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अब्दुल सत्तार/झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में अधिवक्ता और पुलिस प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है. नवाबाद पुलिस थाने में चार अधिवक्ताओं के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद पुलिस ने घटना से जुड़े तीन सीसीटीवी (CCTV) फुटेज जारी कर दिए हैं. जारी वीडियो फुटेज में कलेक्ट्रेट परिसर और थाना कार्यालय में हुई घटनाओं की परतें खुलती दिख रही हैं.
पुलिस द्वारा जारी किए गए दो सीसीटीवी फुटेज जिलाधिकारी (DM) दफ्तर के बाहर के हैं. इन वीडियो में अधिवक्ताओं की भीड़ दारोगा मोहित कुमार और सिपाही भूपेंद्र के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज व धक्का-मुक्की करती दिखाई दे रही है. इतना ही नहीं, वकील पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीछे से पीटते और उनका मोबाइल फोन छीनते हुए नजर आ रहे हैं.
वहीं, तीसरा फुटेज (44 सेकेंड) कोतवाली प्रभारी अंजन कुमार सिंह के कक्ष का है, जो बुधवार शाम 7:12 बजे का बताया जा रहा है। इसमें कोतवाली प्रभारी अपनी कुर्सी पर बैठे हैं, तभी अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल अंदर आते हैं. कोतवाली प्रभारी के बाहर जाने की बात कहने पर रोमेश बातचीत का हवाला देते हैं. इस पूरे घटनाक्रम में कोतवाली प्रभारी की ओर से किसी भी दुर्व्यवहार की बात साबित नहीं हो रही है.
फुटेज में कोतवाली प्रभारी कहते सुनाई दे रहे हैं कि आप बाहर जाइए. इस पर रोमेश कहते हैं कि उन्हें बात करनी है. तभी कुर्सी पर बैठे विनय कहते हैं कि रोमेश उनके मामले में पैरवी करेंगे. इस पर कोतवाली प्रभारी कहते हैं कि जब उनकी बात न सुनी जाए तब वे जिसकी मदद लेनी हो उसकी मदद लें. इसके बाद रोमेश कमरे से बाहर चले जाते हैं.
मामले की शुरुआत अधिवक्ताओं के उस आरोप से हुई थी, जिसमें कहा गया था कि कोतवाली प्रभारी अंजन सिंह ने वकील रोमेश अग्रवाल के साथ अभद्रता और गाली-गलौज कर उन्हें अपमानित किया. इसके विरोध में शुक्रवार को जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे की अगुवाई में दर्जनों वकील कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने पहुंचे थे. इसी दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ तीखी झड़प और मारपीट हो गई.
कलेक्ट्रेट परिसर में लगे कैमरों में वारदात कैद होने के बाद, जेल चौकी प्रभारी मोहित कुमार की शिकायत पर नवाबाद थाने में चार वकीलों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों से मारपीट करने और मोबाइल फोन लूटने की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.
एसपी सिटी प्रीति सिंह ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में कोतवाली प्रभारी की ओर से दुर्व्यवहार की बात सामने नहीं आई है. कुछ मामलों में अधिवक्ताओं के खिलाफ विवेचनाएं चल रही हैं और दबाव बनाने के लिए यह कृत्य किया गया.