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UP में PDA की लड़ाई होगी दिलचस्प: चंद्रशेखर ने अखिलेश की बढ़ा दी टेंशन, 2027 के लिए बिछाई बिसात

चंद्रशेखर आजाद ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर 87 प्रभारियों ​की लिस्ट जारी कर दी है. खास बात ये है कि ये सभी प्रभारी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज से आते हैं.

Written By Amitesh Pandey
Published: Oct 27, 2026, 04:14 PM IST | Updated: Oct 27, 2026, 04:22 PM IST
Image Credit: Z Creative (AI Image)
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की जंग अभी दूर है, लेकिन सियासी बिसात बिछने लगी है. सत्ता पक्ष को चुनौती देने के साथ-साथ अब विपक्ष के भीतर भी सियासी मुकाबले के संकेत मिलने लगे हैं. आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं नगीना लोकसभा से सांसद चंद्रशेखर आजाद के निशाने पर खास तौर पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में मिले जनसमर्थन के जरिए चंद्रशेखर ने विपक्ष को अपनी ताकत का एहसास कराया है. चंद्रशेखर आजाद ने 2027 चुनाव को लेकर 87 प्रभारियों की घोषणा कर दी है. इसमें सभी प्रभारी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज से आते हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या 2027 में अखिलेश यादव के पीडीए के सामने चंद्रशेखर आजाद का पीडीए नई चुनौती पेश करेगा?.

2027 के लिए सियासी जमीन तैयार करते चंद्रशेखर  

2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की नगीना सीट से जीत दर्ज करने वाले चंद्रशेखर आजाद अब विधानसभा चुनाव की जंग के लिए अपनी जमीन तैयार करते नजर आ रहे हैं. इस दौरान चंद्रशेखर आजाद के निशाने पर सत्ता के साथ विपक्ष भी है. चंद्रशेखर आजाद ने अपने एक बयान में दावा है कि अगर उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटों तक सीमित रहने के बजाय ज्यादा सीटों पर लड़ती, तो विपक्ष के कई सांसद आज घर में बैठे होते.

लोकसभा की दोनों सीटों का जिक्र  

चंद्रशेखर आजाद ने अपने चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि एक सीट पर उन्होंने एक लाख 51 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर भी 80 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए. यानी चंद्रशेखर आजाद विपक्ष को चेता रहे हैं कि अगर 2027 में उनको नजरअंदाज किया तो उसकी कीमत विपक्ष को चुकानी पड़ सकती है.

आजाद समाज पार्टी को कम समझने विपक्ष की भूल  

चंद्रशेखर आजाद के इस बयान के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. उनका संदेश साफ है कि उन्हें सिर्फ एक सीमित राजनीतिक ताकत समझने की भूल विपक्ष न करें. खासकर समाजवादी पार्टी के लिए यह चुनौती अहम हो सकती है, क्योंकि यूपी में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिशें पहले से ही सियासत के केंद्र में हैं.

विपक्ष में सीट बंटवारा तय करेगा चुनावी नतीजा  

अगर चंद्रशेखर आजाद 2027 में अपने जनाधार का विस्तार करने में कामयाब हुए, तो कई सीटों पर विपक्षी दलों के बीच वोटों का बंटवारा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि इसका वास्तविक असर उम्मीदवारों, स्थानीय समीकरणों और चुनावी गठबंधनों पर निर्भर करेगा.

87 प्रभारियों की लिस्ट जारी  

चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी की ओर से अभी तक यूपी में 87 प्रभारियों की सूची जारी की गई है. इस सूची में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के लोगों को जगह दी गई है. आजाद समाज पार्टी के यही प्रभारी आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी होंगे. हालांकि, अंतिम उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा होने तक इसे संभावित चुनावी तैयारी के रूप में ही देखा जा रहा है.

सपा के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं चंद्रशेखर आजाद  

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के जरिए यूपी की राजनीति में अपनी अलग रणनीति बनाई है. वहीं, चंद्रशेखर आजाद भी इसी सामाजिक आधार को अपने राजनीतिक विस्तार का केंद्र बना रहे हैं. यहीं से मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है. मुद्दा सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि विपक्ष के भीतर नेतृत्व, सामाजिक प्रतिनिधित्व और वोटों पर पकड़ का भी है. अगर चंद्रशेखर आजाद अपना संगठन मजबूत करते हैं और चुनाव में व्यापक स्तर पर उतरते हैं, तो कई सीटों पर समाजवादी पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है.

विपक्ष को सियासी संदेश देने की कोशिश  

कुल मिलाकर यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की लड़ाई में चंद्रशेखर आजाद अपनी पार्टी को एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं. अभी तक जारी 87 प्रभारियों की सूची, 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन का हवाला और विपक्ष को दिया गया सियासी संदेश, ये सभी उनकी चुनावी रणनीति के अहम संकेत हैं. अब देखना होगा कि अखिलेश यादव इस चुनौती को किस तरह लेते हैं और क्या यूपी में पीडीए की राजनीति के भीतर एक नया पीडीए आकार लेता है? या फिर चंद्रशेखर आजाद इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनकर चुनावी मैदान में उतरते हैं.

(प्रयागराज से मोहम्मद गुफरान की रिपोर्ट)

यह भी पढ़ें ; यूपी में जीत के लिए तरसेगी सपा: ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला

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About the Author

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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