चार महीने का बच्चा, सुबह का वक्त और बैकग्राउंड में हनुमान चालीसा. अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहने वाली चीनी बिजनेसवुमन सारा जेन हो की सुबह इन दिनों कुछ इसी तरह शुरू होती है. सारा ने अपने बच्चे के साथ सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि वह रोजाना बच्चे को हनुमान चालीसा सुनाती हैं.
सारा का कहना है कि उनका बच्चा जब चिड़चिड़ा होता है या रोने लगता है तो वह उसे लंबे समय तक रोने के लिए नहीं छोड़तीं. पहले उसे गोद में लेकर शांत करने की कोशिश करती हैं. जब बच्चा फिर भी नहीं मानता तो वह हनुमान चालीसा चला देती हैं.
सारा ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि हनुमान चालीसा सुनाने का बच्चे पर काफी शांत असर दिखाई देता है. सारा की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के मुताबिक, जैसे ही इसे बजाया जाता है, बच्चा करीब 5 सेकंड में शांत हो जाता है और लगभग 2 मिनट में सो जाता है. हालांकि, यह सारा का अपना अनुभव और दावा है. इसे बच्चों को शांत करने का वैज्ञानिक रूप से साबित तरीका नहीं माना जा सकता. बच्चे अलग-अलग आवाजों, संगीत और माहौल पर अलग तरह से प्रतिक्रिया दे सकते हैं. सारा का कहना है कि वह बच्चे को रो-रोकर खुद शांत होने देने के तरीके में भरोसा नहीं करतीं. उनके मुताबिक, शुरुआती महीनों में बच्चे को लगातार भावनात्मक सुरक्षा की जरूरत होती है और इसलिए वह उसके रोने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की कोशिश करती हैं.
सारा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने बच्चे 'जे' के साथ तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि उन्हें हनुमान चालीसा के बारे में एक भारतीय दोस्त ने बताया था. दोनों की मुलाकात अमेरिका के मशहूर बर्निंग मैन फेस्टिवल में हुई थी. बर्निंग मैन नेवाडा के ब्लैक रॉक डेजर्ट में आयोजित होने वाला एक बड़ा सांस्कृतिक फेस्टिवल है. दुनियाभर से लोग इसमें शामिल होने पहुंचते हैं. सारा के मुताबिक, इसी दौरान उन्हें हनुमान चालीसा के बारे में पता चला और बाद में उन्होंने इसे अपने बच्चे की रूटीन का हिस्सा बना लिया.
सारा की पोस्ट सिर्फ हनुमान चालीसा तक सीमित नहीं थी. उन्होंने अपने मां बनने के सफर और बच्चे की परवरिश से जुड़ी कई बातें भी शेयर कीं. सारा के मुताबिक, उन्होंने 40 साल की उम्र में सरोगेसी की मदद से अपने बच्चे को जन्म दिया. उन्होंने बताया कि बच्चा फिलहाल सरोगेट मदर का दूध पी रहा है. इसी वजह से वह सरोगेट मदर को मूंगफली और सोया मिल्क भेज रही हैं. उनका मानना है कि इससे बच्चे को आगे चलकर इन चीजों की आदत डालने और एलर्जी से बचाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, सारा खुद भी मानती हैं कि उनके इस तरीके के पीछे उनकी अपनी समझ है और उन्हें यह पता नहीं कि इसका साइंटिफिक आधार कितना मजबूत है.
सारा अपने बच्चे की परवरिश को लेकर काफी प्रयोग करती नजर आती हैं. उनका कहना है कि वह बच्चे को अलग-अलग चीजों के संपर्क में लाने की कोशिश करती हैं. इसके लिए वह उसे दोस्तों और पड़ोसियों के कुत्तों के पास भी ले जाती हैं. सारा का मानना है कि बचपन से अलग-अलग वातावरण और चीजों के संपर्क में आने से बच्चे को आगे चलकर एलर्जी से निपटने में मदद मिल सकती है. हालांकि, बच्चों को जानवरों के संपर्क में लाने से जुड़े किसी भी फैसले में सुरक्षा और डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है.
सारा ने यह भी बताया कि वह बच्चे को रोजाना बगीचे में ले जाती हैं और कुछ समय जमीन के संपर्क में रखने की कोशिश करती हैं. इसे आमतौर पर 'ग्राउंडिंग' या 'अर्थिंग' कहा जाता है. उन्होंने दावा किया कि बच्चे के पैरों में 2 लाख से ज्यादा नर्व एंडिंग्स होती हैं और जमीन के संपर्क से उसके न्यूरोलॉजिकल और शारीरिक विकास में मदद मिलती है. हालांकि, इस तरह के दावों को लेकर वैज्ञानिक सबूत सीमित हैं. इसलिए इसे बच्चे के विकास का पक्का तरीका मानना सही नहीं होगा.
सारा की पोस्ट पर ज्यादातर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक थीं, लेकिन एक बात ने कई लोगों का ध्यान खींच लिया. हनुमान चालीसा को 'इंडियन सांग' कहे जाने पर कुछ यूजर्स ने आपत्ति जताई. एक यूजर ने लिखा कि हनुमान चालीसा सिर्फ कोई भारतीय गाना नहीं है. यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध भक्ति रचना है, जिसका हिंदू धर्म में गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. यूजर ने सारा से इसे एक सामान्य सांस्कृतिक गीत के बजाय उसकी धार्मिक अहमियत समझने की अपील की. यही बात दूसरे लोगों ने भी अपने-अपने तरीके से रखी. कई यूजर्स ने बताया कि हनुमान चालीसा उनके लिए रोज की प्रार्थना का हिस्सा है और इसे सिर्फ मनोरंजन या बच्चे को सुलाने वाले ऑडियो की तरह देखना सही नहीं है.
जहां कुछ लोगों ने 'इंडियन सांग' वाले शब्दों पर नाराजगी जताई, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने सारा की पोस्ट की तारीफ भी की. कुछ लोगों ने कहा कि बच्चे को शांत करने के लिए मां का उसके पास रहना और उसकी जरूरत समझना सबसे महत्वपूर्ण बात है. एक यूजर ने बच्चे को खुशकिस्मत बताते हुए लिखा कि उसे ऐसी मां मिली है जो उसके साथ हर नई चीज शेयर कर रही हैं. वहीं, एक दूसरे यूजर ने अपनी मां का उदाहरण देते हुए बताया कि वह गर्भावस्था के दौरान सुंदरकांड पढ़ा करती थीं और उनका मानना था कि इससे बच्चे में भक्ति और साहस की भावना आती है. कुछ यूजर्स ने हनुमान चालीसा को लेकर अपने निजी अनुभव भी शेयर किए. हालांकि, सोशल मीडिया पर किए गए ऐसे व्यक्तिगत दावों को वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता.
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