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₹16 करोड़ में खरीद डाली पूरे सोसाइटी की पार्किंग: अब पड़ोसियों को दोगुने रेट पर दे रही स्लॉट; कोर्ट से भी लगा झटका

चीन की एक महिला ने उस समय 196 पार्किंग स्पेस खरीद लिए, जब कोई इन्हें खरीदने में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था. महिला ने आने वाले समय में इलाके के विकास का अनुमान लगाकर करीब 20 करोड़ रुपये का निवेश किया. कुछ साल बाद जब वहां घरों की मांग बढ़ी और पार्किंग की किल्लत होने लगी, तो उसने इन जगहों को ज्यादा किराये पर देना और महंगे दाम पर बेचना शुरू कर दिया. इससे सोसाइटी के लोग नाराज हो गए.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 11, 2026, 01:00 PM IST | Updated: Oct 11, 2026, 01:07 PM IST
Image Credit: प्रतीकात्मक AI इमेज
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आमतौर पर लोग इन्वेस्टमेंट के लिए फ्लैट, जमीन या दुकान खरीदते हैं. लेकिन चीन की एक महिला ने ऐसी जगह पैसा लगाया, जिसकी जरूरत तो हर रिहायशी इलाके में होती है, मगर निवेश के लिहाज से उस पर बहुत कम लोग ध्यान देते हैं. यह जगह थी कार पार्क करने के लिए बनी पार्किंग.

यह मामला चीन के हुनान प्रांत के चांगशा शहर की एक रिहायशी सोसाइटी का है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यहां वू सरनेम वाली एक महिला ने उस समय 196 पार्किंग स्पेस खरीद लिए, जब प्रोजेक्ट में इन्हें खरीदने वालों की कमी थी. महिला को भरोसा था कि आने वाले समय में इलाके की तस्वीर बदलेगी और पार्किंग की मांग भी बढ़ेगी.

2018 में तैयार हुआ था पूरा प्रोजेक्ट

रिपोर्ट के अनुसार, इस रिहायशी प्रोजेक्ट को 2018 में तैयार करके बिक्री के लिए बाजार में उतारा गया था. शुरुआत में यहां लोगों को बसाने में काफी मुश्किलें आ रही थीं. इलाके में दुकानें, स्कूल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी जरूरी सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं. इस वजह से लोग यहां घर खरीदने से भी कतरा रहे थे. जब फ्लैट खरीदने वालों की दिलचस्पी कम थी, तो पार्किंग स्पेस का बिकना भी मुश्किल था. प्रोजेक्ट बनाने वाली कंपनी आर्थिक परेशानियों से जूझ रही थी. ऐसे माहौल में वू ने स्थानीय प्रशासन की तरफ से जारी विकास योजनाओं को देखा और इलाके के भविष्य को लेकर अपना आकलन किया.

20 करोड़ रुपये लगाकर खरीद लीं 196 पार्किंग

वू ने एक ही सौदे में 196 पार्किंग स्पेस खरीद लिए. इनकी कुल कीमत करीब 1.4 करोड़ चीनी युआन बताई गई, जो भारतीय रुपये में लगभग 20 करोड़ रुपये होती है. यह उस प्रोजेक्ट की कुल पार्किंग क्षमता का करीब 40 फीसदी हिस्सा था. उस समय यह फैसला बड़ा जोखिम माना जा सकता था. इलाके में न तो पार्किंग की कोई खास किल्लत थी और न ही इतनी बड़ी संख्या में जगहें खरीदने की होड़ लगी थी. फिर भी वू ने अपना पैसा दांव पर लगा दिया. दूसरी तरफ, आर्थिक परेशानी से गुजर रही बिल्डर कंपनी को भी एक साथ बड़ी संख्या में पार्किंग स्पेस बेचने का मौका मिल गया.

इलाके की तस्वीर बदली तो बढ़ गई पार्किंग की मांग

वू ने जिस बदलाव की उम्मीद में इतना पैसा इन्वेस्ट किया था, धीरे-धीरे वैसा ही होने लगा. इलाके का विकास हुआ, रिहायशी सोसाइटी में घर तेजी से बिकने लगे और वहां रहने वाले परिवारों की संख्या बढ़ गई. इसके साथ ही कारों की संख्या बढ़ी, तो पार्किंग की जरूरत भी पहले से ज्यादा महसूस होने लगी. यहीं से वू के इन्वेस्टमेंट की तस्वीर बदल गई. जिन पार्किंग स्पेस को खरीदने के लिए शुरुआत में लोग तैयार नहीं थे, उनकी मांग बढ़ने लगी. अब महिला के पास सोसाइटी की कुल पार्किंग का बड़ा हिस्सा था. यानी जिस फैसले को शुरुआत में जोखिम माना जा रहा था, वह उसके लिए कमाई का जरिया बन गया.

