अशोक सिद्धार्थ ने सियासत को कहा अलविदा: बोले-'बहनजी का आदेश सर्वोपरि' अब आकाश आनंद की वापसी का रास्ता साफ?
Ashok Siddharth Retires From Politics: मायावती की ओर से बुधवार को रखी गई शर्त के अगले ही दिन अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया है. मायावती ने कहा था कि अगर आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा सक्रिय भूमिका चाहिए, तो उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को पूरी तरह राजनीति से संन्यास लेना होगा.
Mayawati vs Ashok Siddharth: बहुजन समाज पार्टी के भीतर चल रहे सबसे बड़े पारिवारिक सियासी घमासान का सबसे बड़ा मोड़! दामाद आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति को अलविदा कह दिया है. बसपा सुप्रीमो मायावती के सख्त फरमान के बाद अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर संन्यास का ऐलान करते हुए कहा कि उनके लिए बहनजी का आदेश सबसे ऊपर है और वे बीएसपी के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं. 35 सालों तक पार्टी की सेवा करने वाले अशोक सिद्धार्थ के इस फैसले के बाद अब क्या आकाश आनंद की बसपा में मुख्यधारा में वापसी होगी? आइए पढ़िए बसपा के इस बड़े घटनाक्रम पर रिपोर्ट...
क्या लिखा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर...
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने लिखा कि वे राजनीतिक और सामाजिक जीवन से पूरी तरह अलग हो रहे हैं। उन्होंने मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और बड़ी बहन बताते हुए कहा कि उनका आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है। सूत्रों के अनुसार, आकाश आनंद का सियासी करियर बचाने के लिए मायावती ने उनके ससुर के पूरी तरह राजनीति छोड़ने की शर्त रखी थी, जिसे अशोक सिद्धार्थ ने स्वीकार कर लिया।
राजनीति व सामाजिक जीवन से संन्यास
पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने एक्स (X) पर पोस्ट कर राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का औपचारिक ऐलान कर दिया.
दामाद आकाश आनंद का करियर बचाया
सियासी हलकों में चर्चा है कि मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में पुनर्बहाली के लिए अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से दूर रहने की शर्त रखी थी, जिसे पूरा कर दिया गया है.
बहनजी के आदेश को बताया सर्वोपरि
अशोक सिद्धार्थ ने लिखा कि मायावती जी का आदेश उनके लिए परिवार और सभी रिश्तों-नातों से बहुत बड़ा है. उन्होंने कहा-"मेरा जीवन बहनजी का ऋणी है, संन्यास तो बहुत छोटी चीज है"
35 साल के समर्पण का जिक्र
उन्होंने कांशीराम और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के मिशन का जिक्र करते हुए बुद्ध और मान्यवर कांशीराम की कसम खाई कि उन्होंने कभी पार्टी के खिलाफ काम नहीं किया.
एमएलसी और राज्यसभा का सफर
उन्होंने माना कि एक साधारण कार्यकर्ता होने के बावजूद मायावती ने ही उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा का सदस्य बनाया और अपने परिवार का हिस्सा माना.
अब नजर आकाश आनंद पर...
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद सबसे बड़ा सवाल आकाश आनंद की वापसी और उन्हें बसपा में फिर से जिम्मेदारी मिलने का है. मायावती पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि सिद्धार्थ के पूरी तरह राजनीति से हटने के बाद आकाश को पार्टी में सक्रिय भूमिका देने पर विचार किया जा सकता है. ऐसे में यह घटनाक्रम 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की अंदरूनी राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है.