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Hardoi historysheeter Natraj Shukla/ आशीष द्विवेदी: अपराध की दुनिया से निकलकर साधु-संत का चोला ओढ़ने की फिल्मी कहानियां आपने कई बार सुनी होंगी, लेकिन उत्तर प्रदेश की यह असल दास्तान किसी भी पटकथा से कम रोमांचक नहीं है. यह कहानी है हरदोई के प्रदीप शुक्ला उर्फ 'नटराज' की, जिसके काले कारनामों की शुरुआत साल 1987 में हुई थी.
पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए उसने शहर बदले, भेष बदला और आखिरकार झांसी में 'काली सरकार' बनकर ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जहां देश-विदेश के लाखों लोग उसके भक्त बन गए, लेकिन अतीत के साये और कानून के लंबे हाथ आखिरकार उस तक पहुंच ही गए.
हरदोई के 'नटराज' का काला इतिहास
हरदोई के शहर कोतवाली क्षेत्र के चौहान थोक निवासी प्रदीप शुक्ला का आपराधिक सफर साल 1987 में शुरू हुआ था. पुलिस रिकॉर्ड के पन्ने पलटें तो उस पर लूट, हत्या के प्रयास, अपहरण, यौन शोषण के प्रयास, अवैध हथियार रखने, मारपीट और धमकी जैसे 13 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं. 1987 और 1988 के अलावा 1996 और 1997 में भी उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए. उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 34A है. 2002 में धारा 110G जाब्ता फौजदारी के तहत मुकदमा संख्या 68/02 का जिक्र है. इसके बाद पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी.
हरदोई पुलिस की पकड़ से गायब
इसके बाद से ही 'नटराज' हरदोई पुलिस की पकड़ से हमेशा के लिए गायब हो गया और उसने कानून की आंख में धूल झोंकना शुरू कर दिया. साल 2002 के बाद उसके हरदोई छोड़ने की सटीक तारीख और बीच के घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है. 2014 में उसके खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेजा गया. 2018 में मारपीट के मामले में जमानत के बाद फिर वह कभी वापस नहीं लौटा और लापता हो गया. अदालत ने उसके खिलाफ स्थाई वारंट जारी किया था.
झांसी में 'काली सरकार' का अवतार
हरदोई छोड़ने के बाद प्रदीप पहले कानपुर पहुंचा, जहां उसने नगों यानी रत्नों के कारोबार में हाथ आजमाया. इसी दौरान वह साधु-संतों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे उसने अपनी पहचान बदलने की चाल चली. वह बुंदेलखंड के झांसी जिले के मऊरानीपुर के कुरैंचा गांव जा पहुंचा, जहां उसने सत्यानंद शुक्ला उर्फ 'काली सरकार' के नाम से एक नया और चमत्कारी व्यक्तित्व गढ़ लिया.
सोशल मीडिया का जादू
सेना जैसी खाकी-हरी वर्दी, माथे पर बड़ा सा तिलक और तंत्र-मंत्र की आभा उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई. वह बीमारियां ठीक करने, लोगों की परेशानियां दूर करने और पर्ची निकालकर भविष्य बताने का दावा करने लगा. बुधवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को उसके दरबार में भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा. तकनीक के इस दौर में उसने इंस्टाग्राम का सहारा लिया, जहां उसके एक लाख से अधिक फॉलोअर्स बन चुके थे.
एक झटके में खत्म हुआ साम्राज्य
भक्तों की भीड़, इंस्टाग्राम की चमक और 'काली सरकार' के मुखौटे के पीछे बैठा प्रदीप शायद यह भूल चुका था कि कानून की फाइलें कभी दफन नहीं होतीं. अदालत से उसके खिलाफ स्थाई वारंट जारी हो चुके थे. 10 अक्टूबर 2026 को हरदोई शहर कोतवाली और झांसी की मऊरानीपुर पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत कुरैंचा मंदिर में छापा मारा. जैसे ही पुलिस ने दरबार के भीतर प्रवेश किया, ढोंग और आस्था का सारा पर्दाफाश हो गया.
'काली सरकार' के रूप में बैठा शख्स कोई और नहीं बल्कि ढाई दशक से फरार हरदोई का वही पुराना हिस्ट्रीशीटर 'नटराज' निकला. पुलिस ने उसे धर दबोचा और हरदोई ले आई. इस तरह अपराध से शुरू हुई एक शातिर फरारी की कहानी आखिरकार हथकड़ियों के साथ अपने अंजाम तक पहुंच गई.