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दिन में पढ़ाई, रात में सड़क किनारे दुकान: मरीन इंजीनियरिंग का छात्र मूंगफली बेचकर भर रहा कॉलेज की फीस; रात 3 बजे तक करता है मेहनत

दिनभर कॉलेज में मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई और फिर रात होते ही सड़कों पर मूंगफली बेचने का काम. फिलीपींस के अरिस्टन एरा III की जिंदगी कुछ ऐसी ही है. वह रात के 3 बजे तक ग्राहकों को मूंगफली बेचते हैं और कुछ घंटे सोने के बाद सुबह कॉलेज पहुंच जाते हैं. इस काम से वह अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के साथ परिवार की आर्थिक मदद भी करते हैं.

दिन में पढ़ाई, रात में सड़क किनारे दुकान: मरीन इंजीनियरिंग का छात्र मूंगफली बेचकर भर रहा कॉलेज की फीस; रात 3 बजे तक करता है मेहनत
Image Credit: प्रतीकात्मक AI इमेज | मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए रात 3 बजे तक मूंगफली बेचता है फिलीपींस का छात्र!

आमतौर पर कॉलेज की क्लास खत्म होने के बाद छात्र दोस्तों के साथ वक्त बिताते हैं, कहीं घूमने जाते हैं या फिर घर लौटकर आराम करते हैं. लेकिन फिलीपींस के अरिस्टन एरा III के लिए कॉलेज से निकलने का मतलब दिन का काम खत्म होना नहीं है. उनके लिए असली मेहनत तो इसके बाद शुरू होती है.

अरिस्टन यूनिवर्सिटी ऑफ द विसायस में मरीन इंजीनियरिंग के तीसरे साल के छात्र हैं. दिन में वह जहाजों, समुद्र और इंजीनियरिंग से जुड़ी पढ़ाई करते हैं. शाम होते ही उनके कंधों पर मूंगफली का टोकरा आ जाता है और वह ग्राहकों की खोज में सड़कों पर निकल पड़ते हैं. कई बार उनका यह काम रात के 3 बजे तक चलता है. इसके बाद कुछ घंटे की नींद लेकर उन्हें सुबह फिर कॉलेज के लिए तैयार होना पड़ता है. वह अपनी ट्यूशन फीस और रोजमर्रा के खर्च इसी कमाई से निकालते हैं.

11 साल की उम्र में शुरू कर दिया था काम

सनस्टार के बियॉन्ड द हेडलाइंस पॉडकास्ट में अरिस्टन ने बताया कि उनके लिए मेहनत और कमाई का यह सिलसिला कॉलेज पहुंचने के बाद शुरू नहीं हुआ था. इसकी शुरुआत तो बचपन में ही हो गई थी. जब वह महज 11 साल के थे, तब अपनी मां के साथ घर का बना खाना बेचने में हाथ बंटाने लगे थे. उनकी मां बोगो सिटी के आसपास एम्बुटिडो और एम्पानाडा जैसे फिलीपींस के पारंपरिक फूड आइटम बेचती थीं. अरिस्टन स्कूल के दिनों में उनके साथ जाते और सामान बेचने में मदद करते थे. मां खुद भी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सामान बेचकर पैसे कमाती थीं. यही वजह है कि अरिस्टन के लिए मां सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं.

अंडे बेचने से हुई शुरुआत

धीरे-धीरे अरिस्टन ने खुद भी कुछ बेचने की कोशिश शुरू कर दी थी. सबसे पहले वह बटेर के अंडे बेचते थे, जिन्हें पड़ोस के एक व्यक्ति से खरीदते थे. यह काम बंद हुआ तो उन्होंने आम बेचना शुरू कर दिया. लेकिन आम लेकर घूमना उनके लिए काफी मुश्किल था. इसके बाद उन्होंने मूंगफली बेचने का फैसला किया. इन्हें साथ लेकर चलना आसान था और ये जल्दी खराब भी नहीं होती थीं. देखते ही देखते मूंगफली बेचना उनकी डेली रूटीन का हिस्सा बन गया.

दो घंटे की नींद, फिर यूनिफॉर्म पहनकर कॉलेज

अरिस्टन का डेली रूटीन सुनकर किसी को भी हैरानी हो सकती है. देर रात तक मूंगफली बेचने के बाद उन्हें सुबह करीब 5 बजे उठना होता है. वह अपनी यूनिफॉर्म प्रेस करते हैं, कॉलेज ले जाने के लिए जरूरी सामान तैयार करते हैं और मूंगफली का स्टॉक भी संभालते हैं. सुबह 7:30 बजे से पहले उन्हें कॉलेज पहुंचना होता है. इसकी एक वजह यह भी है कि उनके कुछ रेगुलर ग्राहक उनके साथी छात्र ही हैं. वे क्लास शुरू होने से पहले उनसे मूंगफली खरीद लेते हैं. इतनी कम नींद के बावजूद अरिस्टन अपनी पढ़ाई और काम दोनों को संभालने की कोशिश करते हैं. दूसरे साल से उन्होंने अपनी ट्यूशन फीस और रोज का खर्च खुद उठाना शुरू कर दिया था.

पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं अरिस्टन

अरिस्टन पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. उनके चार छोटे भाई-बहन अभी पढ़ाई कर रहे हैं. ऐसे में वह सिर्फ अपनी फीस भरने तक सीमित नहीं रहना चाहते. उनकी कोशिश है कि जरूरत पड़ने पर परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकें. शुरुआत में उनके माता-पिता इस काम को लेकर परेशान थे. खासकर तब, जब अरिस्टन सेबू में रहकर पढ़ाई कर रहे थे और सड़कों पर सामान बेचते थे. उन्हें डर था कि देर रात तक बाहर काम करना बेटे के लिए ठीक नहीं होगा. अरिस्टन ने शुरुआत में अपने काम के बारे में माता-पिता को नहीं बताया था. लेकिन बाद में जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो धीरे-धीरे उन्होंने भी बेटे के फैसले को स्वीकार कर लिया और उसका साथ देने लगे.

'ईमानदारी से काम करने में शर्म कैसी?'

सनस्टार के बियॉन्ड द हेडलाइंस पॉडकास्ट में अरिस्टन ने कहा कि उनके लिए मूंगफली बेचना मजबूरी भर नहीं है. वह इसे अपने समय का सही इस्तेमाल और मेहनत से पैसे कमाने का जरिया मानते हैं. उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कोई उनके काम को किस नजर से देखता है. उनका मानना है कि ईमानदारी से कमाई करने में शर्म कैसी? किसी के सामने अपनी आर्थिक स्थिति छिपाने या दिखावा करने से बेहतर है कि इंसान मेहनत करके अपने पैरों पर खड़ा हो. उनकी मां ने भी बचपन से यही सिखाया है कि छोटा-बड़ा कोई काम नहीं होता. खुद मां ने पढ़ाई के साथ सामान बेचकर परिवार को संभालने में मदद की थी. शायद इसी वजह से अरिस्टन के लिए मेहनत करना कभी शर्मिंदगी की बात नहीं रही.

मूंगफली बेचने से आगे अपना बिजनेस खड़ा करने का सपना

अरिस्टन का सपना सिर्फ कॉलेज की फीस भरने और परिवार का खर्च चलाने तक सीमित नहीं है. वह अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. इसी दिशा में उन्होंने बोगो सिटी में 'स्पीडी डिलीवरी' नाम से एक लोकल डिलीवरी सर्विस शुरू करने की तैयारी की है. इस सर्विस के जरिए आसपास के इलाकों में खाना, किराने का सामान और दवाइयां पहुंचाने की योजना है. उनके कुछ दोस्त भी इस काम से जुड़े हैं. इनमें ऐसे युवा भी शामिल हैं, जिनके पास पहले कोई रोजगार नहीं था. वे डिलीवरी राइडर के तौर पर काम कर रहे हैं. अरिस्टन खुद भी डिलीवरी करने में मदद करते हैं. फिलहाल इस काम से जुड़ी जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. वह आगे चलकर रियल एस्टेट और दूसरे बिजनेस में भी हाथ आजमाना चाहते हैं.

आवारा जानवरों के लिए शेल्टर बनाने की भी है इच्छा

अरिस्टन के सपनों में सिर्फ पैसा कमाना शामिल नहीं है. वह भविष्य में कुत्तों, बिल्लियों और सांपों जैसे आवारा जानवरों के लिए एक शेल्टर भी बनाना चाहते हैं. उनका मानना है कि कई जानवरों को लोग बिना समझे गलत नजर से देखते हैं, जबकि उन्हें भी सुरक्षित जगह और देखभाल की जरूरत होती है. मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह समुद्र में काम करने का सपना भी देखते हैं. हालांकि, उनके लिए यह डिग्री आर्थिक रूप से मजबूत बनने और आगे अपना बिजनेस खड़ा करने का एक रास्ता भी है.

सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं तारीफ

अरिस्टन की कहानी सामने आने के बाद लोग उनकी मेहनत और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की तारीफ कर रहे हैं. खासकर इस बात ने लोगों का ध्यान खींचा कि वह रात के 3 बजे तक काम करने के बाद भी सुबह कॉलेज पहुंचना नहीं छोड़ते. उनकी जिंदगी से एक बात साफ नजर आती है कि हालात जैसे भी हों, आगे बढ़ने की कोशिश की जा सकती है. अरिस्टन भी यही मानते हैं कि किसी को अपनी जिंदगी की तुलना दूसरे लोगों से नहीं करनी चाहिए. कम पैसे होने का मतलब यह नहीं कि सपने देखने या उन्हें पूरा करने की उम्मीद छोड़ दी जाए. फिलहाल उनकी जिंदगी में किताबें, कॉलेज, मूंगफली का टोकरा और अपना बिजनेस खड़ा करने की कोशिश, सब साथ-साथ चल रहे हैं.

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About the Author

Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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