जौनपुर कस्टोडियल डेथ: CBI की चार्जशीट बनी गले की फांस, हाईकोर्ट ने 4 खाकीधारियों को राहत देने से किया इंकार
Allahabad High Court News: जौनपुर के चार पुलिसकर्मियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने चार पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. इन चारों पुलिसकर्मियों पर पुजारी यादव को यातना देने का आरोप है. सीबीआई ने मामले की जांच के बाद चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है,
Allahabad High Court News/ मो. गुफरान: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चर्चित कृष्ण कुमार यादव उर्फ पुजारी यादव कस्टोडियल डेथ मामले में चार आरोपी पुलिसकर्मियों की उम्मीदों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पानी फेर दिया है. खाकी के रसूख और रहम की दलीलों को किनारे रखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. इन पुलिसकर्मियों में जयशील तिवारी, रामकृत यादव, राजकुमार वर्मा और अंगद प्रसाद चौधरी शामिल हैं.
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरोपियों पर गंभीर रूप से यातनाएं देने और एक नागरिक की जान लेने के संगीन आरोप हैं, इसलिए इस मोड़ पर इन्हें कोई राहत नहीं दी जा सकती.
थाने के भीतर बर्बरता, CBI का शिकंजा
यह दर्दनाक मामला साल 2021 का है, जब पुलिस हिरासत के दौरान कृष्ण कुमार यादव उर्फ पुजारी यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. पुलिस प्रशासन ने इसे सामान्य घटना दिखाने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ न्याय की गुहार लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी.
नितंबों, निचले कंधे, बाएं हाथ पर लगी चोट का जिक्र
सीबीआई ने मामले की पड़ताल के बाद कुल 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल किया. सीबीआई की चार्जशीट में दर्ज मेडिकल और फॉरेंसिक सबूतों ने खाकी का खौफनाक चेहरा बेनकाब कर दिया. चार्जशीट के अनुसार, पुजारी यादव को पुलिस हिरासत में अमानवीय यातनाएं दी गईं. मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए, विशेषकर उसके नितंबों, निचले कंधे और बाएं हाथ पर बेरहमी से पिटाई की गई थी, जिसके कारण उसकी जान चली गई.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त संदेश
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट में दर्ज इन खौफनाक तथ्यों और गंभीर चोटों का हवाला दिया. अदालत ने टिप्पणी की कि रक्षक जब भक्षक बन जाए और हिरासत में किसी नागरिक को ऐसी क्रूर यातनाएं दी जाएं, तो ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उन अधिकारियों के लिए कड़ा सबक है जो वर्दी के रोब में कानून की सीमाओं को लांघ जाते हैं. पीड़ित परिवार के लिए यह न्याय की दिशा में एक बड़ी जीत है, जिसने साबित कर दिया कि खाकी के पीछे छिपे गुनहगारों को अदालत में कोई छूट नहीं मिलने वाली.
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