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Ambedkarnagar News: अंबेडकरनगर के लाल और CISF के असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव दौलतपुर एकसारा-मठिया पहुंचा. जम्मू-कश्मीर के कठुआ में CISF कैंप में हुई फायरिंग के दौरान कर्तव्य निभाते हुए अंकित पांडेय वीरगति को प्राप्त हुए थे. तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया. माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं, अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में लोग गांव पहुंचे.
अंतिम दर्शन को उमड़ जनसैलाब
टांडा तहसील क्षेत्र के दौलतपुर एकसारा-मठिया गांव के वीर सपूत असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन को लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. हर तरफ भारत माता की जय और अंकित पांडेय अमर रहें के नारे गूंजते रहे. लोगों ने नम आंखों से देश के वीर जवान को श्रद्धांजलि दी. उनका अंतिम संस्कार सरयू नदी के तट पर किया गया. उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि उनके बहन के पति श्याम सुंदर ने दी. शहीद अंकित की पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है. वहीं, दो वर्षीय पुत्र कभी अपनी मां को पिता के शव को देखता रहा.
सब इंस्पेक्टर से असिस्टेंट कमांडेंट बने
अंकित कुमार पांडेय ने अपने करियर की शुरुआत CISF में सब-इंस्पेक्टर के पद से की थी. कड़ी मेहनत, प्रशिक्षण और निष्ठा के दम पर उन्होंने पदोन्नति हासिल करते हुए असिस्टेंट कमांडेंट का पद प्राप्त किया. कठुआ में ड्यूटी के दौरान उनका सर्वोच्च बलिदान पूरे क्षेत्र के लिए गहरे दुख का विषय है. CISF DIG ने शहीद अंकित पांडेय की शहादत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह पूरे बल और देश के लिए अपूरणीय क्षति है.
असिस्टेंट कमांडेंट बनाने में लगती है काफी मेहनत
उन्होंने कहा कि एक असिस्टेंट कमांडेंट को तैयार करने में विभाग और सरकार के स्तर पर काफी मेहनत लगती है और अधिकारी स्वयं कठिन प्रशिक्षण व परिश्रम के बाद इस मुकाम तक पहुंचता है. उन्होंने शहादत को पूरे बल के लिए बेहद दुखद क्षति बताया.
6 बहनों में इकलौते भाई थे अंकित
अंकित कुमार पांडेय अपने परिवार में 6 बहनों में इकलौते भाई थे. अंकित के पिता शिव प्रसाद पांडेय प्राथमिक विद्यालय से सेवानिवृत्त हुए हैं. अंकित की शहादत की खबर के बाद से ही उनके पैतृक गांव में मातम पसरा था. गुरुवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े. लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और CISF जवानों ने पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी.