App

आरोपी को सरेंडर कराने के लिए भाई को 4 दिन थाने में बिठाया, CCTV-CDR से खुला राज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस पर ठोका जुर्माना

Allahabad High Court News: प्रयागराज के जॉर्जटाउन थाने में एक आरोपी पर दबाव बनाने के लिए पुलिस ने उसके भाई को 23 से 26 जून तक गैरकानूनी तरीके से थाने में बैठाए रखा. थाने के CCTV फुटेज और मोबाइल CDR से 4 दिनों की अवैध हिरासत का सच अदालत में साबित हुआ है. जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे गंभीर अवैध हिरासत मानते हुए यूपी पुलिस पर ₹40,000 का हर्जाना लगाया है.

आरोपी को सरेंडर कराने के लिए भाई को 4 दिन थाने में बिठाया, CCTV-CDR से खुला राज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस पर ठोका जुर्माना

Allahabad High Court News/ मो. गुफरान: खाकी के रसूख और मनमानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है. किसी नामजद आरोपी पर आत्मसमर्पण (Surrender) का दबाव बनाने के लिए उसके बेकसूर परिजन को थाने में अवैध रूप से बैठाकर रखने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने इसे पूरी तरह से गैरकानूनी और मानवाधिकारों का हनन करार देते हुए राज्य सरकार पर ₹40,000 का हर्जाना ठोका है. कोर्ट ने साफ हिदायत दी है कि यह जुर्माना सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जेब से वसूला जाए.

CCTV और CDR से खुला खाकी का झूठ
यह पूरा मामला प्रयागराज के जॉर्जटाउन थाने से जुड़ा हुआ है. याचिका के अनुसार, थाने में सुरेश नाम के व्यक्ति के खिलाफ जानलेवा हमले (Attempt to Murder) समेत कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज थी, जिसमें उसे अग्रिम जमानत भी मिल चुकी थी. याची का आरोप है कि पुलिस उसके भाई पर सरेंडर का दबाव बना रही थी. इसके लिए पुलिस ने 23 जून को उसे जौनपुर से उठाया और जॉर्जटाउन थाने लाकर 26 जून की शाम तक बिना किसी कागजी कार्रवाई के बैठाए रखा.

जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तो पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ गईं. अदालत में जब जॉर्जटाउन थाने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की गई, तो साफ हो गया कि याची को 23 से 26 जून तक यानी पूरे 4 दिनों तक गैरकानूनी तरीके से थाने में कैद रखा गया था.

थाना प्रभारी और विवेचक की सर्विस बुक पर लगेगा 'दाग'
साक्ष्यों के आधार पर अवैध हिरासत की पुष्टि होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ ₹40,000 का जुर्माना लगाया, बल्कि पुलिस महकमे के लिए एक बड़ा नजीर भी पेश की. कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी योगेंद्र कुमार सिंह और मामले के विवेचक अश्वनी सविता के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि दोनों पुलिस अधिकारियों की सेवा पुस्तिका (Service Book) में प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दर्ज की जाए, जिसका असर उनके प्रमोशन और भविष्य के करियर पर पड़ेगा.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला यूपी पुलिस के उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो कानून की आड़ में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं. अदालत ने यह साफ कर दिया है कि पुलिस जांच के नाम पर किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन नहीं कर सकती. अपनी नाकामी छिपाने के लिए बेकसूर परिजनों को 'बंधक' बनाने वाले पुलिसकर्मियों की अब खैर नहीं होगी.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Pooja Singh

Pooja Singh

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More