दुबई में पंडिताई से कितनी होती है कमाई? पूजा कराने वाले शास्त्री जी ने बताया पूरा हिसाब, VIDEO वायरल
दुबई में अच्छी कमाई और बेहतर जिंदगी की उम्मीद लेकर हर साल बड़ी संख्या में भारतीय पहुंचते हैं. लेकिन विदेश में रहने वाले हर शख्स की जिंदगी आसान नहीं होती. मध्य प्रदेश के जबलपुर से दुबई पहुंचे शास्त्री नीरज पंडित भी ऐसे ही दौर से गुजरे हैं. वह वहां भारतीय परिवारों के लिए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम कराते हैं. उनकी कोई तय सैलरी नहीं है. कभी उन्हें 200 दिरहम मिलते हैं तो कभी 500 दिरहम तक दक्षिणा मिल जाती है.
विदेश में नौकरी करने या अपना काम शुरू करने का सपना बहुत से लोग देखते हैं. उन्हें लगता है कि दूसरे देश में पहुंचते ही कमाई के रास्ते खुल जाएंगे और जिंदगी पहले से बेहतर हो जाएगी. लेकिन हकीकत कई बार उम्मीद से काफी अलग होती है.
दुबई में रहने वाले शास्त्री नीरज पंडित की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं. दुबई में वह भारतीयों और दूसरे श्रद्धालुओं के लिए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम कराते हैं. हाल ही में कंटेंट क्रिएटर जगदीश चावला ने उनसे बातचीत का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया. इस बातचीत में नीरज ने अपनी कमाई से लेकर दुबई में शुरुआती दिनों के संघर्ष तक के बारे में बताया है. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
कभी 200 तो कभी 500 दिरहम मिलते हैं
बातचीत के दौरान जगदीश ने नीरज से पूछा कि दुबई में पुजारी के तौर पर उनकी कितनी कमाई हो जाती है. इस पर उन्होंने बताया कि उन्हें कोई फिक्स सैलरी नहीं मिलती. उनकी कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि कितने पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यक्रम कराने का मौका मिलता है और दक्षिणा कितनी मिलती है. नीरज के अनुसार, कभी उन्हें 200 दिरहम मिलते हैं तो कभी 500 दिरहम तक मिल जाते हैं. भारतीय रुपये में यह करीब 5,000 से 13,000 रुपये के बीच बैठती है. हालांकि, यह किसी महीने की फिक्स इनकम नहीं है, बल्कि अलग-अलग मौकों पर मिलने वाली दक्षिणा है. इसका मतलब है कि उनकी आमदनी हर बार एक जैसी नहीं रहती. काम मिलने पर कमाई होती है और कम काम मिलने पर आमदनी भी घट सकती है.
जब शाम के खाने की भी रहती थी चिंता
नीरज ने बातचीत में अपने शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि दुबई पहुंचने के बाद उनके लिए सबसे मुश्किल समय वही था. उस दौरान आर्थिक हालात ऐसे थे कि सुबह खाना खाने के बाद शाम के खाने का इंतजाम कैसे होगा, इसकी चिंता सताती रहती थी. उन्होंने बताया कि कई बार सुबह कुछ खा लेने के बाद उनके मन में यही सवाल रहता था कि शाम को भोजन कैसे मिलेगा. विदेश में रहने का अनुभव उनके लिए आसान नहीं था. नीरज की यह बात बताती है कि किसी दूसरे देश में नई जिंदगी शुरू करना केवल नौकरी या कमाई का मामला नहीं होता. वहां खुद को जमाने, काम ढूंढने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
सिर्फ कमाई नहीं, लोगों को साथ रहने का संदेश
बातचीत के अंत में नीरज ने ऐसा संदेश दिया, जो उनकी कमाई की कहानी से भी आगे जाता है. उन्होंने कहा कि भारत और दूसरे देशों से आए लोगों को आपस में प्यार से रहना चाहिए. उनका कहना था कि जब भी कोई त्योहार आए तो सभी लोगों को मिलकर उसे मनाना चाहिए. उनके अनुसार, लोगों के बीच प्यार और आपसी समझ बनी रहनी चाहिए, चाहे वे किसी भी देश से आते हों. दुबई जैसे शहर में अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं. ऐसे में नीरज का यह संदेश आपसी मेलजोल और सम्मान की अहमियत को सामने रखता है.
वीडियो देखकर लोगों ने की तारीफ
जगदीश चावला ने यह वीडियो शेयर करते हुए बताया कि दुबई में बाहर से दिखने वाली चमक-दमक के पीछे कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने बेहतर भविष्य बनाने के लिए मुश्किल दौर का सामना किया है. उन्होंने लिखा कि नीरज की कहानी याद दिलाती है कि किसी इंसान की जिंदगी को सिर्फ उसकी मौजूदा हालत देखकर नहीं समझा जा सकता. उसके पीछे कई संघर्ष और अनुभव छिपे हो सकते हैं. जगदीश के अनुसार, जब उन्होंने नीरज से पूछा कि वह लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं, तो उनका जवाब सिर्फ पैसे या कामयाबी तक सीमित नहीं था. उन्होंने प्यार, सम्मान और मिल-जुलकर रहने की बात कही. सोशल मीडिया पर भी इस कहानी को लोगों ने पसंद किया. नीरज के संघर्ष और उनके विचारों को लेकर यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं. कई लोगों को उनकी यह बात खास लगी कि जिंदगी में मुश्किलें आने के बावजूद इंसान को दूसरों के प्रति प्यार और सम्मान बनाए रखना चाहिए.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)