चौंक गए डॉक्टर भी! पेट एक और सिर दो, ओडिशा में अजूबे बच्चे का जन्म देख उड़े सबके होश
ओडिशा के कंधमाल में एक महिला ने दो सिर वाले अद्भुत बच्चे को जन्म दिया है. मेडिकल साइंस में इसे 'डाइसेफैलिस पैरापेगस' कहते हैं, जो 3 लाख में किसी एक बच्चे में होता है. जानिए इस केस से जुड़ी पूरी सच्चाई और डॉक्टरों की राय.
ओडिशा से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां कंधमाल जिले में एक महिला ने ऐसे बच्चे को जन्म दिया है जिसके दो सिर हैं, लेकिन शरीर एक ही है. जैसे ही यह खबर अस्पताल से बाहर आई, पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बन गई. डॉक्टरों के लिए भी यह केस किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि मेडिकल साइंस में ऐसी घटनाएं बहुत ही दुर्लभ मानी जाती हैं. 3 लाख बच्चों के जन्म पर कोई एक बच्चा ऐसा पैदा होता है. फिलहाल बच्चे को स्पेशल केयर में रखा गया है और डॉक्टर उसकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
मेडिकल साइंस की भाषा में इस कंडीशन को डाइसेफैलिस पैरापेगस कहा जाता है. यह कंजॉइंट ट्विन्स का ही एक बेहद दुर्लभ रूप है. इसमें गर्भ में जब भ्रूण का सही से विभाजन नहीं हो पाता, तो बच्चे के शरीर के कुछ हिस्से आपस में जुड़े रह जाते हैं. इस केस में बच्चे का सिर और गर्दन तो दो अलग-अलग बन गए, लेकिन धड़ एक ही रह गया. बच्चे के पास हाथ और पैर का केवल एक ही जोड़ा है.
एक गरीब परिवार की अनोखी संतान
एनडीटीवी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परिवार कंधमाल के तुमुडीबंध इलाके का रहने वाला है. बच्चे के पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं और यह इस कपल का पहला बच्चा है. जब डिलीवरी का समय आया और मामला थोड़ा क्रिटिकल लगा, तो महिला को बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया. यह बच्चा 32 हफ्ते की प्रेगनेंसी के दौरान ही पैदा हो गया है, जिसकी वजह से उसकी सेहत को लेकर डॉक्टरों की चिंता थोड़ी ज्यादा बढ़ी हुई है.
फिलहाल, यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि बच्चे के अंदरूनी अंग जैसे दिल, फेफड़े और पेट आपस में कैसे जुड़े हुए हैं. डॉक्टरों की टीम अलग-अलग टेस्ट और स्कैन के जरिए बच्चे के इंटरनल स्ट्रक्चर का पता लगाने की कोशिश कर रही है. जब तक अंदरूनी अंगों की स्थिति पूरी तरह से समझ में नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह के बड़े इलाज या सर्जरी का फैसला नहीं लिया जा सकता.
ओडिशा के लोगों को याद आए जगा और का लिया
इस घटना के सामने आने के बाद ओडिशा के लोगों को अपने प्रदेश के चर्चित केस जगा और कालिया की याद आ गई. जगा और कालिया भी आपस में जुड़े हुए सिर वाले बच्चे थे, जिनका इलाज और सर्जरी काफी समय तक नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर चर्चा में रही थी. इस तरह के रेयर मेडिकल केस में परिजनों के साथ-साथ डॉक्टरों के सामने भी बहुत बड़ी चुनौतियां खड़ी होती हैं.
मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे बच्चों की सर्वाइवल रेट इस बात पर निर्भर करती है कि उनके अंदरूनी अंग सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं. अगर दिल या फेफड़े शेयर हो रहे हैं, तो स्थिति ज्यादा जोखिम भरी होती है. अगले कुछ दिन इस बच्चे की लाइफ के लिए बेहद क्रिटिकल रहने वाले हैं. पूरी मेडिकल टीम इस कोशिश में जुटी है कि बच्चे को हर मुमकिन बेहतरीन केयर दी जा सके.