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घर में रहने वाले कुत्ते और बिल्लियां कई परिवारों के लिए सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों जैसी होती हैं. ऐसे में अगर कोई अचानक गायब हो जाए तो घर के लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. वे उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, पोस्टर लगाते हैं और उसे ढूंढने के लिए लोगों से मदद मांगते हैं.
ठग अब इसी इमोशनल लगाव को अपना हथियार बना रहे हैं. ब्रिटेन में सामने आए मामलों के अनुसार, साइबर अपराधी लापता जानवरों की सोशल मीडिया पोस्ट से तस्वीरें उठाते हैं. फिर जनरेटिव AI की मदद से ऐसी नकली तस्वीरें तैयार करते हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में किसी को शक नहीं होता. इसके बाद वे जानवर के मालिक से संपर्क करते हैं और दावा करते हैं कि उन्हें उसका पालतू मिल गया है. शुरुआत में बातचीत भी इस तरह करते हैं कि सामने वाले को उन पर भरोसा हो जाए.
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, ठग कई बार खुद को जानवरों के अस्पताल का कर्मचारी या पुलिस अधिकारी बताकर बात करते हैं. वे मालिक से पालतू जानवर के बारे में कुछ सवाल पूछते हैं और फिर उसकी नकली तस्वीर भेज देते हैं. जब मालिक को लगता है कि उसका जानवर सचमुच मिल गया है तो ठग कहानी में नया मोड़ लाते हैं. वे कहते हैं कि जानवर किसी परेशानी में है या उसे तुरंत इलाज की जरूरत है. इसके बाद पैसे भेजने का दबाव बनाया जाता है. अगर मालिक पैसे देने से मना कर दे तो ठग जानवर को मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी तक देने लगते हैं. वहीं, पैसे देने के लिए तैयार होने पर मिलने का समय और जगह तय कर देते हैं. लेकिन जब मालिक वहां पहुंचता है तो ठग गायब हो जाते हैं.
इस तरह की ठगी में एक और बात परेशान करने वाली है. ठग आम बैंक ट्रांसफर के बजाय गिफ्ट कार्ड या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे मांगते हैं. इसकी वजह यह है कि ऐसे पेमेंट का पता लगाना और पैसे वापस हासिल करना मुश्किल हो सकता है. कई बार वे पेमेंट ऐप के जरिए भी पैसे भेजने को कहते हैं. उनका मकसद यही होता है कि परेशान परिवार जल्दबाजी में बिना ज्यादा सवाल किए रकम ट्रांसफर कर दे.
ब्रिटेन की कैम चौहान भी ऐसे ही एक स्कैम का शिकार होते-होते बचीं. उनकी बिल्ली क्रीड पिछले साल जुलाई में लापता हो गई थी. वह काफी समय से उसे ढूंढ रही थीं. इसी दौरान उन्हें एक व्यक्ति की तरफ से बिल्ली की तस्वीर भेजी गई और दावा किया गया कि वह मिल गई है. तस्वीर देखकर कैम को लगा कि आखिरकार उनकी बिल्ली वापस मिल सकती है. उन्होंने BBC को बताया कि फोटो देखते ही वह रोने लगीं. उन्होंने गैराज से बिल्ली को ले जाने वाला बैग उठाया और अपनी बेटियों से कहा कि चलो, अपनी बिल्ली को वापस लेने चलते हैं. लेकिन उनकी बेटियों को तस्वीर देखकर कुछ शक हुआ. उन्हें लगा कि फोटो असली नहीं है और उसके साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है.
परिवार को शक होने के बावजूद कैम उस जगह पहुंचीं, जहां कथित तौर पर बिल्ली मिलने की बात कही गई थी. उन्हें उम्मीद थी कि वहां उनकी बिल्ली मिल जाएगी. लेकिन ठग ने उनसे मिलने के बजाय गिफ्ट कार्ड के जरिए पैसे देने की मांग शुरू कर दी. इसके बाद परिवार को समझ आ गया कि उनके साथ धोखाधड़ी की कोशिश हो रही है. वे बिना बिल्ली के घर लौट आए. कैम ने बताया कि यह अनुभव उनके लिए बेहद दुखद था. वह अब भी अपनी बिल्ली का इंतजार कर रही हैं. बाद में उन्होंने इस मामले की शिकायत लंदन पुलिस की रिपोर्ट फ्रॉड सर्विस में भी दर्ज कराई.
अमेरिका की फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने जून में एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए पालतू जानवरों से जुड़े ऑनलाइन स्कैम को लेकर लोगों को सावधान किया था. एजेंसी ने बताया कि ठग नकली फोटो, वीडियो और AI से तैयार की गई तस्वीरों का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा दे सकते हैं. अगर कोई अनजान व्यक्ति अचानक आपके लापता पालतू जानवर के मिलने का दावा करता है और बदले में पैसे मांगता है तो तुरंत भरोसा न करें. सबसे पहले उससे जानवर की ऐसी जानकारी मांगें, जो केवल उसे ढूंढने वाले असली व्यक्ति को ही पता हो सकती है. तस्वीर को ध्यान से देखें. जरूरत पड़ने पर रिवर्स इमेज सर्च की मदद लें. इससे पता चल सकता है कि फोटो पहले किसी दूसरी वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट पर इस्तेमाल हुई है या नहीं. हालांकि,सिर्फ रिवर्स सर्च से AI तस्वीर की असलियत हमेशा साबित नहीं होती.
ठग कई बार खुद को पुलिसकर्मी, पशु अस्पताल का कर्मचारी या जानवरों की मदद करने वाली किसी संस्था का सदस्य बताते हैं. वे कहते हैं कि आपके पालतू जानवर को चोट लगी है और इलाज के लिए तुरंत पैसे भेजने होंगे. ऐसी स्थिति में संबंधित पुलिस स्टेशन या अस्पताल का नंबर खुद इंटरनेट से खोजकर संपर्क करें. फोन करने वाले व्यक्ति के दिए नंबर पर ही भरोसा न करें. किसी भी तरह की इमरजेंसी फीस देने से पहले यह जरूर पता करें कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में उसी संस्था से जुड़ा है या नहीं. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर जानवरों को गोद देने या उनके इलाज के नाम पर पैसे मांगने वाली वेबसाइटों की भी जांच करनी चाहिए. संस्था का नाम, पता और पुराने रिकॉर्ड देखने के बाद ही कोई पेमेंट करें.
FTC ने यह भी चेतावनी दी है कि ठग कई बार लोगों को यह कहकर फंसाते हैं कि उन्हें जानवरों की मदद के लिए पहले किए गए डोनेशन के बदले कोई इनाम मिला है. इसके बाद इनाम हासिल करने के लिए फीस मांगी जाती है. याद रखें, कोई असली इनाम पाने के लिए पहले पैसे देने की शर्त रखे तो सावधान हो जाएं. खासकर तब, जब पेमेंट गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी या किसी अनजान पेमेंट लिंक के जरिए मांगा जा रहा हो.
लापता पालतू जानवर को ढूंढना पहले ही परिवार के लिए भावनात्मक रूप से मुश्किल होता है. ऐसे में उसकी नकली तस्वीर दिखाकर पैसे मांगना लोगों की परेशानी को और बढ़ा देता है. इसलिए अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके पालतू जानवर के मिलने का दावा करे तो खुशी में तुरंत पैसे न भेजें. पहले उसकी पहचान और जानवर के सुरक्षित होने की पुष्टि करें. थोड़ी सावधानी आपको आर्थिक नुकसान से बचा सकती है और ठगों की चाल नाकाम कर सकती है.