'पैसा भी मिलेगा, फीडबैक भी': डेयरी बिजनेस के लिए IT नौकरी छोड़ी, अब रैपिडो चलाकर कर रहा अनोखा काम
बेंगलुरु की सड़कों पर Rapido चलाने वाले एक लड़के की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. ओडिशा के रहने वाले दिनेश ने अपनी IT नौकरी छोड़कर एक साल के लिए बेंगलुरु आने का फैसला किया. वजह कोई नई नौकरी नहीं, बल्कि परिवार के डेयरी बिजनेस को आगे बढ़ाने का आइडिया है. वह रैपिडो चलाकर कमाई भी कर रहा है और उसी दौरान लोगों से डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर फीडबैक भी ले रहा है.
बेंगलुरु में रैपिडो की बाइक पर बैठकर सफर करने वाले किसी यात्री को शायद अंदाजा भी न हो कि बाइक चला रहा शख्स दरअसल अपने आने वाले बिजनेस की तैयारी कर रहा है. कुछ ऐसा ही अनुभव लिंक्डइन यूजर वरुण राज का रहा.
वरुण ने बताया कि सोमवार सुबह एक रैपिडो राइड के दौरान उनकी मुलाकात दिनेश नाम के लड़के से हुई. बातचीत शुरू हुई तो दिनेश ने उनसे कुछ ऐसे सवाल पूछ दिए, जो किसी रैपिडो राइडर की आम बातचीत से बिल्कुल अलग थे. वरुण ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह राइड के दौरान यात्रियों से दूध और डेयरी उत्पादों की मांग, ग्राहकों की पसंद और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों पर फीडबैक ले रहा था. रैपिडो राइडर से इस तरह के सवाल-जवाब का उनका यह पहला और अनोखा अनुभव था.
राइड के बीच पूछा- दूध के अलावा क्या खरीदते हैं?
राइड शुरू होने के कुछ देर बाद दिनेश ने वरुण से पूछा कि वह दूध के अलावा कौन-कौन से डेयरी प्रोडक्ट खरीदते हैं. सवाल थोड़ा अलग था, इसलिए वरुण ने भी उनसे पूछ लिया कि आखिर वह ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं. तब दिनेश ने अपनी पूरी कहानी बताई. उन्होंने कहा कि वह पहले एक IT कंपनी में नौकरी करते थे. लेकिन अब उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी है और परिवार के डेयरी बिजनेस को एक नए तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. इसका मतलब रैपिडो उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है. बाइक की हर राइड उनके लिए संभावित ग्राहक से बातचीत करने का मौका भी बन रही है.
परिवार का डेयरी फार्म ओडिशा में है
दिनेश का परिवार ओडिशा में डेयरी फार्म से जुड़ा हुआ है. उनका आइडिया इसी पारिवारिक काम को आगे बढ़ाने का है. लेकिन बिजनेस शुरू करने से पहले वह यह समझना चाहते हैं कि शहर में रहने वाले लोग असल में डेयरी प्रोडक्ट्स में क्या चाहते हैं? परिवार के लोगों को उनका नौकरी छोड़ना पसंद नहीं आया. खासकर माता-पिता इस फैसले से खुश नहीं थे, क्योंकि IT की नौकरी एक स्थिर कमाई दे रही थी. इसके बावजूद दिनेश ने फैसला बदलने के बजाय पहले अपने आइडिया को जमीन पर परखने का रास्ता चुना.
एक साल बेंगलुरु में रहकर करेंगे 'मार्केट टेस्ट'
दिनेश सीधे ओडिशा वापस जाकर डेयरी बिजनेस शुरू कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने खुद को करीब एक साल का समय दिया है. इस दौरान वह बेंगलुरु में रहकर यह समझना चाहते हैं कि ग्राहक क्या खरीदना चाहते हैं, किस चीज के लिए पैसे देने को तैयार हैं और डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर उनकी उम्मीदें क्या हैं. इसके लिए उन्होंने रैपिडो चलाना शुरू किया. इसकी सबसे खास बात यह है कि उन्हें अपने संभावित ग्राहकों से बात करने के लिए अलग से सर्वे या मार्केट रिसर्च टीम नहीं बनानी पड़ी.
