)
Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है. शेष छोटे कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. निर्माण काम में लगीं कंपनियां 30 अक्टूबर तक राम मंदिर परिसर छोड़ देंगी. उसके बाद राम मंदिर परिसर का बाउंड्री बनाने का काम रह जाएगा. इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है. राम मंदिर की भव्यता की खूब तारीफ हो रही है. ऐसे में आइए जानते हैं राम मंदिर निर्माण की इनसाइड स्टोरी?.
प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी नींव
राम मंदिर निर्माण की पूरी कहानी समझने के लिए साल 2020 में जाना होगा. 5 अगस्त 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी थी. नींव पूजन के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से निर्माण के लिए पहली ईंट रखी थी. इसके बाद से मंदिर निर्माण का काम शुरू कर दिया गया. करीब 56 महीने बाद मंदिर बनकर तैयार कर दिया गया.
कितने एरिया में फैला है राम मंदिर?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पहले 70 एकड़ जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई थी. बाद में ट्रस्ट ने 7285 स्क्वायर फीट जमीन और खरीद ली. इसके बाद अब कुल जमीन 107 एकड़ हो गई. इसमें 20 एकड़ कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल किया गया है. 50 एकड़ खुली जगह है. वहीं, लगभग 30 एकड़ ग्रीन बेल्ट के लिए है. मुख्य मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है. तीन मंजिला राम मंदिर 161 फीट ऊंचा, 235 फीट चौड़ा और 360 फीट लंबा है.
निर्माण की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाइए
राम मंदिर को बनाने में खास तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगले एक हजार साल तक आंधी, तूफान, भूकंप और बाढ़ इसे हिला तक नहीं पाएगी. राम मंदिर के निर्माण में देश की दिग्गज कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई. इसमें एलएंडटी के साथ टाटा शामिल हैं. देश की प्रतिष्ठित आईआईटी जैसे संस्थान भी शामिल हुए हैं. मंदिर निर्माण में एक भी लोहे की कील का इस्तेमाल नहीं किया गया. ताकि जंग न लगे.
मंदिर की नींव कितनी मजबूत?
राम मंदिर की नींव 56 लेयर के पत्थरों से बनी है. ताकि हजारों सालों तक मंदिर की मजबूती बनी रहे. मंदिर की नींव को 40 फीट तक गहरा रखा गया है. इसमें 23000 से अधिक पत्थर, मिट्टी, रेत, कंकड़ और सीमेंट का मिश्रण का लेयर बनाया गया है. राम मंदिर का चबूतरा जमीन से 21 फीट ऊंचा बनाया गया है. इसमें ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है ताकि नमी इसे छू तक न पाए. भूकंप के झटके भी इसे हिला न पाएंगे. पत्थरों को जोड़ने के लिए लोहे या कंक्रीट नहीं बल्कि इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
5 हजार कारीगरों ने दिन रात काम किया
राम मंदिर बनाने में करीब 5000 से ज्यादा कारीगर लगातार 56 महीने तक दिन रात काम किए. इसमें राजस्थान के बंसी पहाड़-पुर सैंडस्टोन का इस्तेमाल किया गया. यहां तक कि बंदरों और पक्षियों को दूर रखने के लिए बनी जालियां भी टाइटेनियम की बनी हैं. श्रीराम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर निर्माण के लिए देशभर से चंदा इकट्ठा करने का अभियान चलाया गया था. ट्रस्ट के मुताबिक, चंदा अभियान में करीब 2100 करोड़ रुपये का चंदा इकट्ठा हुआ है.