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डॉलर में कमाई, फिर भी नहीं बचता पैसा: H-1B वीजा वाले भारतीय ने बताया अमेरिका में 'करोड़पति' बनने का सीक्रेट फार्मूला

अमेरिका में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिल जाए तो जिंदगी आसान लग सकती है, लेकिन वहां पैसा बचाना उतना आसान नहीं होता. किराया, टैक्स, कार, इंश्योरेंस और रोजमर्रा के खर्च हर महीने कमाई का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं. ऐसे माहौल में H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय प्रितेश जगानी ने अपनी फाइनेंशियल जर्नी शेयर की है. उन्होंने बताया कि उसने करोड़पति बनने तक के सफर को कैसे पूरा किया.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Sep 27, 2026, 11:46 AM IST | Updated: Sep 27, 2026, 02:09 PM IST
Image Credit: प्रतीकात्मक AI इमेज
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अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले बहुत से भारतीयों के दिमाग में सबसे पहले बड़ी सैलरी का ख्याल आता है. भारत के मुकाबले डॉलर में मिलने वाली कमाई काफी ज्यादा दिखाई देती है. लेकिन अमेरिका पहुंचने के बाद तस्वीर का दूसरा हिस्सा भी सामने आता है.

यहां घर का किराया, कार, हेल्थ इंश्योरेंस, टैक्स, बिजली-पानी और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च कम नहीं होता. कई बार अच्छी कमाई के बावजूद महीने के आखिर में सेविंग्स उम्मीद से काफी कम रह जाती हैं. प्रितेश जगानी की कहानी भी इसी हकीकत के बीच शुरू होती है.

करोड़पति बनने के लिए नहीं था कोई शॉर्टकट

H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले प्रितेश ने सोशल मीडिया पर अपनी फाइनेंशियल जर्नी के बारे में बताया. उनकी कहानी में किसी अचानक मिले बड़े पैसों, लॉटरी या एक शानदार इन्वेस्टमेंट का जिक्र नहीं है. इसके बजाय उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दिया. उनके मुताबिक, वेल्थ बनाने का रास्ता एक लंबे सफर जैसा रहा, जिसमें कमाई बढ़ाना, खर्च समझना, सेविंग्स करना और निवेश को लगातार जारी रखना शामिल था. इसका मतलब उनके लिए करोड़पति बनने का मतलब सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं था. असली बात यह थी कि कमाए गए पैसे में से कितना बचाया और उसे भविष्य के लिए कैसे लगाया.

पहला फोकस रहा कमाई बढ़ाने पर

प्रितेश की कहानी में सबसे दिलचस्प हिस्सा उनकी इनकम बढ़ाने की कोशिश है. उन्होंने सिर्फ यह सोचकर अपना प्लान नहीं बनाया कि खर्च कम कर दिया जाए तो पैसा अपने आप जमा होता रहेगा. उन्होंने अपनी स्किल्स पर काम किया और बेहतर मौके तलाशे. इसी कोशिश में उन्होंने नौकरी भी बदली. बेहतर सैलरी वाली नौकरी मिलने के साथ उनकी इनकम में बढ़ोतरी हुई. लेकिन यहां एक और बात महत्वपूर्ण थी. कमाई बढ़ने के बाद उन्होंने अपनी पूरी लाइफस्टाइल को उसी रफ्तार से महंगा नहीं किया. यानी सैलरी बढ़ी तो खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ जाए, इस चक्कर से बचने की कोशिश की.

 

 

सैलरी बढ़ी, लेकिन खर्च नहीं उड़ाया

अमेरिका में ज्यादा कमाने के साथ एक बड़ा खतरा लाइफस्टाइल इंफ्लेशन का होता है. इसका सीधा मतलब है कि कमाई बढ़ते ही इंसान अपनी जरूरतों के साथ-साथ अपनी इच्छाओं पर भी ज्यादा खर्च करने लगता है. आज थोड़ी ज्यादा सैलरी मिली तो महंगा घर, नई कार, ज्यादा बाहर खाना और महंगी छुट्टियां. फिर कुछ समय बाद बढ़ी हुई कमाई भी पहले जितनी कम लगने लगती है. प्रितेश ने इसी स्थिति से बचने पर जोर दिया. उन्होंने अपनी बढ़ी हुई इनकम का पूरा फायदा सिर्फ खर्च बढ़ाने में नहीं लगाया. कमाई का एक हिस्सा सेविंग्स और निवेश की तरफ जाता रहा.

