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आज के समय में विदेश जाना बहुत से भारतीयों के लिए बेहतर करियर और अच्छी कमाई का जरिया बन गया है. कमल नंदा भी इसी उम्मीद के साथ भारत से कनाडा पहुंचे थे. उनके पास भारत में एक परमानेंट नौकरी थी और परिवार भी था, लेकिन करियर को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बड़ा फैसला लिया और कनाडा चले गए.
कनाडा पहुंचने के बाद हालांकि उन्हें तुरंत अपनी पसंद की नौकरी नहीं मिली. अपने स्किल्स के मुताबिक काम खोजने के साथ-साथ उन्हें खर्च चलाने के लिए फास्ट फूड चेन में रात की शिफ्ट करनी पड़ी. काम आसान नहीं था, लेकिन उस वक्त उनके पास इसे करने के अलावा ज्यादा ऑप्शन भी नहीं था.
कमल ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी शेयर करते हुए बताया कि फास्ट फूड रेस्टोरेंट में काम करने के दौरान एक घटना ने उन्हें अंदर तक परेशान कर दिया. एक रात रेस्टोरेंट में स्टाफ कम था. काम का दबाव ज्यादा था और ग्राहकों को इंतजार करना पड़ रहा था. एक ग्राहक करीब पांच मिनट इंतजार करने के बाद गुस्से में आ गया. उसने कमल के साथ बदतमीजी की और फिर उनके ऊपर ड्रिंक फेंक दी. कमल के लिए यह सिर्फ एक ग्राहक का गुस्सा नहीं था. उन्हें लगा कि वह जिस जिंदगी के लिए अपना देश और स्थिर नौकरी छोड़कर आए हैं, उसमें वह खुद को लगातार पीछे धकेल रहे हैं.
कमल ने बताया कि उस घटना के बाद उन्होंने खुद से कहा कि वह इस तरह का व्यवहार सहने के लिए यहां नहीं आए हैं. इसके बाद उन्होंने नौकरी खोजने को लेकर अपनी कोशिश और तेज कर दी. खास बात यह थी कि वह सिर्फ घर पहुंचकर या खाली समय में नौकरी नहीं तलाश रहे थे. अपनी रेस्टोरेंट शिफ्ट शुरू होने से पहले और ब्रेक के दौरान भी आवेदन करते थे. आखिरकार एक दिन उन्हें इंटरव्यू का मौका मिला. लेकिन समस्या यह थी कि उस समय वह रेस्टोरेंट में अपनी शिफ्ट कर रहे थे. कमल ने मौका हाथ से जाने नहीं दिया और लंच ब्रेक में ही इंटरव्यू दे डाला.
इंटरव्यू के बाद कमल को एक फ्रीलांस प्रोजेक्ट मिला. यह कोई ऐसी नौकरी नहीं थी, जिसमें शुरुआत से पक्की सैलरी या सिक्योरिटी मिल रही हो. फिर भी उन्होंने इसे मौका माना. उन्होंने फास्ट फूड की नौकरी तुरंत नहीं छोड़ी. कुछ समय तक दोनों काम साथ चलाए. यही दौर उनकी जिंदगी के सबसे थकाने वाले समय में से एक था. सुबह से शाम तक रेगुलर 9 से 5 का काम, फिर करीब एक घंटे का सफर करके रेस्टोरेंट पहुंचना और शाम करीब 6 बजे से रात 11 या 12 बजे तक काम करना. इसके बाद फिर गाड़ी चलाकर घर लौटना. करीब सात महीने तक कमल इसी रूटीन में चलते रहे.
लगातार मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा. जिस फ्रीलांस प्रोजेक्ट को उन्होंने एक छोटे मौके के तौर पर शुरू किया था, वही आगे चलकर फुल टाइम काम में बदल गया. इसके बाद कमल ने फास्ट फूड रेस्टोरेंट की नौकरी हमेशा के लिए छोड़ दी. उनके लिए यह सिर्फ एक नौकरी छोड़ना नहीं था. यह उस दौर से बाहर निकलना था, जिसमें वह अपने करियर के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे थे. लेकिन यहां से उनकी कहानी अचानक आसान नहीं हुई.
