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जमीन की दुनिया छोड़, 42 फीट की नाव पर बसाया संसार: पत्नी-बेटी संग 4 साल से समंदर में रह रहा पूर्व नौसैनिक; Video वायरल

अच्छी नौकरी, अपना घर और बेटा-बेटी की पढ़ाई के साथ एक सिक्योर जिंदगी. ज्यादातर परिवार इसी रास्ते को बेहतर मानते हैं. लेकिन पूर्व नौसैनिक गौरव और उनकी पत्नी वैदेही ने जिंदगी के लिए बिल्कुल अलग रास्ता चुना. उन्होंने नौकरी और जमीन पर बसी अपनी जिंदगी छोड़कर 42 फीट की सेलबोट को घर बना लिया. बेटी केया के साथ परिवार करीब चार साल से समुद्र पर रह रहा है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 06, 2026, 09:33 AM IST | Updated: Oct 06, 2026, 09:50 AM IST
Image Credit: @thereevaproject | समुद्र पर रहने वाला भारतीय परिवार!
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कभी ना कभी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ भी आता है, जब इंसान को तय करना पड़ता है कि उसे वही जिंदगी जीनी है, जिसको समाज सही मानता है या फिर अपने मन की जिंदगी चुननी है. गौरव और वैदेही के लिए भी यह फैसला आसान नहीं था. उनके पास घर था, नौकरी थी और एक परिवार था. फिर भी दोनों ने जमीन पर अपनी बसी-बसाई जिंदगी को पीछे छोड़ने का फैसला कर लिया.

भारतीय नौसेना में करीब 30 साल बिताने वाले गौरव ने 2022 में अपनी पुरानी जिंदगी से विदा ली. इसके बाद परिवार ने जो फैसला किया, वह किसी आम फैमिली प्लान जैसा बिल्कुल नहीं था. उन्होंने अपनी ज्यादातर चीजें बेच दीं और समुद्र में रहने के लिए एक सेलबोट खरीद ली.

2022 में नाव पर शुरू हुई नई जिंदगी

वैदेही के मुताबिक, एक अक्टूबर 2022 को वह अपने पति गौरव और बेटी केया के साथ मलेशिया के पेनांग पहुंचे और वहीं से उनकी नई जिंदगी शुरू हुई. उनका नया घर कोई अपार्टमेंट, बंगला या विला नहीं था. यह 42 फीट लंबी सेलबोट थी, जिसका नाम उन्होंने 'रीवा' रखा. शुरुआत में परिवार को खुद नहीं पता था कि यह फैसला उन्हें कहां लेकर जाएगा. वैदेही बताती हैं कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है. लेकिन वक्त बीतता गया और चार साल बाद भी परिवार उसी सफर पर है. वे समुद्र में रहते हैं, सेलिंग करते हैं, नई जगहों तक पहुंचते हैं और अपने अनुभव सोशल मीडिया पर लोगों के साथ शेयर करते हैं.

बेटी को दुनिया किताबों से नहीं, सफर से दिखानी थी

गौरव और वैदेही के इस फैसले के पीछे सिर्फ घूमने की इच्छा नहीं थी. इसमें उनकी बेटी केया भी एक बड़ी वजह थी. दोनों चाहते थे कि उनकी बेटी दुनिया को सिर्फ किताबों, तस्वीरों और स्कूल की क्लास में बैठकर न समझे, बल्कि खुद अलग-अलग जगहों को देखे. वैदेही ने बताया कि उन्होंने केया को समुद्र के बीच बड़ा करने और नाव पर जिंदगी जीने का फैसला किया. जहां ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों के लिए ज्यादा स्थिर और सुरक्षित जिंदगी चाहते हैं, वहीं उन्होंने इसका उल्टा रास्ता चुना. उनका मानना था कि दुनिया को करीब से देखना और अलग परिस्थितियों में खुद को ढालना भी बच्चे की परवरिश का एक हिस्सा हो सकता है.

 

 

सबकुछ बेचकर सिर्फ 120 किलो सामान रखा

इस सफर की सबसे बड़ी कीमत सिर्फ पैसे में नहीं थी. परिवार को अपनी जरूरतें कम करनी पड़ीं. वैदेही के अनुसार, उन्होंने अपनी लगभग सभी चीजें बेच दीं. जमीन पर उनके पास जो कुछ बचा, उसका कुल वजन करीब 120 किलो था. सोचिए, जिस घर में सालों तक सामान इकट्ठा होता रहता है, उसे छोड़कर सिर्फ उतनी चीजों के साथ निकल जाना, जिन्हें नाव में रखा जा सके. कपड़े, जरूरी सामान और काम की चीजें. बस इतना ही अब उनकी जिंदगी का हिस्सा था. वैदेही कहती हैं कि लोगों को अक्सर लगता है कि समुद्र में सेलिंग सीखना सबसे मुश्किल काम था. लेकिन उनके लिए असली चुनौती कम सामान में जीना सीखना रही.

