जिन्ना को श्रद्धांजलि देने में उड़े पाकिस्तानी विधायक के तोते: सदन में अंग्रेजी पढ़ने में छूटे पसीने; साथी नेता दबाते दिखे हंसी, Video Viral
पाकिस्तान में एक विधायक का अंग्रेजी में लिखे प्रस्ताव को पढ़ते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. कराची के केमारी से MPA मोहम्मद शब्बीर कुरैशी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के सम्मान में पेश किए गए अंग्रेजी प्रस्ताव को पढ़ते नजर आए. बार-बार रुकने और पास बैठे साथियों से मदद लेने के कारण वीडियो चर्चा में आ गया.
सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो पाकिस्तान की एक विधानसभा कार्यवाही का बताया जा रहा है. इसमें कराची के केमारी से विधायक मोहम्मद शब्बीर कुरैशी नजर आ रहे हैं. उन्हें पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के सम्मान में पेश किया गया एक प्रस्ताव पढ़ना था.
प्रस्ताव अंग्रेजी भाषा में लिखा हुआ था. विधायक जैसे ही इसे पढ़ना शुरू करते हैं, कई जगह रुकते दिखाई देते हैं. कुछ शब्दों को बोलने में उन्हें परेशानी होती है और वह आगे पढ़ने के लिए आसपास बैठे साथियों से मदद लेते नजर आते हैं.
अंग्रेजी शब्दों पर बार-बार अटके
वीडियो में विधायक का पढ़ने का अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है. वह लिखे हुए प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई शब्दों पर रुक जाते हैं. कुछ मौकों पर ऐसा लगता है कि उन्हें सही उच्चारण को लेकर मदद की जरूरत पड़ रही है. विधानसभा जैसी औपचारिक जगह पर कैमरों के सामने यह पूरा नजारा रिकॉर्ड हो गया. इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो लोगों ने इसे तेजी से शेयर करना शुरू कर दिया. देखते ही देखते विधायक का अंग्रेजी पढ़ने का अंदाज ही चर्चा का सबसे बड़ा कारण बन गया.
करोड़ों लोगों तक पहुंचा वीडियो
वीडियो वायरल होने के बाद इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कुछ लोगों ने विधायक का मजाक उड़ाया, तो कुछ ने उनकी तैयारी पर सवाल खड़े किए. वहीं कई लोगों ने इस पूरे मामले को सिर्फ एक विधायक की अंग्रेजी तक सीमित रखने के बजाय पाकिस्तान की सरकारी व्यवस्था में भाषा के इस्तेमाल से जोड़कर देखा. सोशल मीडिया यूजर्स का सवाल था कि अगर किसी विधायक को अंग्रेजी में लिखे दस्तावेज को पढ़ने में परेशानी हो रही है तो उसे पहले से इसकी तैयारी क्यों नहीं कराई गई? आखिर सार्वजनिक कार्यवाही के दौरान किसी प्रतिनिधि को ऐसी स्थिति में क्यों डाल दिया गया?
जिन्ना और अंग्रेजी का कनेक्शन भी चर्चा में
इस मामले में एक दिलचस्प बात यह भी है कि जिस प्रस्ताव को पढ़ने में विधायक को परेशानी हो रही थी, वह मोहम्मद अली जिन्ना के सम्मान में था. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसी बात को लेकर तुलना शुरू कर दी. जिन्ना ने कानून की पढ़ाई इंग्लैंड में की थी और वह अंग्रेजी भाषा में अपने भाषणों और कानूनी दलीलों के लिए जाने जाते थे. ऐसे में कुछ यूजर्स ने वायरल वीडियो को जिन्ना की अंग्रेजी में पकड़ के संदर्भ में भी देखा. हालांकि, किसी नेता की अंग्रेजी कमजोर होना अपने आप में उसकी राजनीतिक क्षमता का पैमाना नहीं हो सकता. लेकिन अगर सवाल पाकिस्तान का हो, तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.