IT वालों से ही जान रहे हैं उनकी पसंद
दिनेश खास तौर पर IT सेक्टर में काम करने वाले लोगों से बातचीत करने की कोशिश करते हैं. इसके पीछे की वजह बताते हुए वह कहते हैं कि बेंगलुरु में काम करने वाला यही तबका उनके भविष्य के बिजनेस के संभावित ग्राहकों में शामिल हो सकता है. राइड के दौरान अगर उन्हें लगता है कि सामने वाला उनके टारगेट कस्टमर में आ सकता है, तो वह बातचीत का मौका निकाल लेते हैं. दूध के अलावा लोग क्या खरीदते हैं, किस तरह के प्रोडक्ट पसंद करते हैं और उनकी जरूरत क्या है, जैसी बातें जानने की कोशिश करते हैं. इस तरह दिनेश को एक साथ दो फायदे मिल रहे हैं. एक तरफ रैपिडो से कमाई हो रही है, दूसरी तरफ बिजनेस के लिए असली ग्राहकों की राय भी मिल रही है.
बोले- 'पैसा भी मिलेगा और फीडबैक भी'
वरुण राज ने दिनेश की इसी सोच को अपनी लिंक्डइन पोस्ट में खास तौर पर बताया. जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने इतना अलग तरीका क्यों चुना, तो उनका जवाब था, 'सर, ऐसे पैसा भी मिलेगा और फीडबैक भी.' दिनेश का यही छोटा सा जवाब पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा बन गया. वह किसी बड़ी कंपनी के ऑफिस में बैठकर ग्राहकों की पसंद का अनुमान नहीं लगा रहे. वह सीधे उन्हीं लोगों के बीच जा रहे हैं, जिन्हें भविष्य में अपना प्रोडक्ट बेचना चाहते हैं.
MBA वाली भाषा नहीं, सीधे ग्राहक से बातचीत
वरुण राज ने दिनेश के तरीके की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी खासियत सिर्फ बिजनेस आइडिया नहीं, बल्कि उसे समझने का तरीका है. क्योंकि उन्होंने न MBA वाली भाषा, न बड़ी प्रेजेंटेशन और न ही कोई लंबी मार्केट रिसर्च रिपोर्ट तैयार की है, वह सीधे ग्राहक के फीडबैक सिस्टम पर काम कर रहे हैं. दिनेश फिलहाल लोगों से सीधे सवाल पूछकर समझ रहे हैं कि उन्हें क्या चाहिए. वह एक साल में अपने बिजनेस मॉडल को समझने और बेहतर करने के बाद ओडिशा लौटकर इसे शुरू करना चाहते हैं.
सोशल मीडिया पर लोग बोले- यही असली मार्केट रिसर्च
वरुण की पोस्ट सामने आने के बाद लिंक्डइन पर दिनेश की कहानी को काफी पसंद किया गया. लोगों ने उनके तरीके को असली ग्राहक की जरूरत समझने का सीधा और आसान तरीका बताया. एक यूजर ने लिखा कि ग्राहकों से आमने-सामने बातचीत करना ही कई बार सबसे अच्छी मार्केट रिसर्च होती है. दूसरे यूजर ने इसे सही ग्राहक को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट तैयार करने का शानदार तरीका बताया. वहीं कई लोगों ने दिनेश को आगे के बिजनेस के लिए शुभकामनाएं दीं.
नौकरी छोड़ने से ज्यादा जरूरी था अपना रास्ता चुनना
दिनेश की कहानी इसलिए भी अलग है, क्योंकि उन्होंने नौकरी छोड़ने के बाद सिर्फ बिजनेस शुरू करने की जल्दबाजी नहीं दिखाई. उन्होंने पहले यह समझने की कोशिश की कि बाजार में लोगों को असल में क्या चाहिए? एक साल रैपिडो चलाते हुए कमाई करना और साथ-साथ होने वाले ग्राहकों की पसंद जानना शायद देखने में साधारण तरीका लगे, लेकिन इसमें एक बड़ी बात छिपी है. बिजनेस शुरू करने से पहले ग्राहक को समझना. अब दिनेश की असली परीक्षा तब होगी, जब वह बेंगलुरु से वापस ओडिशा लौटकर अपने परिवार के डेयरी फार्म को बिजनेस में बदलने की कोशिश करेंगे.
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