शादी के बाद हर लड़की अपनी नई जिंदगी को लेकर कई सपने देखती है. नए घर में परिवार के साथ रहना, छोटी-छोटी खुशियां बांटना और धीरे-धीरे अपनी दुनिया बसाना. लेकिन चीन की शू की जिंदगी में शादी के कुछ ही समय बाद ऐसा हादसा हुआ, जिसने सब कुछ बदल दिया.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2009 में शादी के करीब एक महीने बाद शू को एक ट्रक ने टक्कर मार दी. इस हादसे में उसके दिमाग को गंभीर चोट पहुंची. वह ऐसी हालत में पहुंच गई कि खुद से सामान्य जिंदगी जीना तो दूर, अपनी जरूरतें भी पूरी नहीं कर सकती थी. मेडिकल की भाषा में कहें तो वह कोमा में चली गई थी.
शू के साथ हुए हादसे के बाद परिवार के सामने सबसे मुश्किल चुनौती उसकी देखभाल की थी, क्योंकि ऐसे हाल में शू के साथ हर समय किसी न किसी का रहना जरूरी था. ऐसे में उसकी सास शुआन फेंगयिंग ने बहू की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली. उस वक्त शुआन की उम्र करीब 51 साल थी. अब वह 68 साल की हैं और इतने साल बीत जाने के बाद भी बहू की देखभाल में लगी हुई हैं. शुआन का कहना है कि शू सिर्फ उनके बेटे की पत्नी नहीं है, बल्कि उनकी अपनी बेटी जैसी है. शादी के बाद वह परिवार का हिस्सा बनी और अब उसे मुश्किल हालत में छोड़ देने का सवाल ही नहीं उठता.
शू की देखभाल करना कोई आसान काम नहीं था. हादसे के बाद लंबे समय तक उसकी हालत ऐसी रही कि उसे अपने रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरे लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था. शुआन उसे खाना एक-एक चम्मच करके खिलाती थीं. एक बार का खाना खिलाने में ही करीब एक घंटा लग जाता था. इसके बावजूद वह जल्दबाजी नहीं करती थीं और पूरी सावधानी से बहू को खाना खिलाती थीं. बिस्तर पर लगातार पड़े रहने से शरीर पर घाव होने का खतरा रहता है. इससे बचाने के लिए शुआन दिन में 10 से ज्यादा बार बहू की पोजिशन बदलती थीं. जरूरत पड़ने पर उसकी सफाई करतीं और हाथ-पैरों की मालिश भी करती थीं.
शू की हालत में सुधार लाने के लिए शुआन ने केवल उसकी शारीरिक जरूरतों का ध्यान नहीं रखा. वह लगातार उससे बातें भी करती थीं. कभी परिवार में हुई किसी घटना के बारे में बतातीं, तो कभी गांव की खबरें सुनातीं. शू को पसंद आने वाले गाने भी चलाती थीं. कई बार वह उसका नाम लेकर पुकारतीं, जिससे वह किसी तरह प्रतिक्रिया दे सके. यह सिलसिला सालों तक चलता रहा. बाहर से देखने वाले के लिए शायद यह रोज का एक जैसा काम रहा हो, लेकिन शुआन के लिए हर छोटी प्रतिक्रिया एक नई उम्मीद लेकर आती थी.
लंबे समय तक गंभीर हालत में रहने के बाद शू में धीरे-धीरे कुछ सुधार दिखाई देने लगा. वह पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक होने लगी, हालांकि हादसे से दिमाग को हुए नुकसान का असर अब भी बना हुआ है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उसकी समझने और सोचने की क्षमता करीब चार साल के बच्चे के स्तर जैसी है. मतलब, इसमें सुधार होने के बावजूद उसे रोजमर्रा की जिंदगी में अब भी मदद की जरूरत पड़ती है. शुआन ने भी उम्मीद नहीं छोड़ी. वह बहू को रिहैबिलिटेशन यानी दोबारा चलने-फिरने और जरूरी काम सीखने की प्रक्रिया में मदद करती रहीं. उसे चलने की प्रैक्टिस करातीं और दूसरे अभ्यासों में साथ देतीं.
सालों की देखभाल के बाद शू अब कुछ शब्द बोल सकती है. इतना ही नहीं, उसने अपने लिए साधारण खाना बनाना भी सीख लिया है. उसके परिवार के लिए ये छोटे बदलाव नहीं, बल्कि लंबी लड़ाई के बाद मिली बड़ी राहत हैं. जिस महिला को कभी हर छोटी जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, उसका धीरे-धीरे अपने काम खुद करने की ओर बढ़ना परिवार के लिए खुशी की बात है. शुआन के लिए बहू का खाना बना पाना खास मायने रखता है. उन्हें इस बात से सुकून मिलता है कि अगर भविष्य में वह खुद उसकी देखभाल करने के लिए मौजूद नहीं रहीं, तो भी शू कम से कम अपने लिए कुछ खाने का इंतजाम कर सकेगी.
शुआन की उम्र अब 68 साल हो चुकी है. इतने लंबे समय तक किसी की देखभाल करना शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह से थका देने वाला काम है. लेकिन उनकी चिंता सिर्फ आज तक सीमित नहीं है. वह यह भी सोचती हैं कि उनके बाद शू का क्या होगा. उन्होंने अपने बेटे से कहा है कि अगर वह दुनिया में नहीं रहीं, तो वह अपनी पत्नी का ध्यान रखे. शुआन चाहती हैं कि उनके जाने के बाद भी शू को अकेला न छोड़ दिया जाए और उसकी देखभाल जारी रहे. यह बात दिखाती है कि उनके लिए बहू की जिंदगी और उसका भविष्य कितनी अहमियत रखता है.
शुआन फेंगयिंग की कहानी चीन के शानदोंग प्रांत के छिंगयुन काउंटी से सामने आई है. उनकी बहू शू की जिंदगी एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई थी, लेकिन परिवार के साथ और लगातार देखभाल ने उसके जीवन में कुछ सुधार की उम्मीद बनाए रखी है. शुआन की सबसे बड़ी इच्छा है कि बहू की हालत में आगे भी सुधार होता रहे. वह जानती हैं कि रास्ता आसान नहीं है, लेकिन इतने सालों में मिली छोटी-छोटी कामयाबियों ने उन्हें आगे बढ़ने की वजह दी है. यह कहानी सिर्फ एक सास के अपनी बहू की सेवा करने की नहीं है. यह उस रिश्ते की भी मिसाल है, जिसमें जिम्मेदारी किसी रस्म या मजबूरी तक सीमित नहीं रहती. शुआन ने शू को अपनी बेटी माना और मुश्किल के सबसे लंबे दौर में उसका साथ निभाया.