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Akash Anand: बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपना अंतिम फैसला बदल दिया है. मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को माफ कर दिया है. तीन दिन पहले ही आकाश आनंद ने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी. अब आकाश आनंद की फिर से बसपा में वापसी हो गई है. मायावती ने पार्टी हित का हवाला देते हुए आकाश आनंद की फिर से वापसी कर दी है. आकाश आनंद को बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाया है. आइए जानते हैं बुआ-भतीजे के रिश्ते में कितने उतार-चढ़ाव आए?. आखिर मायावती को अपना अंतिम फैसला क्यों बदलना पड़ा?....
तीन दिन पहले ही मांगी थी माफी
आकाश आनंद ने 2 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मायावती से माफी मांगी थी. आकाश आनंद ने मायावती को राजनीतिक गुरु और बुआ मां बताते हुए किसी अन्य दल में न जाने की बात कही थी. साथ ही ससुर आशोक सिद्धार्थ के हटाए जाने के फैसले का उचित बताया था. और बसपा सुप्रीमो मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी. अब तीन दिन बाद ही मायावती ने आकाश आनंद को माफ कर दिया.
आकाश आनंद कब आए कब निकाले गए
- 10 दिसंबर 2023 को उत्तराधिकारी बने
मायावती ने आकाश आनंद को बसपा का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाते हुए अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया. यह बसपा की अगली पीढ़ी में आकाश की भूमिका का सबसे बड़ा संकेत था.
- 7 मई 2024 को पहला बड़ा झटका लगा
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आकाश के कुछ बयानों पर विवाद के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर पद और उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटा दिया था. मायावती ने कहा कि उन्हें अभी राजनीतिक परिपक्वता हासिल करनी है.
- 23 जून 2024 को पहली बार वापसी
करीब डेढ़ महीने बाद मायावती ने आकाश को फिर राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया और उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी भी लौटा दी.
- 12 फरवरी 2025 को अशोक सिद्धार्थ को निकाला
आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर दिया गया. मायावती ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए. यही विवाद आगे चलकर आकाश की राजनीतिक स्थिति से भी जुड़ा.
- 2 मार्च 2025 को आकाश फिर बाहर
2 मार्च को मायावती ने आकाश को सभी अहम जिम्मेदारियों से हटाया और अगले दिन उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया. मायावती ने उनके राजनीतिक फैसलों पर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए.
- 13 अप्रैल 2025 को पुन: वापसी
मायावती ने आकाश को फिर पार्टी में जगह दी. इसके बाद उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली. मई 2025 में वह चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर और अगस्त 2025 में नेशनल कन्वीनर बनाए गए.
- अगस्त 2026 को मिशन 2027 के मैदान में
आकाश ने हाथरस से मिशन-2027 की मुहिम शुरू की. युवाओं, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों के जरिए उन्होंने बसपा की अगली चुनावी लड़ाई में युवा चेहरा बनने की कोशिश की.
- 2 अगस्त 2026 को अशोक सिद्धार्थ फिर बाहर
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को दोबारा पार्टी से निष्कासित किया. इसके बाद आकाश की राजनीतिक भूमिका पर भी संकट गहराया.
- 3 सितंबर 2026 को आकाश से जिम्मेदारी छीनी
मायावती ने आकाश को राष्ट्रीय कन्वीनर के पद से हटा दिया. इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं.
- 10 सितंबर 2026 को बसपा से पूरी तरह अलग
अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से संन्यास के ऐलान के कुछ घंटे बाद मायावती ने आकाश को भी पार्टी से “पूरी तरह मुक्त” करने का ऐलान किया. मायावती की आपत्ति में आकाश द्वारा उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट को रिपोस्ट न करना भी शामिल था.
- 2 अक्टूबर 2026 को 22 दिन बाद आकाश की माफी
2 अक्टूबर को 22 दिन बाद आकाश ने पहली बार सार्वजनिक रूप से चुप्पी तोड़ी. मायावती को 'राजनीतिक गुरु', 'प्रेरणा' और 'बुआ मां' बताते हुए माफी मांगी. अशोक सिद्धार्थ पर कार्रवाई को सही बताया और कहा कि वह किसी दूसरे दल में नहीं जा रहे. साथ ही मायावती के नेतृत्व में फिर बसपा की सेवा का मौका मांगा.
- 5 अक्टूबर को बसपा में आकाश की वापसी
मायावती ने 5 अक्टूबर को आकाश आनंद को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बना दिया. साथ ही भविष्य में दोबारा इस तरह की गलती न करने की हिदायत दी.
बार-बार क्यों माफ कर रहीं मायावती
पिछली बार आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करते हुए मायावती ने कहा था कि भविष्य में आकाश आनंद को कभी भी पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा. इतना ही नहीं मायावती ने इसे अपना अंतिम फैसला भी बताया था. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बसपा सुप्रीमो मायावती बार-बार आकाश आनंद को माफ क्यों कर दे रही है?. क्यों उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ रहा है?. संभवता इसके पीछे राजनीतिक जरूरत, उत्तराधिकार और BSP का भविष्य भी हो सकता है.
राजनीतिक जरूरत क्यों?
आकाश आनंद मायावती के सिर्फ भतीजे ही नहीं हैं, बल्कि बसपा के भविष्य का चेहरा भी हैं. दिसंबर 2023 में मायावती ने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था. इसका मतलब यह है कि मायावती के लिए आकाश आनंद की भूमिका सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की अगली पीढ़ी से जुड़ी हो सकती है. इसलिए हर विवाद के बाद मायावती को अपना फैसला बदलना पड़ जाता है.
युवाओं के लिए नया चेहरा चाहिए
पिछले दिनों जेन जी आंदोलन देखे गए. हर दल की नजर युवा वोटरों पर पड़ी है. ऐसे में मायावती भी पीछे नहीं हैं. मायावती युवा वोटर को साधने के लिए युवा चेहरे की जरूरत है. मायावती का सबसे मजबूत राजनीतिक आधार लंबे समय से दलित वोट रहा है. यही वजह है कि मायावती 2027 से पहले बसपा के सामने नए चेहरे के तौर पर आकाश आनंद को देखती हैं. आकाश अपेक्षाकृत युवा चेहरा हैं. युवाओं में उनकी मजबूत पकड़ भी हो सकती है.