सरकारी कामकाज के लिए अंग्रेजी जरूरी है क्या?
वीडियो के बाद पाकिस्तान में एक पुरानी बहस फिर सामने आती दिखी कि सरकारी कामकाज और विधानसभा की कार्यवाही में अंग्रेजी का इस्तेमाल कितना जरूरी है. कई लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात उर्दू या स्थानीय भाषाओं में रखने का ज्यादा मौका मिलना चाहिए. आखिर किसी विधायक की जिम्मेदारी अपनी बात लोगों तक साफ तरीके से पहुंचाना है. अगर भाषा की वजह से वह लिखी हुई बात ही ठीक से नहीं पढ़ पा रहा है तो उसका संदेश जनता तक सही तरीके से कैसे पहुंचेगा? कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अंग्रेजी में दस्तावेज रखना जरूरी हो तो प्रतिनिधियों को उसका आसान उच्चारण वाला वर्जन या पहले से तैयारी का मौका दिया जा सकता है. इससे ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है.
निशाने पर विधानसभा का स्टाफ भी
सोशल मीडिया पर आलोचना का एक हिस्सा विधानसभा के स्टाफ और राजनीतिक सलाहकारों को लेकर भी रहा. लोगों का कहना है कि किसी विधायक को सार्वजनिक कार्यवाही में प्रस्ताव पढ़ने के लिए भेजने से पहले उसे इसकी जानकारी और तैयारी कराना संबंधित टीम की जिम्मेदारी होनी चाहिए. अगर दस्तावेज अंग्रेजी में है और उसे पढ़ने वाले नेता को भाषा में परेशानी है तो उसे पहले से समझाया जा सकता है. मुश्किल शब्दों का उच्चारण भी बताया जा सकता है. इससे न सिर्फ नेता का आत्मविश्वास बना रहता, बल्कि विधानसभा की कार्यवाही भी ज्यादा सहज तरीके से आगे बढ़ती.
वीडियो ने नेताओं की तैयारी पर उठाए सवाल
वायरल वीडियो ने सिर्फ अंग्रेजी भाषा को लेकर बहस नहीं छेड़ी, बल्कि जनप्रतिनिधियों की तैयारी पर भी सवाल खड़े किए हैं. विधानसभा में पेश होने वाले प्रस्ताव और दूसरे दस्तावेज सिर्फ औपचारिक कागज नहीं होते. उनके पीछे जनता से जुड़े मुद्दे और राजनीतिक फैसले होते हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि नेताओं को कार्यवाही से पहले अपने दस्तावेजों को समझना और उनकी तैयारी करना जरूरी है. दूसरी तरफ, कुछ यूजर्स ने कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ अंग्रेजी के उच्चारण के आधार पर कमतर आंकना भी सही नहीं है.
भाषा से ज्यादा जरूरी है बात समझना
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बहस शायद यही है कि जनप्रतिनिधि किस भाषा में बोलता है, उससे ज्यादा जरूरी यह होना चाहिए कि वह क्या बोल रहा है और जनता की बात कितनी मजबूती से रख पा रहा है. अंग्रेजी एक भाषा है और किसी नेता की राजनीतिक समझ या जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी का अकेला पैमाना नहीं हो सकती. लेकिन अगर सरकारी व्यवस्था में किसी भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य है तो उसके लिए जरूरी तैयारी और मदद देना भी सिस्टम की जिम्मेदारी बनती है.
फिलहाल वीडियो पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं
वायरल वीडियो को लेकर फिलहाल विधायक मोहम्मद शब्बीर कुरैशी या संबंधित विधानसभा की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि विधायक को प्रस्ताव पढ़ने से पहले इसकी कोई तैयारी कराई गई थी या नहीं. फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में है. कुछ लोग इसे विधायक की अंग्रेजी को लेकर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे पाकिस्तान की भाषा नीति और सरकारी कामकाज के तरीके से जोड़ रहे हैं.