बच्चा भूखा था, मां परेशान: बिहार से बेंगलुरु जा रही महिला ने पैंट्री स्टाफ से मांगी ओट्स बनाने में मदद; दिल जीत ले गई छोटी सी पहल
बिहार से बेंगलुरु तक दो साल के बच्चे के साथ ट्रेन में सफर कर रही एक मां के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने बेटे के खाने की थी. वह घर से ओट्स लेकर चली थीं, लेकिन ट्रेन में उसे बनाने का इंतजाम नहीं था. जब उन्होंने पैंट्री स्टाफ से मदद मांगी तो उन्होंने बिना किसी झिझक के ओट्स बनाकर दे दिया. इस छोटे से काम ने लंबी यात्रा को उनके लिए यादगार बना दिया.
छोटे बच्चे के साथ ट्रेन का लंबा सफर अपने आप में एक अलग तरह की चुनौती होता है. कब बच्चा भूखा हो जाए, कब उसको नींद आ जाए और कब अचानक उसको कुछ ऐसा खाने का मन कर जाए, जो ट्रेन में मिलना ही मुश्किल हो जाए. इन सब का कोई तय समय या मूड नहीं होता. ऐसे में बिहार से बेंगलुरु जा रही इस मां ने यात्रा शुरू करने से पहले ही बेटे के खाने की तैयारी कर ली थी.
उनका दो साल का बेटा साथ था और सफर करीब दो रात का था. इसलिए उन्होंने बाहर के खाने पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपने साथ ओट्स का एक पैकेट और उसे रखने के लिए छोटा सा कंटेनर रख लिया था. उन्हें लगा था कि जरूरत पड़ने पर किसी तरह इसे तैयार कर लेंगी.
ट्रेन में मां ने पैंट्री स्टाफ से मांगी मदद
ऐसे में सफर के दौरान एक शाम बच्चे के लिए खाना तैयार करने की जरूरत पड़ी. तब मां ने ट्रेन के पैंट्री स्टाफ से पूछा कि क्या वे उनके बेटे के लिए ओट्स बना सकते हैं. उन्हें शायद उम्मीद नहीं रही होगी कि जवाब इतनी आसानी से मिल जाएगा. लेकिन स्टाफ ने बिना ज्यादा सवाल किए उनकी मदद के लिए हां कर दी. मां ने अपना ओट्स का पैकेट उन्हें दे दिया. कुछ ही देर बाद जो हुआ, उसने उनका ध्यान खींच लिया.
सिर्फ 5 मिनट में बच्चे के लिए तैयार था खाना
मां के अनुसार, पैंट्री स्टाफ ने ओट्स तैयार किया और करीब 5 मिनट के अंदर उसे वापस कर दिया. अब खाना उनके छोटे बेटे के लिए तैयार था और उन्हें अलग से किसी चीज की तलाश में ट्रेन में इधर-उधर नहीं भटकना पड़ा. एक मां के लिए यह भले ही छोटा सा काम हो, लेकिन दो रात के सफर में बच्चे के खाने की चिंता के बीच मिली यह मदद काफी बड़ी राहत थी. खास बात यह थी कि उन्हें स्टाफ के रवैये में किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई. पैंट्री के स्टाफ ने उनको ओट्स बनाने से एक बार भी मना नहीं किया.
'सिर्फ खाना नहीं, उनका व्यवहार दिल छू गया'
महिला ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा अच्छी बात स्टाफ का मदद करने का तरीका लगा. उनके मुताबिक, स्टाफ काफी सहयोगी और मिलनसार था. उन्होंने बताया कि बच्चे के लिए खाना बनाने की बात पर किसी ने उन्हें टालने की कोशिश नहीं की. न ही ऐसा महसूस कराया गया कि वह कोई असामान्य मांग कर रही हैं. इसके उलट, स्टाफ ने सामान्य तरीके से उनकी मदद की और कुछ ही मिनटों में काम पूरा कर दिया. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा छू गई.
