लखनऊ, मयूर शुक्ला: अयोध्या में इस बार दीपोत्सव एक नया इतिहास रचने जा रहा है. 7 नवंबर को रामनगरी अयोध्या में 10वें भव्य दीपोत्सव का आयोजन होगा. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भव्य आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवागमन के पुख्ता इंतजाम किए जाएं.
राम की पैड़ी से अवधपुरी तक अलौकिक छटा
दीपोत्सव पर राम की पैड़ी समेत पूरी अवधपुरी लाखों दीपों की रोशनी से नहा उठेगी. इस बार 2100 स्वदेशी ड्रोनों से आकाशीय शो होगा, जो पूरी रामायण की गाथा को अयोध्या के आसमान में जीवंत करेगा. इसके अलावा दिव्य सरयू आरती, भव्य लेजर शो और पर्यावरण-अनुकूल हरित आतिशबाजी से रामनगरी का कोना-कोना जगमगाएगा. सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं कि दीपोत्सव की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं किए जाएं.
13 राज्यों के करीब 1000 कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
इस महापर्व में भारत की समृद्ध विविधता और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव देखने को मिलेगा. 2147 प्रतिभागियों की ओर से सरयू आरती का आयोजन प्रस्तावित है. राम की पैड़ी पर 200 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी. दीपोत्सव में करीब 35 हजार स्वयंसेवक सहभागी होंगे. 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है. विदेशी राजनयिक भी दीपोत्सव के भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे. देश के 13 राज्यों के करीब 1000 कलाकार लोककला और नृत्य की प्रस्तुतियां देंगे.
क्या होगा आकर्षण का केंद्र?
दिव्य सरयू आरती, लेजर शो और हरित आतिशबाजी मुख्य आकर्षण होंगे. इतना ही नहीं, साकेत महाविद्यालय से भव्य रामायण आधारित शोभायात्रा निकलेगी. रामकथा पार्क में भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक का आयोजन होगा. डिजिटल माध्यमों से पांच करोड़ से अधिक लोगों तक दीपोत्सव पहुंचाने का लक्ष्य है. सीएम योगी का कहना है कि यह दीपोत्सव सनातन चेतना, जनआस्था और वैश्विक गौरव का महापर्व बनेगा.
मंदिरों में होगा वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सभी जिलों में रामायण पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. 26 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ होगा. चित्रकूट के रामघाट का व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण विकास होगा. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को प्राथमिकता देने के सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं.
सीएम योगी ने दिए ये सख्त निर्देश
रामघाट पर दुकानों के व्यवस्थित पुनर्वास और नालों के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया गया है. धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखकर रामघाट के विकास कार्य होंगे. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भविष्य में बाढ़ की आशंका को देखते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.