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धनतेरस पर खुला मां अन्नपूर्णा का दिव्य खजाना: 5 दिन मिलेंगे सोने-चांदी और अष्टधातु के सिक्के, युवाओं और जेन-जी में गजब का उत्साह

धनतेरस के अवसर पर काशी के मां अन्नपूर्णा मंदिर में खजाना प्रसाद वितरण की प्राचीन परंपरा शुरू हो गई है. अगले पांच दिनों तक भक्तों के बीच मां अन्नपूर्णा का खजाना प्रसाद वितरित किया जाएगा.

Written By Pooja Singh
Published: Nov 06, 2026, 05:36 PM IST | Updated: Nov 06, 2026, 05:38 PM IST
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काशी में धनतेरस के मौके पर एक बेहद प्राचीन परंपरा शुरू हो गई है. विश्व प्रसिद्ध मां अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से लेकर अन्नकूट महापर्व तक यानी कुल पांच दिनों तक भक्तों के बीच मां अन्नपूर्णा का 'खजाना प्रसाद' वितरित किया जा रहा है. मान्यता है कि मां के दरबार से मिलने वाला यह खजाना प्रसाद जिस भी घर की तिजोरी में रखा जाता है, वहां कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती है.

इस प्रसाद को पाने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं.

सोने-चांदी के सिक्के और धान का लावा बनता है प्रसाद
जहां धनतेरस के दिन आम तौर पर लोग बाजार से सोने-चांदी और बर्तन की खरीदारी कर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, वहीं काशी में मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों को खुद खजाना बांटती हैं. मंदिर प्रशासन की ओर से इस बार खजाना प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को सोने-चांदी समेत कुल आठ धातुओं से निर्मित विशेष सिक्के और धान का लावा वितरित किया जा रहा है.

युवाओं और जेन-जी की दिख रही भागीदारी
मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज का कहना है कि इस पांच दिवसीय भव्य आयोजन में करीब 12 लाख श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का अनुमान है. इस साल खजाना प्रसाद पाने के लिए उमड़ने वाली भीड़ में युवाओं और जेन-जी (Gen-Z) की भी भागीदारी देखने को मिल रही है, जो हमारी प्राचीन संस्कृति के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है.

साल में सिर्फ 5 दिन होते हैं मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन
काशी के इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन साल भर में सिर्फ पांच दिनों के लिए ही खुलते हैं. यही वजह है कि इन दिनों बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में शिव और शक्ति के इस धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है. हजारों वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा का आज भी पूरी श्रद्धा, भव्यता और विधि-विधान के साथ निर्वहन किया जा रहा है.

अन्नकूट पर लगेंगे 56 भोग
धनतेरस से शुरू हुआ यह अनुष्ठान अन्नकूट महापर्व तक जारी रहेगा. इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं. अन्नकूट पर भगवान विश्वेश्वर को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे. मां अन्नपूर्णा को संपूर्ण सृष्टि में अन्न, धन और समृद्धि की देवी माना गया है, इसलिए उनके दरबार का यह 'खजाना प्रसाद' काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का सबसे खास और जीवंत हिस्सा बना हुआ है.

(वाराणसी से जय पाल की रिपोर्ट)

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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