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किसी देश की सबसे महंगी और लग्जरी ट्रेन में सफर करने का मौका मिले तो उम्मीद रहती है कि यात्रा आरामदायक होगी और रास्ते में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी. लेकिन भारतीय ट्रैवल यूट्यूबर डॉ. नवंकुर चौधरी के साथ पाकिस्तान की ग्रीन लाइन एक्सप्रेस में सफर के दौरान तस्वीर कुछ अलग रही.
अपने यूट्यूब चैनल 'यात्री डॉक्टर' पर उन्होंने इस सफर का अनुभव शेयर किया है. वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं. नवंकुर ने ट्रेन के अंदर की सुविधाएं दिखाईं, लेकिन साथ ही उन दिक्कतों का भी जिक्र किया, जिन्होंने उनके सफर को लंबा बना दिया.
नवंकुर ने अपने वीडियो में बताया कि पाकिस्तान में ट्रेन का टिकट बुक करने की कोशिश के दौरान उन्हें काफी परेशानी हुई. ऐप पर सीट और किराए की जानकारी तो मिल रही थी, लेकिन ऑनलाइन पेमेंट में दिक्कत आ रही थी. अंत में उन्हें मुल्तान कैंट स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर से टिकट लेनी पड़ी. वीडियो में बताए गए उनके अनुभव के अनुसार, टिकट की कीमत करीब 2,950 पाकिस्तानी रुपये थी, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 850 रुपये के बराबर बताई गई. वह अपने दोस्तों के साथ इस ट्रेन में सफर करने पहुंचे थे. उनका मकसद पाकिस्तान की सबसे बेहतर रेल सुविधाओं में शामिल ग्रीन लाइन को करीब से देखना था.
ट्रेन के अंदर पहुंचने के बाद नवंकुर को कुछ ऐसी सुविधाएं दिखीं, जो आम ट्रेनों से अलग थीं. हर सीट के पीछे एलसीडी स्क्रीन लगी थी. स्क्रीन पर चीनी भाषा का ऑप्शन भी मौजूद था. इसकी वजह कोचों का चीन से आयात किया जाना बताई गई. ट्रेन की सीटें भी खास थीं. उन्हें जरूरत के अनुसार इधर-उधर घुमाया जा सकता था, जिससे आमने-सामने बैठने की सुविधा मिलती है. बाहर से देखने पर ट्रेन मॉडर्न और आरामदायक नजर आती है. लेकिन अंदर से उसके हालात भारत की वंदे भारत से भी खराब हैं, जबकि वंदे भारत ट्रेन भारतीय रेलवे की आम ट्रेनों में से एक है. हालांकि, नवंकुर के अनुभव में सफर की असली परीक्षा ट्रेन के चलने के बाद शुरू हुई.
ग्रीन लाइन एक्सप्रेस में यात्रियों को टिकट के साथ खाना भी दिया गया. नवंकुर ने बताया कि खाने में बिरयानी, चिकन, नान और मिठाई जैसी चीजें शामिल थीं. शाकाहारी यात्रियों के लिए दाल का ऑप्शन था. इस तरह ट्रेन के अंदर खाने और बैठने की सुविधाएं देखकर यह जरूर लगता है कि यात्रियों के आराम का ध्यान रखा गया है. लेकिन नवंकुर ने अपने वीडियो में बताया कि सिर्फ अच्छी सीटें और खाना ही किसी ट्रेन के सफर को बेहतर नहीं बना सकते. समय पर पहुंचना भी उतना ही जरूरी है.
नवंकुर ने बताया कि जब वे खानेवाल स्टेशन पहुंचे तो कराची से आने वाली ट्रेन अपने तय समय से करीब डेढ़ घंटे लेट थी. हालांकि, उन्होंने ट्रेन की लाइव ट्रैकिंग सुविधा की तारीफ की, क्योंकि उसमें देरी की जानकारी दिखाई दे रही थी. लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद भी इंतजार खत्म नहीं हुआ. नवंकुर ने बताया कि मुल्तान और खानेवाल के बीच पानी भरने के नाम पर ट्रेन करीब 40 मिनट तक खड़ी रही. इससे सफर और लंबा हो गया.
नवंकुर के अनुभव में सबसे बड़ी परेशानी ट्रेन की रफ्तार और बार-बार रुकना रही. जिस यात्रा को तय समय में पूरा होना था, उसमें काफी ज्यादा वक्त लग गया. उन्होंने इसकी वजह सिंगल ट्रैक और रेलवे के बुनियादी ढांचे से जुड़ी दिक्कतों को बताया. ट्रेन में मॉडर्न सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद अगर उसे रास्ते में बार-बार रुकना पड़े तो यात्रियों को परेशानी होना स्वाभाविक है. यही वजह रही कि नवंकुर ने ग्रीन लाइन की सुविधाओं और पूरे रेल सिस्टम के कामकाज के बीच फर्क महसूस किया.
नवंकुर ने अपने अनुभव के आधार पर पाकिस्तान की इस ट्रेन की तुलना भारतीय रेलवे से भी की. उनके अनुसार, ग्रीन लाइन में कुछ आधुनिक सुविधाएं जरूर हैं, लेकिन टिकट बुकिंग और समय की पाबंदी जैसे मामलों में उन्हें निराशा हुई. भारतीय रेलवे की लग्जरी ट्रेनों के हिसाब से पाकिस्तान की यह ट्रेन अभी बहुत पीछे है. हालांकि, यह उनके एक सफर का अनुभव है. इससे पाकिस्तान की हर ट्रेन या पूरे रेल नेटवर्क के बारे में एक जैसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
नवंकुर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इसकी वजह सिर्फ ट्रेन के अंदर की सुविधाएं नहीं, बल्कि उन सुविधाओं के बावजूद सफर में आई परेशानियां भी हैं. वीडियो में एक तरफ मॉडर्न कोच नजर आते हैं तो दूसरी तरफ देरी और इंतजार की कहानी सामने आती है. ग्रीन लाइन एक्सप्रेस का उनका अनुभव यही दिखाता है कि किसी ट्रेन को लग्जरी बनाने के लिए सिर्फ स्क्रीन, घूमने वाली सीटें और अच्छा खाना काफी नहीं है. यात्रियों के लिए समय पर मंजिल तक पहुंचना भी उतना ही मायने रखता है. आखिरकार, सफर कितना अच्छा रहा, इसका फैसला केवल ट्रेन के अंदर की चमक-दमक से नहीं, बल्कि पूरी यात्रा के अनुभव से होता है.