मां ने कहा- ऐसे छोटे काम सफर आसान बना देते हैं
महिला ने भारतीय रेलवे और पैंट्री स्टाफ का शुक्रिया अदा किया. उनका कहना था कि लंबे सफर में ऐसी छोटी-छोटी मदद बहुत मायने रखती है. दो साल के बच्चे के साथ लगातार दो रात ट्रेन में रहना आसान नहीं होता. बच्चे के खाने को लेकर मां-बाप को पहले से कई चीजों की चिंता रहती है. ऐसे में अगर रास्ते में कोई अनजान व्यक्ति या स्टाफ बिना किसी परेशानी के मदद कर दे तो पूरा सफर थोड़ा आसान हो जाता है. उन्होंने रेलवे से जुड़े अधिकारियों को भी टैग करते हुए इस अनुभव के लिए धन्यवाद दिया.
सोशल मीडिया पर लोगों ने भी सुनाए अपने किस्से
इस महिला की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने रेलवे स्टाफ के साथ अपने अनुभव शेयर किए. कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें भी ट्रेन में इसी तरह की मदद मिल चुकी है. एक यूजर ने बताया कि उन्होंने भी ट्रेन में ऐसा ही किया था और रेलवे स्टाफ ने उनकी काफी मदद की. एक अन्य व्यक्ति ने लिखा कि स्टाफ ने उन्हें ट्रेन में अपनी मैगी बनाने तक की इजाजत दी थी. एक यात्री ने इससे भी दिलचस्प अनुभव शेयर किया. उसने बताया कि एक बार वह सुबह देर से उठा और नाश्ते का समय निकल चुका था. कोच के सुपरवाइजर ने उसे देख लिया और कहा कि वह अपनी पसंद का कुछ भी ऑर्डर कर सकता है, जिसे वे तैयार करवा देंगे.
यात्रियों को याद रहती हैं ऐसी छोटी बातें
ट्रेन का सफर अक्सर सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने तक सीमित नहीं रहता. रास्ते में मिलने वाले लोग, छोटी-छोटी बातचीत और अचानक मिलने वाली मदद कई बार पूरी यात्रा की याद बन जाती है. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ. महिला के लिए पैंट्री स्टाफ ने कोई बहुत बड़ा काम नहीं किया था. उन्होंने सिर्फ एक बच्चे के लिए उसकी मां के दिए हुए ओट्स तैयार कर दिए. लेकिन उस समय जब बच्चे के खाने की जरूरत थी, यही छोटी सी मदद उनके लिए काफी मायने रखती थी.
'भारत में ऐसी मेहमाननवाजी कम नहीं'
पोस्ट पर कुछ लोगों ने भारतीय रेलवे के स्टाफ की मदद करने की आदत की तारीफ की. एक यूजर ने लिखा कि विदेश घूमने वाले लोगों को पता है कि भारत में लोगों की मेहमाननवाजी कितनी अच्छी है और कई बार ऐसी मदद विदेशों में आसानी से नहीं मिलती. हालांकि, सोशल मीडिया पर शेयर किए गए व्यक्तिगत अनुभवों को हर ट्रेन या हर रेलवे कर्मचारी के सामान्य व्यवहार का प्रमाण नहीं माना जा सकता. फिर भी इस तरह की घटनाएं यात्रियों के अनुभव का एक सकारात्मक पहलू जरूर सामने लाती हैं.
बच्चे के लिए बने ओट्स ने यादगार बना दिया सफर
बिहार से बेंगलुरु तक का सफर इस मां के लिए सिर्फ एक लंबी ट्रेन यात्रा बनकर रह सकता था. लेकिन बच्चे के लिए खाना तैयार करने में मिली मदद ने उसे एक ऐसी याद में बदल दिया, जिसे वह शायद लंबे समय तक याद रखेंगी. कभी-कभी किसी की मदद करने के लिए बहुत बड़ा काम करने की जरूरत नहीं होती. सही समय पर किया गया छोटा सा काम भी सामने वाले के लिए बहुत बड़ी राहत बन जाता है. इस मां के लिए ट्रेन में 5 मिनट में तैयार किया गया ओट्स भी कुछ ऐसा ही था. यही वजह है कि उन्होंने इस छोटे से अनुभव को सोशल मीडिया पर शेयर किया और लोगों ने भी इसे खूब पसंद किया.