हाथ में तिरंगा, पैरों में रफ्तार... 7 साल की अनामिका ने 30 KM दौड़कर बनाया नया रिकॉर्ड
Gonda News: गोंडा के प्राथमिक विद्यालय भीखमपुरवा की कक्षा 2 की 7 वर्षीय छात्रा ने 3 घंटे 40 मिनट में बिना रुके 30 किलोमीटर की मैराथन दौड़ पूरी की. पूरी दौड़ के दौरान अनामिका ने राष्ट्रध्वज तिरंगे को सिर्फ अपने दाहिने हाथ में ही थामे रखा और इसे बाएं हाथ में भी नहीं बदला. जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिए मजिस्ट्रेट, एंबुलेंस और पुलिस बल साथ रखा था.
Gonda News/ अतुल कुमार यादव: कहते हैं कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती और हौसलों में अगर उड़ान हो तो मंजिलें खुद-ब-खुद कदम चूमती हैं. इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है गोंडा जिले के इटियाथोक शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भीखमपुरवा में कक्षा 2 में पढ़ने वाली 7 वर्षीय नन्हीं छात्रा अनामिका मिश्रा ने. अनामिका ने बिना रुके, बिना थके एक हाथ में शान से तिरंगा थामकर 30 किलोमीटर लंबी मैराथन दौड़ पूरी कर इतिहास रच दिया है.
3 घंटे 40 मिनट की अखंड दौड़
शुक्रवार सुबह 6:00 बजे अपने विद्यालय भीखमपुरवा से दौड़ शुरू कर अनामिका लगातार 3 घंटे 40 मिनट तक भागती रही. बिना थके और बिना रुके सुबह 9:40 बजे वह गोंडा के गांधी पार्क पहुंची. इस पूरी यात्रा की सबसे अद्भुत बात यह रही कि अनामिका ने पूरे 30 किलोमीटर के सफर में तिरंगे झंडे को सिर्फ अपने दाहिने हाथ में ही संभाले रखा और उसे बाएं हाथ में तक ट्रांसफर नहीं होने दिया.
गांधी पार्क में टेका माथा
गांधी पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर नतमस्तक होकर उसने अपनी इस ऐतिहासिक मैराथन दौड़ का समापन किया. नन्हीं धाविका की सुरक्षा और देखरेख के लिए जिला प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रेट, एंबुलेंस और पुलिस बल का काफिला साथ-साथ चल रहा था. समापन पर डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला, बीएसए अमित कुमार सिंह और खंड शिक्षा अधिकारी समय प्रकाश पाठक ने अनामिका को माला पहनाकर सम्मानित किया.
ओलंपिक गोल्ड पर नजर
30 किमी की कठिन दौड़ के बाद भी अनामिका के चेहरे पर थकान की जगह एक अद्भुत चमक और आत्मविश्वास था. अनामिका ने कहा कि मैं 4 सालों से इसकी तैयारी कर रही थी. मुझे बड़ी होकर ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है. इसकी प्रेरणा मुझे अपने पिता और दीदी से मिली है.
अनामिका के पिता और स्कूल के प्रिंसिपल मनोज मिश्रा ने बताया कि अनामिका इससे पहले 8 मिनट में 240 पुशअप्स करके 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा चुकी है. पिछले साल उसने 1 घंटे में 10 किमी दौड़ने का रिकॉर्ड भी बनाया था. उसकी बड़ी बहन अंशिका मिश्रा क्षेत्र में 'गूगल गर्ल' के नाम से मशहूर है, जिसके मेडल्स देखकर ही अनामिका ने भी देश के लिए कुछ बड़ा करने की ठानी थी.
डीआईजी ने बढ़ाया हौसला
इस मौके पर डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला ने नन्हीं अनामिका की प्रतिभा की तुलना एशियन गेम्स की एथलीट्स से करते हुए कहा कि हमारी बेटियां आज हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं. इतनी छोटी उम्र में यह उपलब्धि वाकई अभूतपूर्व है और यह बिटिया आने वाले समय में देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन करेगी.
गोंडा के एक छोटे से गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय से निकली अनामिका मिश्रा ने अपनी लगन और मेहनत से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं. अब देखना होगा कि शासन और खेल विभाग इस नन्हीं प्रतिभा को ओलंपिक के मंच तक पहुंचाने के लिए आगे क्या कदम उठाता है.