)
ग्रेटर नोएडा न्यूज/भूपेश प्रताप: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में किसानों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. किसान सभा की महापंचायत में दो हजार से ज्यादा किसान जुटे. वहीं भारतीय किसान यूनियन ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी. रास्तों को बंद करने के लिए करीब 10 बुलडोजर और जेसीबी मशीनें लगाई गईं. इससे आसपास के इलाकों में भी आवाजाही प्रभावित रही.
तीनों प्राधिकरणों पर किसानों का प्रदर्शन
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आज नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण पर मोर्चा खोला. भारतीय किसान यूनियन के जोनल अध्यक्षों ने अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन की अगुवाई की. किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी कई मांगें लंबित हैं, लेकिन प्राधिकरण और प्रशासन की ओर से उन्हें केवल आश्वासन दिया जा रहा है.
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसान सभा ने महापंचायत की. इसकी अगुवाई रूपेश वर्मा, सुखबीर खलीफा और सोरन प्रधान ने की. किसान सभा के लोग 9 सितंबर से प्राधिकरण पर धरना दे रहे हैं. किसान सभा के जिला अध्यक्ष रूपेश वर्मा ने कहा कि धरने के कई दिन बीतने के बावजूद उनकी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं हुई. इसी वजह से महापंचायत बुलाकर सरकार और प्राधिकरण तक अपनी आवाज पहुंचाई गई.
64.7 फीसदी मुआवजा और 10 प्रतिशत प्लॉट की मांग
किसानों की मुख्य मांगों में 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा, आबादी का निस्तारण और 10 प्रतिशत आवासीय प्लॉट शामिल हैं. किसान 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग भी कर रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन के पवन खटाना ने कहा कि किसान लंबे समय से इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है.
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन प्राधिकरण की योजनाओं के लिए ली गई, लेकिन जमीन देने के बाद भी उन्हें वह लाभ नहीं मिला, जिसके लिए वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि हर बार बातचीत में आश्वासन तो मिलता है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस फैसला नहीं होता.
टिकैत बोले- अब किसानों के बीच ही रहेंगे
प्रदर्शन के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहुंचे. उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन अब अधिकारी उनसे मिलने तक को तैयार नहीं हैं. टिकैत ने कहा कि अगर किसानों की आवाज नहीं सुनी गई तो किसान प्राधिकरण के काम को रोकने के लिए मजबूर होंगे.
राकेश टिकैत ने साफ कहा कि 10 प्रतिशत आवासीय प्लॉट और 64.7 फीसदी मुआवजा किसानों को देना होगा. उन्होंने कहा कि अब आंदोलन कुछ समय का नहीं रहेगा. राकेश टिकैत ने ग्रेटर नोएडा में ही डेरा डालने का ऐलान करते हुए कहा कि अब धरना यहीं पर स्थायी रूप से चलेगा और वह किसानों के बीच रहेंगे.
या जेल जाएंगे, या अस्पताल, लेकिन धरना जारी रहेगा
टिकैत ने आंदोलन को लेकर कहा कि किसानों के सामने अब तीन रास्ते हैं. या तो वे जेल जाएंगे, या अस्पताल जाएंगे या फिर लगातार धरना देते रहेंगे. उन्होंने प्रशासन की ओर से रास्ते बंद करने के लिए जेसीबी और बुलडोजर लगाए जाने पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इस बार किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं. टिकैत ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब ट्रैक्टर और जेसीबी के बीच भीषण लड़ाई होगी. उनका कहना था कि किसान अपनी जमीन और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
आश्वासन नहीं, अब समाधान चाहते हैं किसान
भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि तीनों प्राधिकरणों पर प्रदर्शन के बाद किसान आगे की रणनीति तय करेंगे। किसानों ने साफ कर दिया है कि इस बार सिर्फ बातचीत या आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा. उनका कहना है कि जब तक मुआवजा, आबादी और 10 प्रतिशत प्लॉट समेत उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए प्राधिकरण के आसपास बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा व्यवस्था की. रास्तों को बंद करने के लिए बुलडोजर और जेसीबी लगाए गए. इससे साफ है कि किसानों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने की तैयारी में है. वहीं किसानों ने भी लंबी लड़ाई के लिए तंबू लगाने और धरना जारी रखने का ऐलान कर दिया है.