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सोचिये... कोई बच्चा आज कक्षा 9 में पढ़ रहा है. अगले कुछ साल में वह 10वीं, 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करेगा. इस दौरान उसकी कई मार्कशीट बनेंगी, अलग-अलग प्रमाणपत्र मिलेंगे और पढ़ाई से जुड़े कई रिकॉर्ड तैयार होंगे. अभी इन कागजों को संभालकर रखने की जिम्मेदारी ज्यादातर बच्चों और उनके माता-पिता की होती है. कोई दस्तावेज गुम हो गया या खराब हो गया तो उसे दोबारा हासिल करने में भागदौड़ करनी पड़ सकती है. अब इसी पूरी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में APAAR ID को बढ़ावा दिया जा रहा है. उत्तर प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों की APAAR ID बनवाने पर खास जोर दिया गया है. लेकिन आखिर यह APAAR ID है क्या और एक छात्र के लिए इसका मतलब क्या है? आइए आसान भाषा में समझते हैं...
पहले समझिए, APAAR ID आखिर है क्या
APAAR ID को छात्र की डिजिटल पहचान कह सकते हैं. यह 12 अंकों की एक स्थायी डिजिटल ID है जिसे ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट ID’ की सोच के साथ तैयार किया गया है. सीधी भाषा में कहें तो जैसे किसी व्यक्ति की पहचान के लिए एक यूनिक पहचान होती है, उसी तरह APAAR ID छात्र की पढ़ाई से जुड़ी पहचान को डिजिटल तरीके से व्यवस्थित करने का काम करेगी. इसका मकसद यह है कि छात्र की शैक्षणिक यात्रा का रिकॉर्ड अलग-अलग कागजों और जगहों पर बिखरा न रहे. उसकी पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान के साथ व्यवस्थित किया जा सके. यहां एक बात समझना जरूरी है. APAAR ID सिर्फ एक नया कार्ड या नंबर नहीं है. इसके पीछे पूरी कोशिश छात्र के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल और व्यवस्थित बनाने की है.
‘वन नेशन, वन स्टूडेंट ID’ को ऐसे समझिए
नाम थोड़ा बड़ा है लेकिन बात काफी आसान है. मान लीजिए कोई बच्चा कक्षा 9 में है. आज उसके स्कूल में उसकी पढ़ाई से जुड़ी जानकारी दर्ज है. अगले साल वह कक्षा 10 में जाएगा. फिर 11वीं और 12वीं में पहुंचेगा. हर कक्षा के साथ उसका शैक्षणिक रिकॉर्ड आगे बढ़ेगा. APAAR ID का मकसद इसी पूरी शैक्षणिक यात्रा को एक डिजिटल पहचान से जोड़ने का आधार तैयार करना है. यानी छात्र स्कूल में हो या आगे उच्च शिक्षा की तरफ बढ़े, उसकी पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित रखने की व्यवस्था हो. इसी वजह से इसे ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट ID’ कहा जा रहा है.
आखिर APAAR ID काम कैसे करेगी?
अब सबसे मुख्य प्वाइंट पर आते हैं.. APAAR ID बनने के बाद छात्र की शैक्षणिक पहचान एक 12 अंकों की स्थायी डिजिटल ID से जुड़ जाएगी. इसके जरिए उसकी पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड और क्रेडिट को व्यवस्थित तरीके से रखने में मदद मिलेगी. इसे किसी डिजिटल फाइल की तरह समझ सकते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि यह कोई साधारण फाइल नहीं होगी बल्कि छात्र की शैक्षणिक पहचान से जुड़ी व्यवस्था होगी. जैसे-जैसे छात्र की पढ़ाई आगे बढ़ेगी, उससे जुड़े शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में यह ID मदद करेगी. इसका फायदा खास तौर पर तब समझ में आता है जब कई साल पुराने दस्तावेज की जरूरत पड़ती है.
मार्कशीट और प्रमाणपत्र कहां रहेंगे?
