दुनिया की सबसे गहरी गुफा ने निगली हैं कई जानें, क्यों कहलाता है एवरेस्ट ऑफ द डीप? ब्रिटेन का सबसे ऊंचा पहाड़ भी पड़ जाए छोटा
दुनिया की सबसे गहरी गुफा वेरियोवकिना 2,212 मीटर गहरी है. जॉर्जिया की इस खौफनाक गुफा में फंसी एक्सप्लोरर्स की टीम और इसके अनोखे जीवों की पूरी कहानी पढ़ें.
Veryovkina Cave Deepest Cave In The World: धरती के ऊपर सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी पृथ्वी के पेट में एक ऐसा 'पाताल लोक' भी मौजूद है जो 2,000 मीटर से भी ज्यादा गहरा है. जॉर्जिया के अबखाजिया क्षेत्र में स्थित 'वेरियोवकिना' गुफा को दुनिया की सबसे गहरी गुफा माना जाता है. इसे "एवरेस्ट ऑफ द डीप" भी कहा जाता है. यह गुफा इतनी ज्यादा विशाल और गहरी है कि ब्रिटेन का सबसे ऊंचा पहाड़ 'बेन नेविस' भी इसके अंदर पूरी तरह समा सकता है और फिर भी जगह बच जाएगी.
वेरियोवकिना गुफा की गहराई 2,212 मीटर (लगभग 2.2 किलोमीटर) है. इतनी गहराई में तापमान हमेशा 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है. यहां पूरी तरह से घुप अंधेरा और जमा देने वाली ठंड होती है. हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस खौफनाक अंधेरे में भी जीवन पनपता है. गुफा के सबसे निचले हिस्सों में पाए जाने वाले जीवों के पास आंखें और शरीर में कोई रंग नहीं होता. वे अपने शरीर पर मौजूद लंबे एंटीना और छोटे बालों की मदद से दीवारों में होने वाली थराहट को महसूस करते हैं और रास्ते तलाशते हैं.
पाताल लोक में कौन रहता है?
मिरर की खबर के मुताबिक, इस गुफा की खोज सबसे पहले साल 1968 में हुई थी और तब इसे 'S-115' नाम दिया गया था. साल 1986 में इसका नाम बदलकर 'अलेक्जेंडर वेरियोवकिन' के नाम पर रख दिया गया. अलेक्जेंडर एक जांबाज केव डाइवर थे, जिनकी पास की ही एक गुफा 'सु-अकान' में पानी से भरे संकरे रास्ते की खोज करते वक्त दर्दनाक मौत हो गई थी.
जब गुफा में आया भयंकर सैलाब
साल 2018 में इस गुफा के अंदर एक बेहद भयानक हादसा हुआ था. नेशनल जियोग्राफिक के फोटोग्राफर रॉबी शोने और उनके सहायक जेफ वेड रूसी खोजकर्ताओं की एक टीम के साथ गुफा के सबसे निचले हिस्से में कैंप लगाकर रुके हुए थे. एक सुबह जब टीम नाश्ता कर रही थी, तभी अचानक पूरी गुफा किसी भूकंप की तरह हिलने लगी. गुफा के एक छेद से अचानक दूधिया सफेद रंग का पानी का बहुत बड़ा सैलाब बहकर आने लगा और देखते ही देखते पूरी गुफा पानी से भरने लगी.
मौत के मुंह से बाहर निकले गोताखोर
रॉबी शोने ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि चारों तरफ सिर्फ पानी भरा हुआ था. वे लोग संकरे रास्तों से ऊपर की ओर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे. रॉबी ने बताया कि उन्हें सिर्फ अपने सामने वाली सफेद रस्सी दिख रही थी और वे मन ही मन खुद से कह रहे थे कि रुकना नहीं है, बस ऊपर चढ़ते जाना है. पूरी टीम ने अपनी शारीरिक और मानसिक ताकत के दम पर उस काल समान स्थिति का सामना किया और चमत्कारिक रूप से सभी की जान बच गई.
'एवरेस्ट ऑफ द डीप' का इतिहास
1960 के दशक में पहली खोज: इस इलाके की गहरी चूना पत्थर वाली गुफाओं की खोज 1960 के दशक में सोवियत संघ के खोजकर्ताओं ने शुरू की थी. वेरियोवकिना गुफा की खोज पहली बार 1968 में हुई थी और शुरुआत में इसे 'S-115' कोड नाम दिया गया था.
दुखद हादसा और नाम बदलना: 1983 में पास की एक गुफा 'सु-अकान' में पानी से भरे संकरे रास्ते की खोज करते समय अलेक्जेंडर वेरियोवकिन नाम के एक साहसी केव-डाइवर की मौत हो गई. उनके सम्मान में 1986 में इस गुफा (S-115) का नाम बदलकर 'वेरियोवकिना केव' रख दिया गया.
क्रुबेरा गुफा का इतिहास: इसी क्षेत्र की दूसरी सबसे गहरी गुफा 'क्रुबेरा' की खोज 1960 में हुई थी, जिसे प्रसिद्ध रूसी भूगोलवेत्ता अलेक्जेंडर क्रुबेर के नाम पर नाम दिया गया. इसे 'वोरोन्या गुफा' भी कहा जाता है.
गहराई के रिकॉर्ड की होड़: कई दशकों तक यह माना जाता था कि पृथ्वी पर 2,000 मीटर से ज्यादा गहरी कोई गुफा नहीं हो सकती. लेकिन 2000 के दशक में खोजकर्ताओं ने तकनीक की मदद से गहराई में उतरना शुरू किया.
2001 में इतिहास रचा गया: क्रुबेरा गुफा दुनिया की पहली ऐसी गुफा बनी जिसकी गहराई 1,710 मीटर मापी गई और बाद में यह 2,000 मीटर का आंकड़ा पार करने वाली पहली गुफा बनी.
ताजा रिकॉर्ड: हाल के वर्षों में वेरियोवकिना गुफा ने क्रुबेरा को पीछे छोड़ दिया. वेरियोवकिना की आधिकारिक गहराई 2,212 मीटर (लगभग 2.2 किलोमीटर) मापी गई है, जबकि क्रुबेरा 2,199 मीटर गहरी है.