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आस्था ने सोशल मीडिया पर अपनी डेली रूटीन का एक वीडियो शेयर किया. इसमें सुबह तैयार होने से लेकर बैंक पहुंचने और दिनभर काम करने तक की झलक दिखाई गई. इसी वीडियो में उन्होंने अपनी नौकरी से जुड़ी कमाई की जानकारी भी शेयर की.
आस्था के मुताबिक, उनकी मासिक सकल सैलरी करीब 94 हजार रुपये है. यानी एक साल में उनकी सकल सैलरी करीब 11.28 लाख रुपये बैठती है. इसके अलावा नौकरी के दौरान मिलने वाले अलग-अलग भत्तों को जोड़ने पर उनकी सालाना कमाई करीब 12 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. खास बात यह है कि आस्था की उम्र अभी सिर्फ 27 साल है और वह करीब ढाई साल से बैंक में नौकरी कर रही हैं.
सरकारी बैंक की नौकरी में सिर्फ महीने की सैलरी ही नहीं मिलती, बल्कि कई तरह के भत्ते भी दिए जाते हैं. आस्था ने बताया कि उन्हें पेट्रोल, अखबार, टेलीफोन और इलाज से जुड़े खर्चों के लिए भी भत्ते मिलते हैं. हालांकि, इन भत्तों की रकम हर कर्मचारी के लिए एक जैसी नहीं होती. यह बैंक, पद, स्थान और नौकरी से जुड़े नियमों के हिसाब से अलग हो सकती है. इसलिए आस्था की बताई रकम को सभी सरकारी बैंक कर्मचारियों की तय सैलरी नहीं माना जा सकता.
आस्था ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि हर महीने करीब 14 हजार रुपये राष्ट्रीय पेंशन योजना यानी NPS में जमा होते हैं. यह रकम सीधे उनके हाथ में आने वाली सैलरी का हिस्सा नहीं है, लेकिन उनकी नौकरी से मिलने वाले कुल लाभ में इसे शामिल किया जा सकता है. यही वजह है कि किसी भी सरकारी नौकरी की कमाई समझते समय सिर्फ खाते में आने वाली रकम देखना पर्याप्त नहीं होता. सकल सैलरी, हाथ में मिलने वाली सैलरी, पेंशन में जाने वाली रकम और अलग-अलग भत्तों का हिसाब अलग होता है.
आस्था की करीब 94 हजार रुपये मासिक सैलरी की तुलना अगर केंद्र सरकार के शुरुआती स्तर के गजेटेड ऑफिसर से करें तो मामला और दिलचस्प हो जाता है. केंद्र सरकार में सातवें वेतन आयोग के वेतनमान के स्तर-10 पर शुरुआती मूल वेतन 56,100 रुपये है. इसके ऊपर महंगाई भत्ता और दूसरे लागू भत्ते मिलते हैं. जनवरी 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत किया गया था. 56,100 रुपये के मूल वेतन पर 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता करीब 33,660 रुपये बैठता है. मतलब मूल वेतन और महंगाई भत्ते को जोड़ने पर रकम करीब 89,760 रुपये हो जाती है. इसके बाद आवास भत्ता और यात्रा भत्ता जैसे दूसरे भत्ते जुड़ सकते हैं.
गजेटेड ऑफिसर की कुल सैलरी उसकी तैनाती वाली जगह और मिलने वाले भत्तों पर निर्भर करती है. अगर आवास और यात्रा समेत दूसरे लागू भत्ते जोड़ दिए जाएं तो शुरुआती स्तर के अधिकारी की कुल मासिक सैलरी एक लाख रुपये के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि 27 साल की आस्था की बताई गई करीब 94 हजार रुपये की मासिक सैलरी केंद्र सरकार के शुरुआती स्तर के किसी गजेटेड ऑफिसर की कुल मासिक सैलरी से बहुत ज्यादा पीछे नहीं है. हालांकि, दोनों की सैलरी का ढांचा एक जैसा नहीं है. सरकारी बैंक और केंद्र सरकार की नौकरियों में वेतन और भत्ते अलग-अलग नियमों के तहत तय होते हैं.
सरकारी बैंक की नौकरी को लेकर युवाओं में काफी आकर्षण रहता है. इसकी बड़ी वजह नौकरी की स्थिरता के साथ मिलने वाली अच्छी सैलरी और दूसरी सुविधाएं हैं. आस्था का वीडियो इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है. आमतौर पर लोग सरकारी बैंक की नौकरी को लेकर परीक्षा, काम और नौकरी की सुरक्षा के बारे में तो जानते हैं, लेकिन नौकरी मिलने के बाद कुल कमाई कितनी होती है, इसकी पूरी जानकारी कम ही सामने आती है. आस्था ने अपने वीडियो के जरिए इसी तस्वीर को सामने रखा है. उन्होंने यह भी दिखाया कि ग्रामीण इलाके की एक बैंक शाखा में काम करते हुए उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कैसी रहती है.
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. आस्था ने करीब 94 हजार रुपये को सकल मासिक सैलरी बताया है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर महीने पूरे 94 हजार रुपये उनके बैंक खाते में पहुंचते हैं. कुल सैलरी में अलग-अलग मद शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा NPS, टैक्स और दूसरी कटौतियां होने के बाद हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है. इसलिए सोशल मीडिया पर बताई गई सकल सैलरी को सीधे घर ले जाने वाली सैलरी समझना सही नहीं होगा.
आस्था की उम्र 27 साल है और वह करीब ढाई साल से बैंक में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया खाते पर बैंक की नौकरी से जुड़े कई वीडियो भी शेयर किए हैं. उनके छह हजार से ज्यादा अनुयायी हैं. उनके वीडियो में नौकरी की चमक-दमक से ज्यादा रोजमर्रा की जिंदगी दिखाई देती है. ग्रामीण शाखा में पोस्टिंग, बैंक का काम और नौकरी के साथ मिलने वाली सुविधाओं ने युवाओं की दिलचस्पी बढ़ाई है.
अगर केवल मासिक सैलरी की बात करें तो आस्था की करीब 94 हजार रुपये की कमाई शुरुआती स्तर के गजेटेड ऑफिसर की सैलरी के काफी करीब दिखाई देती है. अधिकारी के मामले में मूल वेतन 56,100 रुपये से शुरू होता है और महंगाई भत्ता व दूसरे भत्ते जुड़ने के बाद कुल रकम बढ़ जाती है. लेकिन नौकरी चुनने के मामले में सिर्फ सैलरी देखकर फैसला करना ठीक नहीं होगा. दोनों क्षेत्रों में काम की जिम्मेदारी, पदोन्नति, तैनाती, भत्ते, पेंशन और नौकरी का ढांचा अलग है. आस्था की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह दिखाती है कि 27 साल की उम्र में सरकारी बैंक की नौकरी करने वाला व्यक्ति अच्छी सालाना कमाई कर सकता है.