'चकनाचूर हुआ अमेरिकन ड्रीम': IIT की डिग्री, दो दशक का अनुभव, फिर भी अमेरिका में नौकरी के लाले; अब भारत लौटने का विचार
अमेरिका में अच्छी नौकरी और बेहतर जिंदगी का सपना लेकर पहुंचे भारतीय मूल के देव गौतम ने आईटी इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा समय तक काम किया. आईआईटी कानपुर से पढ़ाई और अमेरिका की यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बावजूद आज उनके सामने नौकरी का संकट आ गया है. करीब दो साल से फुल टाइम नौकरी की तलाश कर रहे देव अब छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे हैं.
अमेरिका में लंबे समय तक काम करने के बाद अचानक नौकरी का संकट खड़ा हो जाए, तो मुश्किल सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रहती. रहने का खर्च, हर महीने के बिल और आगे की जिंदगी को लेकर चिंता भी बढ़ने लगती है. देव गौतम आज कुछ ऐसे ही हालात से गुजर रहे हैं.
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, देव अमेरिका के डलास में एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे. सितंबर 2024 में उनके सामने ऐसी स्थिति आई, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. उन्हें बताया गया कि नौकरी जारी रखने के लिए दूसरे राज्य में जाना होगा. देव ने वहां जाने के बजाय नौकरी छोड़ने का फैसला किया. उन्हें उम्मीद थी कि अपने लंबे अनुभव के दम पर वह जल्द ही किसी दूसरी कंपनी में काम ढूंढ लेंगे. लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि नई नौकरी की तलाश इतनी लंबी खिंच जाएगी.
आईआईटी कानपुर से पढ़ाई, अमेरिका से पीएचडी
देव गौतम की पढ़ाई और काम का अनुभव किसी भी आईटी प्रोफेशनल के लिए बड़ी बात मानी जा सकती है. उन्होंने आईआईटी कानपुर से फिजिक्स में एमएससी की. इसके बाद अमेरिका की स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अलग-अलग आईटी कंपनियों में काम किया और इंडस्ट्री में 20 साल से ज्यादा का अनुभव हासिल किया. इतने लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जरूरत पड़ने पर दूसरी कंपनी में नौकरी मिलना बहुत मुश्किल नहीं होगा. लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद उनका सामना एक अलग ही हकीकत से हुआ. उन्होंने लिंक्डइन पर आवेदन किए, लोगों से संपर्क किया और कई कंपनियों में इंटरव्यू भी दिए. इसके बावजूद उन्हें फुल टाइम नौकरी का ऑफर नहीं मिला.
उम्र और लंबे गैप ने बढ़ाई मुश्किल
देव के लिए नौकरी की तलाश धीरे-धीरे थकाने वाला अनुभव बन गई. एक के बाद एक आवेदन करने और इंटरव्यू देने के बाद भी जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो उनका भरोसा कमजोर पड़ने लगा. रिपोर्ट के अनुसार, उम्र, काम में लंबा गैप और आईटी इंडस्ट्री के बदलते हालात ने नई नौकरी मिलने की उम्मीद को और मुश्किल बना दिया. अंत में उन्होंने नियमित रूप से नौकरी के लिए आवेदन करना भी लगभग बंद कर दिया. यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब उन्हें अपने अनुभव का इस्तेमाल करके स्थिर कमाई की जरूरत है. लेकिन कंपनियों से जवाब नहीं मिलने के कारण उनके सामने आगे का रास्ता साफ नहीं दिख रहा.
नौकरी नहीं मिली तो छोटे-मोटे काम करने लगे
जब बचत कम होने लगी, तो देव ने पैसे कमाने के दूसरे रास्ते तलाशने शुरू किए. उन्होंने कुछ समय डे ट्रेडिंग के जरिए पैसे कमाने की कोशिश की, लेकिन इससे भी उन्हें खास फायदा नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने उबर, डोरडैश और वॉलमार्ट स्पार्क जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे-मोटे काम करना शुरू किया. इनसे कुछ कमाई हो जाती है, लेकिन यह उनके पहले के करियर और नियमित नौकरी का विकल्प नहीं बन पाई है. देव के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उन्हें हर महीने के खर्च पूरे करने हैं, जबकि कमाई का कोई स्थायी जरिया नहीं है. लंबे समय तक अच्छी नौकरी करने के बाद इस तरह गुजारा करना उनके लिए आसान नहीं रहा.
बचत खत्म हुई तो बिल भरना भी मुश्किल
देव ने बताया कि नौकरी तलाशने के दौरान उनकी बचत धीरे-धीरे खत्म हो गई. घर का किराया और दूसरे बिल चुकाना मुश्किल होने लगा. खर्च चलाने के लिए उन्हें क्रेडिट कार्ड से उधार भी लेना पड़ा. डलास में किराया ज्यादा होने के कारण वह सस्ते घर में शिफ्ट होना चाहते हैं. लेकिन इसमें भी एक परेशानी है. नए अपार्टमेंट में किराएदार बनने के लिए आमतौर पर नौकरी या नियमित कमाई का सबूत देना पड़ता है. मौजूदा हालात में उनके लिए यह साबित करना आसान नहीं है कि वह हर महीने किराया दे सकेंगे. मतलब, जिस खर्च को कम करने के लिए वह घर बदलना चाहते हैं, उसी के लिए जरूरी शर्तें उनके रास्ते में आ रही हैं.
GoFundMe से मिले 9,000 डॉलर भी हुए खर्च
आर्थिक परेशानी बढ़ने पर देव ने लोगों से मदद मांगने के लिए जनवरी में GoFundMe पर एक अभियान शुरू किया. इसके जरिए उन्हें करीब 9,000 डॉलर मिले. इस पैसे से उन्होंने अपने जरूरी बिल चुकाए, लेकिन इससे उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका. अब उनके सामने सवाल है कि आगे खर्च कैसे चलाया जाए. लोगों से बार-बार आर्थिक मदद मांगना भी उनके लिए आसान नहीं है. फिलहाल छोटे-मोटे कामों से होने वाली कमाई के सहारे वह अपनी जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत लौटने का विचार, लेकिन अभी फैसला नहीं
देव ने भारत लौटने के विकल्प पर भी विचार किया है. हालांकि, वह जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहते. लंबे समय तक अमेरिका में रहने और काम करने के बाद वापस लौटना उनके लिए एक बड़ा बदलाव होगा. उन्हें उम्मीद है कि जनवरी में 62 साल के होने के बाद वह अमेरिकी सोशल सिक्योरिटी से जुड़ी पात्रता हासिल कर सकेंगे. इससे उनकी आर्थिक स्थिति को कुछ सहारा मिल सकता है. हालांकि, उन्हें मिलने वाला पैसा और उससे होने वाली राहत उनकी पात्रता और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगी. देव की कहानी एक ऐसे प्रोफेशनल की मुश्किलें दिखाती है, जिसने पढ़ाई और अनुभव के दम पर अपना करियर बनाया, लेकिन अब नौकरी के बिना आर्थिक दबाव झेल रहा है.