किराया दोगुना किया तो भड़के सोसाइटी के लोग

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अपनी पार्किंग पर किसी दूसरे व्यक्ति के कब्जे या इस्तेमाल को रोकने के लिए वू ने वहां पार्किंग लॉक भी लगवा दिए. इसके बाद उसने कुछ जगहों को किराये पर देना शुरू किया. बताया गया कि वह एक पार्किंग स्पेस के लिए हर महीने करीब 75 डॉलर, यानी लगभग 7,000 रुपये से ज्यादा किराया मांग रही थी. यह रकम 2018 में बिल्डर की तरफ से तय शुरुआती मासिक किराये से करीब दोगुनी थी. सोसाइटी के कुछ लोगों ने उससे किराया घटाकर 300 चीनी युआन करने की मांग की, लेकिन वू इसके लिए तैयार नहीं हुई. परेशानी सिर्फ किराये तक सीमित नहीं थी. वू ने कुछ पार्किंग स्पेस बिक्री के लिए भी रखे. उनकी कीमत करीब 15,000 डॉलर प्रति स्पेस तक बताई गई. कुछ जगहों के दाम शुरुआती कीमत के मुकाबले 80 फीसदी तक ज्यादा थे. ऐसे में उन लोगों की नाराजगी बढ़ गई, जिन्हें अपनी कार खड़ी करने के लिए जगह ढूंढने में परेशानी हो रही थी.

लोगों ने कहा- पार्किंग पर एक ही व्यक्ति का कब्जा क्यों?

सोसाइटी के कुछ रहने वालों का मानना था कि पार्किंग किसी भी रिहायशी इलाके की जरूरी सुविधा है. ऐसे में एक व्यक्ति का बड़ी संख्या में पार्किंग स्पेस खरीदकर उन्हें महंगे दाम पर बेचना या किराये पर देना बाकी लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है. मामले को सुलझाने के लिए सरकारी अधिकारियों ने भी बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ. इसके बाद कुछ निवासी एकजुट होकर अदालत पहुंच गए. उन्होंने मांग की कि वू और बिल्डर के बीच हुआ पार्किंग स्पेस खरीदने का समझौता रद्द किया जाए.

अदालत ने महिला के पक्ष में सुनाया फैसला

फरवरी 2024 में चांगशा की एक स्थानीय अदालत ने इस मामले में वू के पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत का कहना था कि जब बिल्डर ने पार्किंग स्पेस बिक्री के लिए उपलब्ध कराए थे, तब सोसाइटी में रहने वालों को भी उन्हें खरीदने का मौका मिला था. लेकिन उस समय उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल नहीं किया. वू ने इसके उलट भविष्य के विकास का अनुमान लगाकर पैसा लगाने का फैसला किया. उसने इन्वेस्टमेंट के लिए जरूरी रकम जुटाई और बाजार से जुड़े जोखिम भी खुद उठाए. अदालत ने माना कि बड़ी संख्या में पार्किंग स्पेस खरीदने का उसका सौदा कानूनी था. साथ ही, ऐसा कोई कानून नहीं था, जो किसी व्यक्ति के पार्किंग स्पेस खरीदने की संख्या पर रोक लगाता हो.

निवेश की समझदारी या आम लोगों की परेशानी?

यह मामला दिखाता है कि किसी इन्वेस्टमेंट का फायदा कई बार उस समय नहीं, बल्कि कुछ साल बाद दिखाई देता है. वू ने तब पार्किंग खरीदी, जब उनकी मांग कम थी. बाद में इलाके का विकास हुआ और वही पार्किंग महंगी होने लगी. लेकिन इस कहानी का दूसरा पहलू भी है. जब कोई व्यक्ति किसी जरूरी सुविधा का बड़ा हिस्सा अपने पास रख लेता है, तो बाकी लोगों के लिए विकल्प कम हो सकते हैं. यही वजह है कि वू का फैसला कुछ लोगों को इन्वेस्टमेंट की समझदारी लगता है, जबकि दूसरों के लिए यह सोसाइटी में रहने वालों की परेशानी की वजह बन गया है.

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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