42 फीट की रीवा में ही किचन और बाथरूम

'रीवा' देखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन परिवार की पूरी जिंदगी इसी में समाई हुई है. नाव में दो छोटे केबिन, बैठने की जगह, गैली यानी छोटी रसोई और एक छोटा वॉशरूम है. यह ऐसा घर है, जहां हर इंच की अपनी कीमत है. यहां अलमारी में सामान भरने के लिए अलग कमरा नहीं है. हर चीज को रखने की जगह पहले से तय करनी पड़ती है. खाना कितना रखना है, पानी और दूसरी जरूरतों का इस्तेमाल कैसे करना है, इसका हिसाब रखना पड़ता है. जमीन पर अगर कोई सामान खत्म हो जाए तो ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकता है. लेकिन समुद्र के बीच ऐसा नहीं होता. यहां जरूरत की चीजें पहले से सोचकर रखनी पड़ती हैं.

बिजली सूरज और हवा से, लेकिन मौसम सबसे बड़ा बॉस

परिवार की सेलबोट में बिजली के लिए सूरज और हवा की ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है. इससे फ्रिज, फ्रीजर, लैपटॉप और नेविगेशन से जुड़े जरूरी गैजेट चलाए जाते हैं. लेकिन समुद्र पर जिंदगी सिर्फ आजादी का दूसरा नाम नहीं है. यहां मौसम का मिजाज पूरा प्लान बदल सकता है. कब निकलना है, कहां रुकना है और किस रास्ते से आगे बढ़ना है, इन फैसलों में मौसम की बड़ी भूमिका होती है. वैदेही ने अपने सोशल मीडिया पर बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हुए परिवार हजारों नॉटिकल मील की यात्रा कर चुका है. हर जगह के अपने नियम और चुनौतियां हैं. पासपोर्ट, बॉर्डर और दूसरे देशों में पहुंचने की औपचारिकताएं भी इस जिंदगी का हिस्सा हैं.

कुछ रातें समुद्र असली ताकत दिखा देता है

नाव पर जिंदगी इंस्टाग्राम वीडियो जितनी खूबसूरत ही हो, ऐसा जरूरी नहीं. कुछ दिन बेहद शानदार होते हैं तो कुछ दिन मुश्किल भी आते हैं. वैदेही ने बताया कि समुद्र पर रहने के दौरान ऐसे पल भी आते हैं, जब उन्हें खुद से सवाल करना पड़ता है कि क्या उन्होंने सही फैसला लिया. लेकिन अगले ही पल कोई खूबसूरत जगह, शांत समुद्र या नया अनुभव इस फैसले को फिर सही महसूस करा देता है. केया को भी परिवार ने इसी माहौल में बड़ा होते देखा है. उसके लिए समुद्र सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि उसके रोज के आसपास का माहौल बन चुका है.

गौरव ने क्यों छोड़ी Navy की नौकरी?

गौरव का नौसेना से जुड़ा सफर करीब 30 साल का रहा. इतने लंबे करियर के बाद नौकरी छोड़कर बिल्कुल अलग जिंदगी चुनना किसी बड़े बदलाव से कम नहीं था. एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपनी इस जिंदगी के बारे में बात करते हुए कहा कि नौसेना ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. अनुशासन, मुश्किल परिस्थितियों में काम करना और सीमित संसाधनों के साथ रास्ता निकालना. यही सीख उनके नए जीवन में भी काम आई. गौरव का कहना था कि उन्होंने नौसेना की जिंदगी इसलिए नहीं छोड़ी कि वह अच्छी नहीं थी. उनके लिए वह जिंदगी शानदार थी. लेकिन वह उससे आगे कुछ अलग करना चाहते थे. समुद्र पर जाने के बाद उन्होंने नौसेना से मिली सीख को अपनी नई जिंदगी में इस्तेमाल किया.

चार साल बाद भी सफर जारी है

एक अक्टूबर 2022 से शुरू हुई इस कहानी को अब करीब चार साल हो चुके हैं. जमीन पर रहने वाले परिवार के लिए चार साल का वक्त एक घर, नौकरी, स्कूल और रोजमर्रा की जिंदगी में गुजर सकता है. लेकिन गौरव, वैदेही और केया के लिए यही समय समुद्र, नाव और सफर के बीच बीता है. उन्होंने अपना घर छोटा जरूर किया, लेकिन दुनिया को देखने का दायरा बड़ा कर लिया. उनके पास पहले शायद ज्यादा सामान था, अब कम है. पहले जिंदगी जमीन पर तय थी, अब मौसम और समुद्र उसके फैसले में शामिल हैं. शायद यही इस परिवार की कहानी की सबसे खास बात है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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