पहले बनाया इमरजेंसी फंड

वेल्थ बनाने की उनकी रणनीति में इमरजेंसी फंड भी अहम हिस्सा रहा. प्रितेश के मुताबिक, उन्होंने पहले करीब 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर पैसा अलग रखने पर ध्यान दिया. यह फंड इसलिए जरूरी होता है ताकि नौकरी जाने, अचानक मेडिकल खर्च आने या किसी दूसरी बड़ी परेशानी की स्थिति में निवेश तोड़ने या उधार लेने की जरूरत न पड़े. अमेरिका जैसे देश में जहां कई खर्च काफी बड़े हो सकते हैं, वहां इमरजेंसी सेविंग्स का महत्व और बढ़ जाता है. इसलिए उन्होंने लंबे समय की फाइनेंशियल प्लानिंग शुरू करने से पहले अपनी बेसिक सिक्योरिटी मजबूत की.

हाई इंटरेस्ट वाले कर्ज को किया कंट्रोल

सेविंग्स बनाने के साथ प्रितेश ने अपने कर्ज और क्रेडिट से जुड़े मामलों को भी समझने की कोशिश की. खासकर ऐसा कर्ज, जिस पर ज्यादा ब्याज देना पड़ता है, उसे कम करना फाइनेंशियल प्लानिंग का जरूरी हिस्सा रहा. इसके अलावा उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स से जुड़े फैसलों को भी नजरअंदाज नहीं किया. अमेरिका में कमाई और खर्च के बीच टैक्स का असर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. इसलिए सिर्फ बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी देखना उनके लिए पूरी तस्वीर नहीं थी.

ज्यादा कमाई का मतलब ज्यादा खर्च नहीं

प्रितेश की कहानी से जो बात सबसे साफ निकलकर आती है, वह है कमाई और खर्च के बीच संतुलन. अगर किसी की सैलरी बढ़ती है और उसके साथ हर महीने का खर्च भी बढ़ता चला जाता है तो वेल्थ बनाना मुश्किल हो सकता है. इसके उलट, अगर इनकम बढ़ने के बाद खर्च को एक सीमा में रखा जाए और अतिरिक्त पैसे का कुछ हिस्सा सेविंग्स और निवेश में जाता रहे, तो समय के साथ बड़ा फंड तैयार हो सकता है. यही तरीका प्रितेश ने अपनी फाइनेंशियल जर्नी में अपनाने की बात बताई है.

H-1B वालों के लिए क्यों खास है कहानी?

प्रितेश की कहानी अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों के बीच इसलिए चर्चा में आ सकती है क्योंकि H-1B वीजा पर अमेरिका जाने के बाद अक्सर लोगों का ध्यान सैलरी पर ज्यादा रहता है. डॉलर में मिलने वाली कमाई पहली नजर में बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन उसके साथ वहां का खर्च भी डॉलर में ही होता है. परिवार साथ है तो घर और हेल्थकेयर का खर्च बढ़ सकता है. बच्चों की पढ़ाई, कार और दूसरे खर्च अलग हैं. ऐसे में सिर्फ ज्यादा कमाना काफी नहीं है. पैसा कहां जा रहा है, कितना बच रहा है और भविष्य के लिए कितना लगाया जा रहा है, यह भी उतना ही जरूरी हो जाता है.

करोड़पति बनने की कहानी में सबसे बड़ा सबक

प्रितेश जगानी की कहानी को किसी फाइनेंशियल फॉर्मूले की तरह नहीं देखा जा सकता. उन्होंने खुद जो तरीका अपनाया, वह उनकी परिस्थितियों और उनकी कमाई से जुड़ा हुआ है. हर व्यक्ति की सैलरी, टैक्स, शहर, किराया, परिवार और खर्च अलग होते हैं. फिर भी उनकी जर्नी में एक सीधी बात समझ आती है. ज्यादा कमाई अपने आप किसी को अमीर नहीं बनाती. कमाई बढ़ाने के साथ अगर खर्च पर नजर रखी जाए, इमरजेंसी के लिए पैसा अलग रखा जाए और लंबे समय तक सेविंग्स व निवेश की आदत बनी रहे, तो आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे मजबूत हो सकती है. 

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी फैसले से पहले संबंधित आधिकारिक विभाग से संपर्क जरूर करें.)

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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