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1985 का साल था, जब अमेरिका के एरिजोना म्यूजियम ऑफ आर्ट में आम दिनों की तरह ही लोग आ-जा रहे थे. हर रोज की तरह इस दिन भी म्यूजियम में काफी हलचल थी. तभी वहां एक पुरुष और एक महिला पहुंचे. दोनों को देखकर किसी को शक नहीं हुआ कि वे किसी बड़ी चोरी की तैयारी से आए हैं.
महिला ने म्यूजियम के स्टाफ को बातचीत में उलझा लिया. इसी बीच उसके साथ आया आदमी चुपचाप उस पेंटिंग के पास पहुंच गया, जिस पर उसकी नजर थी. उसने बिना ज्यादा समय गंवाए पेंटिंग को उसके फ्रेम से काटा, उसे रोल किया और लेकर बाहर निकल गया. जब तक स्टाफ को चोरी का पता चलता, दोनों वहां से जा चुके थे. म्यूजियम से गायब हुई यह कोई आम पेंटिंग नहीं थी. इसकी तलाश में आगे चलकर FBI को भी जुटना पड़ा था.
चोरी हुई पेंटिंग का नाम 'Woman-Ochre' था. इसे मशहूर अमेरिकी-डच कलाकार विलेम डी कूनिंग ने तैयार किया था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद डी कूनिंग अमेरिका के चर्चित कलाकारों में शामिल हो गए थे. उनकी बनाई पेंटिंग की बाजार में काफी मांग थी. यही वजह थी कि यह पेंटिंग चोरों के निशाने पर आ गई. इस पेंटिंग को उन्होंने साल 1958 में म्यूजियम को दान किया गया था. वहां आने वाले लोग इसे देखने के लिए रुकते थे. लेकिन 1985 में अचानक यह म्यूजियम की दीवार से गायब हो गई.
चोरी के बाद जांच शुरू हुई तो FBI ने भी मामले को गंभीरता से लिया. जांच कर रही टीम के पास दो संदिग्धों के स्केच और एक लाल-भूरी रंग की कार से जुड़ी जानकारी थी. लेकिन इन सुरागों के सहारे चोरों तक पहुंचना आसान नहीं था. दिन बीतते गए और फिर साल गुजरते चले गए. पेंटिंग कहां रखी गई, किसके पास पहुंची और क्या उसे बेचा गया, इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं था. म्यूजियम के लिए यह सिर्फ एक पेंटिंग का गायब होना नहीं था, बल्कि उसकी यादों और इतिहास से जुड़ी एक बड़ी समस्या थी.
करीब 32 साल बाद, साल 2017 में इस कहानी में अचानक नया मोड़ आया. न्यू मैक्सिको के एक गांव में डेविड वैन ऑकर, बक बर्न्स और रिक जॉनसन, जो पूराने समान खरीदते थे. उन्होंने एक एस्टेट खरीदा था. वहा फर्नीचर और एंटीक सामान की एक दुकान भी थी. इसी प्रॉपर्टी के एक बेडरूम में उन्हें एक पेंटिंग दिखाई दी. वह दरवाजे के पीछे टंगी हुई थी. शुरुआत में शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि उनके सामने रखी यह पेंटिंग कितनी खास है. जब वे पेंटिंग को दुकान पर लेकर आए तो कुछ ग्राहकों ने उसे देखकर सवाल पूछने शुरू कर दिए. लोगों को शक था कि यह मशहूर कलाकार विलेम डी कूनिंग की बनाई हुई पेंटिंग हो सकती है.
इस पेंटिंग की असली पहचान सामने आने में एक पुरानी खबर ने अहम भूमिका निभाई. चोरी के 30 साल पूरे होने पर साल 2015 में इस मामले को लेकर एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी. उसमें चोरी हुई 'Woman-Ochre' की तस्वीर भी छपी थी. दुकान में मिली पेंटिंग को देखकर लोगों ने उसकी तुलना उस खबर में छपी तस्वीर से की. इसके बाद म्यूजियम से संपर्क किया गया. वहां के कर्मचारियों को जब इसकी जानकारी मिली तो वे खुद पेंटिंग देखने के लिए पहुंच गए. करीब तीन घंटे का सफर तय करके म्यूजियम की टीम दुकान तक आई. जांच के बाद साफ हो गया कि यह वही पेंटिंग थी, जो 1985 में चोरी हुई थी. आखिरकार दशकों से गायब पेंटिंग अपने असली ठिकाने तक लौट आई.
लंबे समय तक अलग-अलग जगह रहने और ठीक से देखभाल न होने के कारण पेंटिंग की हालत खराब हो चुकी थी. उसे कई जगह नुकसान पहुंचा था. ऐसे में उसे तुरंत लोगों के देखने के लिए लगाना संभव नहीं था. साल 2019 में इसे लॉस एंजिलिस के एक म्यूजियम में रिस्टोर करने के लिए भेजा गया. वहां एक्सपर्ट्स ने इसकी मरम्मत और देखभाल पर काम किया. इसके बाद साल 2022 में इसे प्रदर्शनी के लिए रखा गया.
Woman-Ochre की कहानी में सबसे हैरान करने वाली बात यही है कि जिस पेंटिंग को FBI तक नहीं खोज पाई, वह आखिरकार एक छोटे से गांव के घर में मिल गई. न कोई बड़ी छापेमारी हुई और न ही किसी फिल्मी पीछा करने वाले सीन के बाद चोर पकड़े गए. एक पुरानी खबर, कुछ ग्राहकों की पहचान और म्यूजियम तक पहुंची सूचना ने दशकों पुराने मामले को नया रास्ता दिखा दिया. आज यह पेंटिंग सिर्फ विलेम डी कूनिंग की कला के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी रहस्यमयी चोरी और वापसी की कहानी के लिए भी याद की जाती है.