यह हिस्सा छात्रों और माता-पिता के लिए सबसे ज्यादा काम का है. APAAR ID के जरिए मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और दूसरे शैक्षणिक प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर डिजिटल रूप से सुरक्षित रह सकेंगे. अभी घर में अक्सर एक अलग फाइल होती है, जिसमें बच्चे की मार्कशीट और प्रमाणपत्र रखे जाते हैं. साल-दर-साल इस फाइल में कागज बढ़ते जाते हैं. फिर जब कई साल बाद किसी दस्तावेज की जरूरत पड़ती है तो उसे ढूंढना भी एक काम बन जाता है. डिजिटल रिकॉर्ड होने से इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है. मसलन, पुरानी मार्कशीट की जरूरत पड़ गई. घर की अलमारी में रखी फाइल ढूंढने के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड ज्यादा आसानी से काम आ सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि कागजी दस्तावेज की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी. लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा जरूर देगा.
छात्र को सीधे क्या फायदा मिलेगा?
अब आपको बताते हैं कि इससे एक आम छात्र को आखिर क्या-क्या फायदा मिलेगा? सबसे पहला फायदा है रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने का. छात्र की पढ़ाई कई साल चलती है. इस दौरान उसके पास अलग-अलग कक्षाओं की मार्कशीट और कई प्रमाणपत्र होते हैं. APAAR ID की व्यवस्था इन शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल पहचान के साथ व्यवस्थित रखने में मदद करेगी. दूसरा फायदा दस्तावेजों की सुरक्षा से जुड़ा है. जरूरी कागज गुम होने या खराब होने की चिंता कम हो सकती है, क्योंकि संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी. तीसरा फायदा आगे की पढ़ाई के दौरान हो सकता है. छात्र की शैक्षणिक यात्रा का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से व्यवस्थित रहने से भविष्य में जरूरी जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है.
छात्रवृत्ति में भी काम आएगी APAAR ID
APAAR ID का फायदा सिर्फ मार्कशीट तक सीमित नहीं बताया जा रहा है. सही विवरण और आंकड़ों के आधार पर छात्रवृत्ति, कल्याणकारी योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ छात्रों तक पहुंचाने में भी APAAR ID उपयोगी हो सकती है. उदाहरण के तौर पर मान लीजिए.. किसी छात्र को छात्रवृत्ति या किसी शैक्षणिक योजना का लाभ मिलना है. ऐसे में उसके सही शैक्षणिक विवरण का उपलब्ध होना जरूरी होता है. डिजिटल व्यवस्था से छात्र की शैक्षणिक पहचान और उसके रिकॉर्ड को जोड़ने में मदद मिलेगी. इससे सही जानकारी के आधार पर लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है. यानी भविष्य में APAAR ID छात्रों के लिए सिर्फ रिकॉर्ड रखने की चीज नहीं, बल्कि कई शैक्षणिक सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने वाली व्यवस्था भी बन सकती है.
क्या APAAR ID बनवाना जरूरी है?
यह सवाल अभी सबसे ज्यादा पूछा जा सकता है. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने साफ किया है कि अग्रिम पंजीकरण या परीक्षा आवेदन पत्र भरते समय APAAR ID का विवरण देना अनिवार्य नहीं है. यानी अगर किसी छात्र की APAAR ID अभी नहीं बनी है तो सिर्फ इस वजह से उसका परीक्षा फॉर्म या पंजीकरण रोकने की बात नहीं कही गई है. लेकिन परिषद की ओर से छात्रों के हित में इसे बनवाने के लिए लगातार अनुरोध किया गया है. स्कूल प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और अभिभावकों से भी कहा गया है कि वे विद्यार्थियों की APAAR ID बनवाने में सहयोग करें. इसलिए इसे फिलहाल अनिवार्य शर्त से ज्यादा छात्र के डिजिटल शैक्षणिक भविष्य के लिए उपयोगी पहल के तौर पर समझना बेहतर होगा.
अभिभावकों की सहमति क्यों जरूरी है?
