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इस समय तमिलनाडु के थूथुकुडी में एक ऐसा पेड़ चर्चा में है, जिसे देखने के लिए लोग खास तौर पर आते रहे हैं. S.A.V. स्कूल परिसर में मौजूद दुर्लभ बाओबाब पेड़ बारिश के कारण बीच से फट गया है. पेड़ की हालत देखकर स्थानीय लोग चिंतित हैं और इसे बचाने के लिए जल्द कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. पेड़ को इस हालत में देखकर लोग इसके भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उन्हें डर है कि समय रहते इसकी देखभाल नहीं की गई तो शहर की यह पुरानी धरोहर हमेशा के लिए खत्म हो सकती है. क्योंकि वहां के लोगों के लिए यह महज एक पेड़ नहीं, बल्कि अफ्रीका से भारत पहुंची सदियों पुरानी जीवंत विरासत थी.
यह पेड़ थूथुकुडी के 174 साल पुराने S.A.V. स्कूल परिसर में लगा है. इस स्कूल की स्थापना 1852 में हुई थी और यह लंबे समय से शहर की पहचान का हिस्सा रहा है. परिसर में मौजूद बाओबाब पेड़ का भी अपनी उम्र और अनोखे आकार के कारण वहां के लोगों के बीच खास महत्व है. बताया जा रहा है कि इस पेड़ की उम्र करीब 350 साल है. हालांकि, इसकी उम्र के दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है. फिर भी स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि शहर के इतिहास और प्राकृतिक विरासत से जुड़ी एक खास निशानी है.
#WATCH थूथुकुडी(तमिलनाडु): 174 साल पुराने एस.ए.वी. स्कूल में मौजूद दुर्लभ बाओबाब पेड़ बारिश के कारण बीच से फट गया है। प्रशासन से इसे बचाने के उपाय करने की अपील की जा रही है। इस पेड़ की आयु 350 वर्ष बताई जा रही है। https://t.co/pSKJjUOIOq
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 23, 2026
पेड़ को हुए नुकसान के बाद स्कूल प्रशासन ने सरकार और वन विभाग से तुरंत मदद करने की अपील की है. मांग है कि एक्सपर्ट्स मौके पर पहुंचकर पेड़ की हालत का जायजा लें और उसे बचाने के लिए सही तरीका अपनाएं. स्थानीय लोगों का भी कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है. उनके मुताबिक, अगर समय रहते एक्सपर्ट्स की मदद मिल जाए तो पेड़ को बचाने की कोशिश की जा सकती है.
स्थानीय लोगों ने पेड़ को बचाने के लिए कुछ उपायों की बात भी कही है. इनमें ट्रंक यानी तने को संभालने की तकनीक और जरूरत के अनुसार केमिकल कोटिंग जैसे तरीके शामिल हैं. हालांकि, इनमें से कौन सा तरीका इस पेड़ के लिए सही रहेगा, यह एक्सपर्ट्स की जांच के बाद ही तय किया जा सकता है. पेड़ का बीच से फटना अपने आप में गंभीर मसला है. ऐसे में बिना जांच के कोई भी कदम उठाना ठीक नहीं होगा. वन विभाग और पेड़ों की देखभाल करने वाले एक्सपर्ट्स की भूमिका इसलिए अहम हो जाती है.
बाओबाब पेड़ अपने मोटे और बड़े तने वाली बनावट के लिए जाने जाते हैं. दुनिया के कुछ हिस्सों में ऐसे पेड़ सदियों तक जीवित रहते हैं. थूथुकुडी के इस पेड़ को लेकर भी लोगों में खास लगाव है, क्योंकि यह लंबे समय से स्कूल परिसर का हिस्सा रहा है. अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है. वे चाहते हैं कि इस पुराने पेड़ को बचाने के लिए जल्द एक्सपर्ट्स की मदद ली जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इसे देख सकें. फिलहाल, बारिश से क्षतिग्रस्त हुए इस बाओबाब पेड़ का वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है और इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहा है.