'लीजिए, अब खुलकर मारिए पीक': थूकने की आदत से परेशान मेट्रो ने बनाया दुनिया का पहला 'स्पिट जोन'; सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मुंबई मेट्रो स्टेशन की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. तस्वीर में एक ऐसा टचलेस बॉक्स दिखाई दे रहा है, जिसे खास तौर पर थूकने के लिए बनाया गया है. बोर्ड पर इसे 'दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान' बताया गया है. तस्वीर सामने आते ही कुछ लोगों ने इसे सफाई के लिहाज से काम का आइडिया बताया, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाया कि थूकने की जगह बनाना समस्या का समाधान कैसे हो सकता है.
मुंबई जैसे शहर में जहां रोज लाखों लोग लोकल ट्रेन, बस और मेट्रो से सफर करते हैं, वहां सफाई बनाए रखना हमेशा बड़ी चुनौती रहती है. खासकर सार्वजनिक जगहों पर थूकने की आदत लंबे समय से परेशानी का कारण रही है. इसी बीच मुंबई मेट्रो स्टेशन की एक तस्वीर सामने आई, जिसने सफाई से ज्यादा लोगों का ध्यान अपने अजीबोगरीब इंतजाम की तरफ खींच लिया.
तस्वीर में एक अलग तरह का बॉक्स नजर आ रहा है. इसे सीधे हाथ से छूने की जरूरत नहीं है. इसके ऊपर लगा बोर्ड लोगों से जिम्मेदार व्यवहार करने की अपील करता है. इसी बोर्ड पर लिखी एक लाइन ने सोशल मीडिया पर पूरी बहस शुरू कर दी.
बोर्ड पर लिखा- 'थूकने की तय जगह'
वायरल तस्वीर में बॉक्स के ऊपर अंग्रेजी और मराठी में इसे इस्तेमाल करने के निर्देश दिखाई देते हैं. यूनिट पर MMRDA और महा मुंबई मेट्रो के लोगो भी नजर आते हैं. इसे 'Touchless Spit Bin' बताया गया है. सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात बोर्ड पर लिखा 'World's First Defined Place To Spit' यानी 'दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान' है. हालांकि, यह स्टेशन किस नाम का है, इन सब दावों की हमने स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.
एक पोस्ट ने शुरू कर दी बहस
इस तस्वीर को X पर यूजर जोरू भथेना ने 27 सितंबर को शेयर किया. उन्होंने तस्वीर के साथ मुंबई मेट्रो में 'Dedicated Spitting Zones' यानी थूकने के लिए तय जगह टेक्स्ट के साथ पोस्ट किया है. इसके बाद तस्वीर तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगी. देखते ही देखते लोग इस बॉक्स को लेकर दो हिस्सों में बंट गए. कुछ लोगों को लगा कि अगर लोग खुले में थूकते ही हैं तो उनके लिए एक अलग जगह होने से दीवारों, फर्श और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर गंदगी कम हो सकती है. वहीं, दूसरे लोगों को यह तरीका बिल्कुल पसंद नहीं आया.
किसी ने कहा- दीवार से अच्छा है बॉक्स
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस पहल का बचाव भी किया. उनका तर्क था कि अगर किसी को थूकने की आदत है तो कम से कम उसे सड़क, दीवार या फर्श पर थूकने से रोकने के लिए कोई तय जगह होना बेहतर है. एक यूजर ने कहा कि दीवार या फर्श पर थूकने के बजाय ऐसे बॉक्स का इस्तेमाल करना ज्यादा ठीक है. एक अन्य व्यक्ति ने लिखा कि इस तरह का इनोवेशन काफी पहले आ जाना चाहिए था. इसका मतलब कुछ लोगों के लिए यह सुविधा सफाई की समस्या से निपटने का एक प्रैक्टिकल तरीका है.
'थूकने की सुविधा क्यों दे रहे हैं?'
दूसरी तरफ कई लोगों ने इस आइडिया पर सवाल खड़े कर दिए. उनका कहना था कि सार्वजनिक जगहों पर थूकना ही नहीं चाहिए, ऐसे में उसके लिए अलग बॉक्स लगाना लोगों को रोकने के बजाय इस आदत को सामान्य बना सकता है. कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल किया कि अगर मेट्रो और सार्वजनिक जगहों पर गुटखा या दूसरी चीजें खाने को लेकर नियम हैं, तो फिर थूकने के लिए अलग सुविधा देने की जरूरत क्यों पड़ी. एक कमेंट में इसे लेकर चिंता जताई गई कि अगर लोगों को थूकने के लिए बाकायदा जगह उपलब्ध कराई जाएगी तो इससे समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ सकती है. ऐसी ही प्रतिक्रियाओं के बीच यह सवाल भी उठा कि सफाई के लिए लोगों की आदत बदलने पर जोर होना चाहिए या उनके लिए अलग सुविधा बनाने पर.
'इंडिया में ऐसी ही समस्या है'
इस अजीबोगरीब पहल को लेकर लोगों ने जमकर मजाक भी किया. कुछ यूजर्स ने इसे भारत की 'मॉडर्न प्रॉब्लम' बताते हुए चुटकी ली. उनका कहना था कि जहां दुनिया के कई शहर सार्वजनिक जगहों को साफ रखने के लिए अलग-अलग टेक्नोलॉजी और सिस्टम पर काम कर रहे हैं, वहीं यहां थूकने के लिए स्मार्ट बॉक्स लगाया जा रहा है. एक यूजर ने मजाक में कहा कि अगर यह बॉक्स लगने के एक महीने बाद उसी जगह की तस्वीर ली जाए तो शायद उसके आसपास भी थूक दिखाई दे. इंटरनेट पर इस पहल को लेकर मजाक, समर्थन और नाराजगी तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
असली सवाल बॉक्स नहीं, आदत का है
देखा जाए तो इस पूरे मामले की बहस सिर्फ एक बॉक्स तक सीमित नहीं है. असली सवाल सार्वजनिक जगहों पर थूकने की आदत का है. अगर कोई व्यक्ति सड़क, स्टेशन, बस स्टॉप या मेट्रो परिसर में थूकता है तो वहां गंदगी फैलती है और सफाई का बोझ भी बढ़ता है. ऐसे में एक तरीका यह हो सकता है कि लोगों को अलग सुविधा देकर गंदगी को एक जगह तक सीमित किया जाए. दूसरा तरीका लोगों को सार्वजनिक जगहों पर थूकने से रोकना और नियमों का सख्ती से पालन कराना हो सकता है. वायरल तस्वीर ने इसी फर्क को लेकर चर्चा छेड़ दी है.
'सफाई' के लिए बना इंतजाम, लेकिन सवाल भी बड़े
मुंबई मेट्रो का यह टचलेस स्पिट बिन आखिर कितना कारगर होगा, इसका अंदाजा समय के साथ ही लगाया जा सकेगा. फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर ने नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक सफाई जैसे पुराने मुद्दे को नए तरीके से चर्चा में ला दिया है. कुछ लोग इसे गंदगी कम करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि लोगों को सार्वजनिक जगहों पर थूकने से रोकना ही ज्यादा जरूरी है. 'दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान' वाला दावा भी फिलहाल स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी फैसले से पहले संबंधित आधिकारिक विभाग से संपर्क जरूर करें.)