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350 साल पुराने पेड़ पर टूटा कुदरत का कहर: बारिश से बीच में फटा दुर्लभ बाओबाब, 174 साल पुराने स्कूल की पहचान बचाने की मांग

तमिलनाडु के थूथुकुडी में 174 साल पुराने S.A.V. स्कूल परिसर में लगा दुर्लभ बाओबाब पेड़ बारिश के कारण बीच से फट गया है. करीब 350 साल पुराना बताया जा रहा यह पेड़ स्थानीय लोगों के लिए खास पहचान रखता है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसे बचाने की मांग तेज हो गई है. स्कूल प्रशासन ने भी सरकार और वन विभाग से जल्द जरूरी कदम उठाने की अपील की है.

350 साल पुराने पेड़ पर टूटा कुदरत का कहर: बारिश से बीच में फटा दुर्लभ बाओबाब, 174 साल पुराने स्कूल की पहचान बचाने की मांग
Image Credit: X-@AHindinews | बारिश ने पहुंचाया 350 साल पुराने बाओबाब को नुकसान!

इस समय तमिलनाडु के थूथुकुडी में एक ऐसा पेड़ चर्चा में है, जिसे देखने के लिए लोग खास तौर पर आते रहे हैं. S.A.V. स्कूल परिसर में मौजूद दुर्लभ बाओबाब पेड़ बारिश के कारण बीच से फट गया है. पेड़ की हालत देखकर स्थानीय लोग चिंतित हैं और इसे बचाने के लिए जल्द कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. पेड़ को इस हालत में देखकर लोग इसके भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उन्हें डर है कि समय रहते इसकी देखभाल नहीं की गई तो शहर की यह पुरानी धरोहर हमेशा के लिए खत्म हो सकती है. क्योंकि वहां के लोगों के लिए यह महज एक पेड़ नहीं, बल्कि अफ्रीका से भारत पहुंची सदियों पुरानी जीवंत विरासत थी.

174 साल पुराने स्कूल की खास पहचान

यह पेड़ थूथुकुडी के 174 साल पुराने S.A.V. स्कूल परिसर में लगा है. इस स्कूल की स्थापना 1852 में हुई थी और यह लंबे समय से शहर की पहचान का हिस्सा रहा है. परिसर में मौजूद बाओबाब पेड़ का भी अपनी उम्र और अनोखे आकार के कारण वहां के लोगों के बीच खास महत्व है. बताया जा रहा है कि इस पेड़ की उम्र करीब 350 साल है. हालांकि, इसकी उम्र के दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है. फिर भी स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि शहर के इतिहास और प्राकृतिक विरासत से जुड़ी एक खास निशानी है.

 

 

स्कूल प्रशासन ने सरकार से लगाई गुहार

पेड़ को हुए नुकसान के बाद स्कूल प्रशासन ने सरकार और वन विभाग से तुरंत मदद करने की अपील की है. मांग है कि एक्सपर्ट्स मौके पर पहुंचकर पेड़ की हालत का जायजा लें और उसे बचाने के लिए सही तरीका अपनाएं. स्थानीय लोगों का भी कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है. उनके मुताबिक, अगर समय रहते एक्सपर्ट्स की मदद मिल जाए तो पेड़ को बचाने की कोशिश की जा सकती है.

क्या दोबारा बचाया जा सकता है पेड़?

स्थानीय लोगों ने पेड़ को बचाने के लिए कुछ उपायों की बात भी कही है. इनमें ट्रंक यानी तने को संभालने की तकनीक और जरूरत के अनुसार केमिकल कोटिंग जैसे तरीके शामिल हैं. हालांकि, इनमें से कौन सा तरीका इस पेड़ के लिए सही रहेगा, यह एक्सपर्ट्स की जांच के बाद ही तय किया जा सकता है. पेड़ का बीच से फटना अपने आप में गंभीर मसला है. ऐसे में बिना जांच के कोई भी कदम उठाना ठीक नहीं होगा. वन विभाग और पेड़ों की देखभाल करने वाले एक्सपर्ट्स की भूमिका इसलिए अहम हो जाती है.

सिर्फ पेड़ नहीं, शहर की प्राकृतिक धरोहर

बाओबाब पेड़ अपने मोटे और बड़े तने वाली बनावट के लिए जाने जाते हैं. दुनिया के कुछ हिस्सों में ऐसे पेड़ सदियों तक जीवित रहते हैं. थूथुकुडी के इस पेड़ को लेकर भी लोगों में खास लगाव है, क्योंकि यह लंबे समय से स्कूल परिसर का हिस्सा रहा है. अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है. वे चाहते हैं कि इस पुराने पेड़ को बचाने के लिए जल्द एक्सपर्ट्स की मदद ली जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इसे देख सकें. फिलहाल, बारिश से क्षतिग्रस्त हुए इस बाओबाब पेड़ का वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है और इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहा है.

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About the Author

Santosh Kumar Mishra

Santosh Kumar Mishra

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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