बनारस का नाम सुनते ही मन में गंगा के घाट, गलियों में बिकता पान और रंग-बिरंगी साड़ियों की तस्वीर सामने आती है. यहां की बोली, खानपान और रहन-सहन का अपना अलग अंदाज है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान के कराची में भी एक ऐसा इलाका है, जहां बनारस से जुड़ी यादें आज तक जिंदा हैं?
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में इसी जगह की झलक दिखाई गई है. यहां रहने वाले लोगों की जड़ें भारत के बनारस से जुड़ी हैं. पीढ़ियां बदल गईं, देश बदल गया, लेकिन अपने पुराने शहर से उनका जुड़ाव अब भी बना हुआ है.
इंस्टाग्राम पर 'देसी एक्सप्लोरर' नाम के कंटेंट क्रिएटर ने यह वीडियो शेयर किया है. वीडियो की शुरुआत में वह बताते हैं कि वह पाकिस्तान की बनारसी कम्युनिटी से मिलवाने जा रहे हैं. यह कम्युनिटी कराची में रहती है और इसके पुरखों का रिश्ता भारत के बनारस से रहा है. वीडियो में एक शख्स भी लोगों को इस इलाके के बारे में बताता नजर आता है. वह कहता है कि वे बनारस से यहां आए थे और अब लोगों को अपना मिनी बनारस दिखाएंगे. इसके बाद कैमरा इलाके की गलियों और वहां चलने वाले कारोबार की तरफ घूमता है.
इस वीडियो में सबसे दिलचस्प नजारा बनारसी पान का है. वीडियो में एक शख्स बड़े प्यार से पान बनाता और खिलाता दिखाई देता है. भारत में बनारस के पान की अपनी अलग पहचान है और वीडियो में इसे देखकर पुराने शहर की याद आना स्वाभाविक है. इसके बाद बनारसी साड़ियों की दुकान भी दिखाई जाती है. यहां साड़ियों और कपड़ों का कारोबार होता है. इलाके के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके परिवार का रिश्ता भारत से रहा है और पाकिस्तान बनने के बाद उनके पिता यहां आकर बस गए थे. इन लोगों के लिए बनारस सिर्फ पुरखों का शहर नहीं, बल्कि उनकी पहचान का हिस्सा भी है. यही वजह है कि समय के साथ नई पीढ़ियां भी इस नाम और अपनी पुरानी जड़ों को संभालकर रखे हुए हैं.
वीडियो में एक बात खास तौर पर ध्यान खींचती है. एक शख्स कहता है, 'याद रखिए, हम पाकिस्तानी हैं, लेकिन बनारस के हैं.' इस एक लाइन में उसकी पहचान और अपने पुराने शहर से जुड़ाव दोनों नजर आते हैं. वह पाकिस्तान में रहता है, वहीं उसका कारोबार और जिंदगी है, लेकिन परिवार की पुरानी यादों में बनारस की जगह अब भी बनी हुई है. दरअसल, देश बंटने के बाद बड़ी संख्या में परिवारों को अपनी जगह छोड़कर दूसरी तरफ जाना पड़ा था. ऐसे परिवार अपने साथ सिर्फ सामान नहीं ले गए, बल्कि अपनी भाषा, खानपान, कारोबार और रीति-रिवाज भी लेकर गए. कराची की बनारसी कम्युनिटी की कहानी भी इसी जुड़ाव की याद दिलाती है.
वीडियो में बनारस से जुड़ी एक और चीज का जिक्र आता है, वह है बनारसी बिरयानी. यहां के खानपान और कारोबार में भी पुराने शहर की छाप दिखाई देती है. पान, कपड़े और खाने-पीने की चीजों के जरिए यह कम्युनिटी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. हालांकि, भारत के बनारस और कराची के इस इलाके की जिंदगी एक जैसी नहीं है. दोनों जगहों की अपनी परिस्थितियां और अपना माहौल है. लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं, जो लोगों को उनके पुराने शहर और परिवार की यादों से जोड़े रखती हैं.
वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, तो लोगों ने इस पर खूब प्यार जताया. खास बात यह रही कि इसे देखने वालों में बनारस से जुड़े लोग भी शामिल थे. कई लोगों ने कमेंट में अपने शहर का नाम देखकर खुशी जाहिर की. कुछ यूजर्स ने कराची में बनारस से जुड़ी इस कम्युनिटी के बारे में और जानने की इच्छा जताई. वहीं, कई लोगों को वहां पान और बनारसी साड़ियों का कारोबार देखकर हैरानी हुई. एक यूजर ने कमेंट में कराची में मौजूद दूसरी जगहों और वहां की कम्युनिटी के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाई. वीडियो ने उन लोगों का भी ध्यान खींचा, जो भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के बाद परिवारों की बदली जिंदगी के बारे में जानना चाहते हैं.
कराची में रहने वाले इन बनारसियों की कहानी सिर्फ एक इलाके या कारोबार की कहानी नहीं है. यह उन परिवारों की याद भी दिलाती है, जिन्होंने बंटवारे के बाद नई जगह पर अपनी जिंदगी शुरू की, लेकिन अपने पुराने शहर से रिश्ता नहीं तोड़ा. आज उनके लिए पाकिस्तान घर है, लेकिन बनारस उनकी जड़ों का हिस्सा है. शायद इसी वजह से 'हम पाकिस्तानी हैं, लेकिन बनारस के हैं' जैसी बात लोगों के दिल को छू रही है. हजारों किलोमीटर की दूरी के बावजूद पान, साड़ियों और पुरानी यादों के सहारे बनारस का नाम आज भी वहां जिंदा है.