जब भी किसी फिल्म में दूसरी दुनिया का नजारा दिखाया जाता है, तो वहां अजीब तरह के पेड़, अनजान पौधे और अनोखे जीव नजर आते हैं. लेकिन सोकोत्रा में ऐसा नजारा देखने के लिए किसी फिल्म या कल्पना की जरूरत नहीं है. यहां पहुंचने पर कई जगहों पर पेड़-पौधों की बनावट ही ऐसी दिखाई देती है, मानो किसी दूसरी दुनिया में आ गए हों.
हिंद महासागर में स्थित यह द्वीप यमन का हिस्सा है. अपनी अनोखी प्राकृतिक बनावट के कारण इसे दुनिया के सबसे अलग-थलग और दिलचस्प द्वीपों में गिना जाता है. यहां की खूबसूरती के साथ-साथ इसकी वनस्पतियां भी लोगों को हैरान करती हैं. यहां के ड्रैगन ब्लड ट्री से निकलने वाला लाल रेजिन प्राचीन काल से औषधियों और रंगों में इस्तेमाल होता रहा है.
सोकोत्रा की पहचान यहां पाए जाने वाले ड्रैगन ब्लड ट्री से होती है. इन पेड़ों की शाखाएं ऊपर की तरफ फैलती हैं और मिलकर एक बड़े उल्टे छाते जैसा आकार बना लेती हैं. इनकी बनावट इतनी अलग होती है कि दूर से देखने पर ये किसी फिल्मी दुनिया के पेड़ लगते हैं. इनकी डालियों के ऊपर पत्तियों का गुच्छा बन जाता है, जबकि नीचे का तना सीधा दिखाई देता है. इस वजह से पूरा पेड़ किसी बड़े छाते जैसा नजर आता है. इस द्वीप की तस्वीरों में ऐसे पेड़ों को देखकर लोग अक्सर इसकी तुलना एलियन ग्रह से करते हैं.
इन पेड़ों का नाम जितना दिलचस्प है, इसकी वजह भी उतनी ही खास है. ड्रैगन ब्लड ट्री की छाल या टिशू को नुकसान पहुंचने पर इसके अंदर से गहरे लाल रंग का रेजिन निकलता है. यह रस देखने में बिल्कुल खून जैसा लगता है. इसी लाल रंग के कारण इसे 'ड्रैगन ब्लड' यानी ड्रैगन का खून कहा जाता है. पुराने समय से इस तरह के लाल रेजिन का इस्तेमाल रंग, वार्निश और ट्रेडिशनल चीजों में होता रहा है. हालांकि, यह असली खून नहीं, बल्कि पेड़ से निकलने वाला नेचुरल पदार्थ है.
This is the island "SOCOTRA ISLAND, YEMEN", this island is often referred to as the island From another planet, where the shape of the trees here is very different from other islands, and also local residents believe that the sap from the trees has more benefits 😱😱🫣 https://t.co/V4OZWDjbur
— SingPentingYakin (@SingYakinDer) December 30, 2025
सोकोत्रा की खासियत सिर्फ ड्रैगन ब्लड ट्री तक सीमित नहीं है. यहां बोतल जैसे मोटे तने वाले पौधे भी पाए जाते हैं, जिन्हें रेगिस्तानी गुलाब कहा जाता है. इनके तने पानी जमा करने में मदद करते हैं, जिससे ये सूखे और गर्म वातावरण में भी जिंदा रह पाते हैं. यह द्वीप लंबे समय तक जियोग्राफिकल आइसोलेशन में रहा है. इस वजह से यहां के कई पौधों और जीवों का विकास दुनिया के दूसरे हिस्सों से अलग तरीके से हुआ. यहां मिलने वाली कई प्रजातियां स्थानीय हैं, यानी प्राकृतिक रूप से दुनिया में बहुत सीमित जगहों पर ही पाई जाती हैं.
सोकोत्रा की पहचान सिर्फ इसके पेड़-पौधों के अलावा अनोखे जीव-जंतुओं से भी है. यहां कई तरह के स्थानीय पक्षी, सरीसृप और कीट पाए जाते हैं. इनमें कुछ ऐसी प्रजातियां भी शामिल हैं, जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलतीं. यही वजह है कि यह द्वीप वैज्ञानिकों और प्रकृति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए खास महत्व रखता है. यहां की जैव विविधता को समझना इस बात का भी उदाहरण है कि लंबे समय तक अलग रहने से किसी इलाके का प्राकृतिक जीवन कितना अनोखा बन सकता है.
अगर आपको लगता है कि सोकोत्रा सिर्फ अजीब पेड़ों और सूखे पहाड़ी इलाकों का नाम है, तो आप गलत हैं. यहां के समुद्र तट आपको हैरान कर सकते हैं. द्वीप के आसपास साफ नीला पानी, सफेद रेत और खूबसूरत तटीय इलाके मौजूद हैं. यहां का समुद्री जीवन भी प्राकृतिक रूप से काफी अहम है. जमीन पर अजीब आकार वाले पेड़ और आसपास फैला नीला समुद्र मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जो आम पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग है.
🇾🇪 The Earth’s Rarest Silhouette: Dragon’s blood forests of Socotra Island, Yemen. Socotra Island, part of Yemen, is a unique geography home to approximately 60,000 people and holds UNESCO World Heritage status due to its isolated nature and extraordinary biodiversity. Nearly 37% of the island's plant life is endemic, hosting rare species found nowhere else on Earth, such as the iconic umbrella-shaped Dragon's Blood Tree (Dracaena cinnabari), the distinctive bulbous Desert Rose (Adenium obesum), and the Socotra Cucumber Tree (Dendrosicyos socotranus), the only member of its family to grow in tree form. Video by Joe Hattab
— WANA Visuals (@wana_visualss) March 8, 2026
इस द्वीप का भारत से जुड़ा एक अहम किस्सा भी है. मई 2018 में चक्रवात मेकुनु के दौरान सोकोत्रा क्षेत्र में 38 भारतीय नाविक फंस गए थे. खराब मौसम और मुश्किल हालात के बीच उन्हें सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती थी. ऐसे समय में भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन निस्तार' शुरू किया. इस अभियान के तहत आईएनएस सुनयना की मदद से सभी 38 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया. इस घटना ने सोकोत्रा को भारत में भी चर्चा में ला दिया था.
सोकोत्रा की प्राकृतिक खासियतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. साल 2008 में सोकोत्रा द्वीपसमूह को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था. इसके पीछे यहां की अनोखी जैव विविधता और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण का महत्व बड़ी वजह रहा. यहां की प्राकृतिक संपदा जितनी खास है, उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है. पर्यावरण में बदलाव और इंसानी गतिविधियां ऐसे संवेदनशील इलाकों के लिए चुनौती बन सकती हैं. सोकोत्रा की कहानी बताती है कि धरती पर आज भी ऐसी जगहें मौजूद हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है.