)
आजम खान/रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान की रिहाई के साथ ही एक नया सियासी मोड़ आ गया है. तीन दिन तक चली कानूनी प्रक्रिया और जमानती औपचारिकताओं के बाद जैसे ही आजम खान जेल से बाहर निकले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इस घटना के बाद रामपुर से लेकर लखनऊ तक सियासी माहौल गरमा गया है.
सूत्रों के मुताबिक, आजम खान की रिहाई की सभी कानूनी अड़चनें दूर होने के बाद जेल प्रशासन ने उन्हें रिहा किया था। जेल के मुख्य द्वार पर समर्थकों की भीड़ उनके स्वागत के लिए मौजूद थी, तभी पहले से तैनात ED की टीम ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया. अचानक हुई इस कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
इस पूरी कार्रवाई पर आजम खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने कड़ी आपत्ति जताई है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई समझ से परे है।नासिर सुल्तान ने कहा, "जेल से निकलते ही जिस तरीके से उन्हें हिरासत में लिया गया, उसका कोई ठोस आधार नहीं बताया गया। किस मामले में और कहां ले जाया जा रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। अपने करियर में हमने किसी नेता को जेल से छूटते ही इस तरह उठाते हुए नहीं देखा।"
वकील ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया. उन्होंने इसे सत्ताधारी दल की तानाशाही करार देते हुए कहा कि सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर डरी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया, "आखिर आजम खान से किसे खतरा है? 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक है और जिन्हें उनसे राजनीतिक नुकसान का डर है, वही लोग इस तरह की कार्रवाई करा रहे हैं। सरकार किसी भी कीमत पर नहीं चाहती कि आजम खान खुली हवा में रहकर जनता के बीच जाएं।
इस हाई-प्रोफाइल हिरासत के बाद रामपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. जिले भर में पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है. समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है, जबकि इस मामले पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है.