फास्ट फूड की नौकरी छोड़ने के बाद कमल एक नए मौके की तरफ बढ़े. उन्हें लगा कि अब चीजें सही दिशा में जा रही हैं. लेकिन यह नौकरी सिर्फ दो महीने चली. दो महीने बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. एक बार फिर उनके सामने वही सवाल खड़ा था कि अब आगे क्या किया जाए. उन्होंने इस दौर को अपने सफर का सबसे मुश्किल हिस्सा बताया. अगले 30 दिन उनके लिए काफी तनाव भरे रहे. लेकिन उन्होंने नौकरी की तलाश नहीं छोड़ी. इस बार नतीजा भी जल्दी सामने आया. सिर्फ 30 दिनों में कमल को 10 इंटरव्यू और 3 नौकरी के ऑफर मिले.
कमल का कहना है कि उनकी कहानी में कोई सीधी लाइन नहीं थी. एक नौकरी मिली, फिर छूटी. फ्रीलांस काम मिला, फिर वह फुल टाइम में बदला. एक मौका खत्म हुआ तो दूसरे की तलाश करनी पड़ी. उनके मुताबिक, ऐसे समय में सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठना काम नहीं करता. अपने स्किल्स को बेहतर करना, रिज्यूमे सुधारना, सही लोगों तक पहुंचना और उन नौकरियों के लिए आवेदन करना जरूरी है, जो आपकी क्षमता के हिसाब से हों. उनकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा यही है कि उन्होंने मुश्किल दौर में नौकरी की तलाश रोकने के बजाय अपनी कोशिश बढ़ाई.
कमल ने अपनी कहानी शेयर करते हुए दूसरे नौकरी तलाश रहे लोगों के लिए भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि सबसे पहले खुद से ईमानदार होना जरूरी है. अगर रिज्यूमे में कमी है तो उसे सुधारिए. अगर नेटवर्किंग कमजोर है तो उस पर काम कीजिए. अगर आप गलत तरह की नौकरियों में आवेदन कर रहे हैं तो अपना तरीका बदलिए. उन्होंने कहा कि जिंदगी कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, नौकरी तलाशने और खुद को बेहतर बनाने के लिए एक-दो घंटे निकालने चाहिए. हर चीज तुरंत नहीं मिलती. कई बार समय लगता है.
कमल की प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से B.Tech किया है. इसके बाद उन्होंने कनाडा के कोनेस्टोगा कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई की. उनके करियर की शुरुआत हरियाणा की एक कंपनी में वेब डेवलपर के तौर पर हुई थी. बाद में वह कनाडा पहुंचे और वहां अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया. आगे चलकर वह मार्केटिंग मैनेजर बने और अब कनाडा में अपना बिजनेस भी चला रहे हैं. इसका मतलब जिस व्यक्ति ने कभी 16 डॉलर प्रति घंटे की नौकरी में रातें बिताईं, वही आज अपने दम पर बिजनेस खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
कमल की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विदेश जाकर करियर बनाने की तस्वीर अक्सर सोशल मीडिया पर बहुत चमकदार दिखाई जाती है. अच्छी सैलरी, बड़ी गाड़ियां और बेहतर लाइफस्टाइल की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद शुरुआती संघर्ष की कहानियां कम दिखाई देती हैं. कमल ने अपनी कहानी में इसी हिस्से को सामने रखा है. एक स्थिर नौकरी छोड़कर दूसरे देश में जाना, फिर अपनी पसंद के काम के लिए संघर्ष करना, रात में फास्ट फूड रेस्टोरेंट में काम करना और इसके साथ लगातार नौकरी ढूंढते रहना आसान नहीं था. एक ग्राहक का ड्रिंक फेंकना उनके लिए बुरा अनुभव था, लेकिन उसी घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि अगर जिंदगी बदलनी है तो पहला कदम उन्हें खुद ही उठाना होगा.
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