरी तरह मनमानी और ज़बरदस्ती है। वे हमें खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। हम अपने चैंबर दूसरी जगह ले जाने के लिए तैयार हैं, हम खुशी-खुशी ऐसा करने को भी तैयार हैं, लेकिन उन्हें हमें काम करने के लिए कोई दूसरी जगह देनी होगी।"
वकीलों का कहना है कि वे पिछले 15-20 साल से इन्हीं चैंबरों में बैठकर प्रैक्टिस कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन चैंबर हटने से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. प्रशासन को पहले बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए. फिलहाल मौके पर नगर निगम की टीम कार्रवाई कर रही है और वकील धरना-प्रदर्शन कर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
गौरतलब है कि अवैध निर्माणों को बचाने के लिए वकीलों की ओर से अदालतों में गुहार लगाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई को तेज कर दिया है. प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि सार्वजनिक जगहों और अवैध कब्जों पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी.खबर लिखे जाने तक नगर निगम की टीम कार्रवाई कर रही है और वकील धरना-प्रदर्शन कर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.
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(लखनऊ से मयूर शुक्ला की रिपोर्ट)