APAAR ID को लेकर एक और जरूरी बात है. इसे अभिभावकों की सहमति से बनाया जाएगा. यानी स्कूल अपनी तरफ से बस कोई ID बनाकर छात्र के रिकॉर्ड में नहीं जोड़ देगा. इसके लिए अभिभावकों की सहमति प्रक्रिया का हिस्सा है. माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने भी बताया है कि APAAR ID का निर्माण सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसे अभिभावकों की सहमति से पूरा किया जाता है. इसलिए अगर स्कूल की ओर से अभिभावकों से APAAR ID के लिए सहमति मांगी जाती है तो इसका मकसद छात्र की डिजिटल शैक्षणिक पहचान तैयार करना है.
यूपी में किन छात्रों पर है फोकस?
फिलहाल उत्तर प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को लेकर इस व्यवस्था पर खास जोर दिया जा रहा है. कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों का अग्रिम पंजीकरण चल रहा है. वहीं कक्षा 10 और 12 के विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन पत्र भरे जा रहे हैं. इसी प्रक्रिया के दौरान छात्रों की APAAR ID का विवरण दर्ज करने के लिए स्कूलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. परिषद का जोर इस बात पर है कि विद्यार्थियों का शैक्षणिक विवरण सही, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से दर्ज हो.
स्कूलों की भी बड़ी जिम्मेदारी
APAAR ID को लेकर सिर्फ छात्रों और माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है. स्कूल भी इस व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं. विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों से कहा गया है कि वे छात्रों और अभिभावकों को APAAR ID के बारे में जानकारी दें और इसे बनवाने में सहयोग करें. परिषद ने अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि से पहले शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की APAAR ID प्रविष्ट कराने का प्रयास करने को भी कहा है. यानी कोशिश यह है कि ज्यादा से ज्यादा छात्रों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान तैयार हो और उनके रिकॉर्ड आगे व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रह सकें.
अगर आसान उदाहरण से समझें तो...
मान लीजिए रोहित अभी 9वीं कक्षा में पढ़ता है. उसकी APAAR ID बन गई. आगे वह 10वीं की परीक्षा देता है और उसकी मार्कशीट तैयार होती है. फिर वह 11वीं और 12वीं में जाता है. इस दौरान उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड बढ़ते जाते हैं. APAAR ID इन रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान से जोड़ने का आधार तैयार करती है. अब रोहित को किसी पुराने शैक्षणिक दस्तावेज की जरूरत पड़ती है. उसके मार्कशीट और अन्य प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर डिजिटल रूप से सुरक्षित हैं तो उन्हें हासिल करना आसान हो सकता है. आगे चलकर अगर उसे छात्रवृत्ति या किसी शैक्षणिक सुविधा का लाभ लेना है तो सही शैक्षणिक विवरण उपलब्ध होने से प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है. यही APAAR ID की पूरी कहानी है.
एक नंबर.. काम कई
देखने में APAAR ID सिर्फ 12 अंकों का नंबर है. लेकिन इसके पीछे उद्देश्य काफी बड़ा है. सरकार छात्र की पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल, सुरक्षित और व्यवस्थित व्यवस्था से जोड़ना चाहती है. इसके जरिए स्कूल से लेकर आगे की पढ़ाई तक शैक्षणिक रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने का आधार तैयार होगा. मार्कशीट और प्रमाणपत्रों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने से दस्तावेजों को संभालने की परेशानी कम हो सकती है. वहीं छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही विवरण के आधार पर पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है. सबसे अहम बात यह है कि छात्र की शैक्षणिक पहचान उसकी पढ़ाई के साथ आगे बढ़े. यानी आज कक्षा 9 में बना एक डिजिटल रिकॉर्ड आने वाले वर्षों में उसकी पूरी शैक्षणिक यात्रा को व्यवस्थित रखने में मदद कर सकता है. इसीलिए APAAR ID को सिर्फ एक और सरकारी ID समझना ठीक नहीं होगा. इसका असली मकसद छात्रों की पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को कागजों से निकालकर एक सुरक्षित और व्यवस्थित डिजिटल व्यवस्था में लाना है.