Gorakhpur News: बांसगांव के पोखरे में मिला पूर्व सभासद का शव, परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से किया इनकार
Gorakhpur News: गोरखपुर के बांसगांव नगर पंचायत में पूर्व सभासद राकेश कसौधान का शव पोखरे में तैरता मिला.परिजनों के पोस्टमार्टम से इनकार के बाद मौत की वजह पर सस्पेंस बना हुआ है.
नागेन्द्र मणि त्रिपाठी/गोरखपुर: जिले के बांसगांव नगर पंचायत में रविवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक पूर्व सभासद का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पोखरे में तैरता हुआ मिला. मृतक की पहचान बांसगांव नगर पंचायत के वार्ड नंबर-4 निवासी 50 वर्षीय राकेश कसौधान के रूप में हुई है. घटना की खबर फैलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई.
पोखरे में तैरता मिला शव, पुलिस ने निकाला बाहर
जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर-12 स्थित पोखरे में सुबह स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति का शव देखा. सूचना मिलते ही बांसगांव चौकी इंचार्ज विकास सिंह भदौरिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को पोखरे से बाहर निकलवाया. जांच के दौरान शव की पहचान नगर पंचायत बांसगांव के पूर्व सभासद राकेश कसौधान (50) के रूप में हुई.
चार भाइयों में अकेले बचे थे, अविवाहित थे राकेश
स्थानीय लोगों के मुताबिक, राकेश कसौधान अविवाहित थे. वह अपने चार भाइयों में अकेले जीवित बचे थे, जबकि उनके तीनों भाइयों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है. पूर्व सभासद का शव मिलने से पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.
परिजन बोले- नहीं कराएंगे पोस्टमार्टम, मौत पर सस्पेंस बरकरार
पुलिस जब शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी कर रही थी, तभी परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया. पूर्व सभासद की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उनका शव पोखरे तक कैसे पहुंचा, इसे लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या वजह सामने नहीं आई है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.फिलहाल उपलब्ध जानकारी में राकेश कसौधान की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है. पोखरे में उनका शव किन परिस्थितियों में पहुंचा, यह भी साफ नहीं है. पुलिस की कार्रवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी.
इस पूरे मामले में पूर्व सभासद की मौत महज़ एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई गहरी साज़िश, यह सवाल अब भी बांसगांव की फिजाओं में तैर रहा है. एक अकेले और निंसतान व्यक्ति का शव पोखरे में मिलना और फिर परिजनों का अचानक पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है. कानून के जानकार मानते हैं कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का सच सामने लाने के लिए पोस्टमार्टम सबसे प्राथमिक और कानूनी जरिया होता है, ऐसे में परिजनों की यह झिझक मामले पर सस्पेंस की परत को और गहरी कर देती है.
क्या यह किसी हादसे का नतीजा था, या फिर इसके पीछे कोई अदृश्य दवाब अथवा अनसुलझा पहलू है? हालांकि परिजनों के रुख के कारण मामला फिलहाल कानूनी कानूनी पेचीदगियों में उलझता दिख रहा है, लेकिन इलाके में जारी तरह-तरह की चर्चाएं इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है. अब देखना यह होगा कि पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है.